सुनील छेत्री सहित भारतीय फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ियों और इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में खेलने वाले कई विदेशी खिलाड़ियों ने शुक्रवार 2 जनवरी 2026 को मिलकर विश्व फुटबॉल की शीर्ष संस्था फीफा से आईएसएल के निलंबन पर हस्तक्षेप की अपील की।
अब तक आईएसएल का 2025-26 सत्र शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में सीनियर राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी सुनील छेत्री, गुरप्रीत सिंह संधू और संदेश झिंगन ने लंबे समय से बनी अनिश्चितता पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी कि भारतीय फुटबॉल स्थायी ठहराव की स्थिति में पहुंच रहा है।
गुरप्रीत ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए संयुक्त वीडियो बयान में कहा, ‘जनवरी का महीना है और हमें इस वक्त आईएसएल के प्रतिस्पर्धी फुटबॉल मैचों में आपकी स्क्रीन पर होना चाहिए था।’ संदेश झिंगन ने जोड़ा, ‘इसके बजाय हम डर और बेबसी के चलते वह बात कहने को मजबूर हैं, जिसे हम सभी जानते हैं।’
खिलाड़ियों ने कहा कि अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) अब अपनी जिम्मेदारियां निभाने की स्थिति में नहीं है और उन्होंने देश में खेल के भविष्य की रक्षा के लिए फीफा से आगे आने की अपील की।
अन्य खिलाड़ियों ने कहा, ‘…लेकिन सबसे अहम बात यह है कि हम यहां एक गुहार लगाने आए हैं। भारतीय फुटबॉल का प्रशासन अब अपनी जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम नहीं है। हम अब स्थायी ठहराव की ओर हैं। जो कुछ बचाया जा सकता है, उसे बचाने की यह आख़िरी कोशिश है। इसलिए हम फीफा से अनुरोध कर रहे हैं कि वह आगे आए और भारतीय फुटबॉल को बचाने के लिए जो जरूरी हो, वह करे।’
खिलाड़ियों ने जोर देकर कहा कि उनकी यह अपील मजबूरी में की गई है और यह राजनीतिक नहीं है। बयान में आगे कहा गया, ‘हमें उम्मीद है कि यह संदेश ज्यूरिख में बैठे ताकतवर लोगों तक पहुंचेगा। यह अपील न तो राजनीतिक है और न ही टकराव के लिए है, बल्कि जरूरत से प्रेरित है। यह शब्द बड़े लग सकते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि हम मानवीय, खेल और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘हमें जल्द से जल्द मदद की जरूरत है। हम बस फुटबॉल खेलना चाहते हैं, कृपया इसमें हमारी मदद करें।’ सुनील छेत्री ने निष्कर्ष में कहा, ‘खिलाड़ी, स्टाफ, मालिक और प्रशंसक सभी स्पष्टता, सुरक्षा और सबसे बढ़कर एक भविष्य के हकदार हैं।’
आईएसएल के 2025-26 सत्र को जुलाई में इसलिए रोक दिया गया था क्योंकि लीग के पूर्व आयोजक फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) और एआईएफएफ के बीच ‘मास्टर राइट्स एग्रीमेंट’ (एमआरए) के नवीनीकरण को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी।
यह समझौता 8 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया। इससे एक संविदात्मक गतिरोध पैदा हो गया। इसमें उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप की भी जरूरत पड़ी। सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त समिति की निगरानी में आईएसएल के व्यावसायिक अधिकारों के लिए निविदा जारी की गई, लेकिन कोई बोलीदाता सामने नहीं आया।
आईएसएल के 14 में से 13 क्लबों ने गुरुवार एक जनवरी 2026 को एआईएफएफ से कहा कि अगर उनसे भागीदारी शुल्क नहीं लिया जाए और यदि वह राष्ट्रीय संस्था टूर्नामेंट के आयोजन और संचालन की वित्तीय जिम्मेदारी ले तो वे विलंबित सत्र में भाग लेने के लिए तैयार हो सकते हैं।
