वेंकट कृष्ण बी। एन वजी थानी वजी (मेरा रास्ता अनोखा रास्ता है) 1999 की ब्लॉकबस्टर फिल्म पदायप्पा में रजनीकांत का एक पंचलाइन है। यह इतना लोकप्रिय डायलॉग है कि जब पिछले दिसंबर में अभिनेता के जन्मदिन पर फिल्म दोबारा रिलीज हुई, तो कुछ सिनेमाघरों में दर्शकों ने इसे फिर से दिखाने की मांग की। तमिलनाडु के वेल्लोर में जन्मे न्यूजीलैंड के लेग-स्पिनर आदित्य अशोक को यह डायलॉग इतना पसंद है कि उन्होंने इसे अपनी बॉलिंग वाली बांह पर तमिल में बड़े अक्षरों में गुदवाया है। रजनीकांत के किसी भी फैन के लिए डायलॉग खास होगा,लेकिन अशोक का इससे भावनात्मक जुड़ाव भी है।
अशोक ने यह टैटू सिर्फ रजनीकांत की वजह से नहीं बनवाया। उन्होंने ऐसा किया है क्योंकि यह आखिरी फिल्म थी जिसे वह वेल्लोर में अपने दादाजी के साथ देखे थे। उन्होंने कहा, “मुझे याद है कि हमारी काफी बातचीत हुई थी और उन्होंने कुछ ऐसी बातों के बारे में बताया था, जो उनके लिए बहुत मायने रखती थीं और एक इंसान के तौर पर उनके मूल्यों और नैतिकता के बारे में भी बताते ही हैं।”
आदित्य चार साल की उम्र में ऑकलैंड चले गए
अशोक ने कहा, “जब हम इस बारे में बात कर रहे थे, तब हम टीवी देख रहे थे और रजनीकांत की मशहूर फिल्म चल रही थी। इसकी शुरुआत वहीं से हुई। मेरे मन में इसे लेकर कुछ सवाल थे, लेकिन यह बहुत निजी बात है। उनके साथ वह बातचीत मुझे हमेशा याद रहेगी।” वेल्लोर में जन्मे आदित्य चार साल की उम्र में ऑकलैंड चले गए जब उनके माता-पिता को वहां नौकरी मिली। उनकी मां ऑकलैंड सिटी हॉस्पिटल में नर्स थीं, जबकि उनके पिता बच्चों के हॉस्पिटल में रेडियोग्राफर के तौर पर काम करते थे। क्रिकेट से उन्हें पहचान मिली, लेकिन उन्होंने अपने वेल्लोर से रिश्ता बनाए रखा है, जहां वे हर कुछ सालों में जाते रहते हैं।
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चेन्नई सुपर किंग्स एकेडमी में ट्रेनिंग ले चुके हैं आदित्य
न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के साथ आदित्य का यह भारत का पहला दौरा है, लेकिन वह पहले भी चेन्नई आ चुके हैं और पिछले जुलाई में चेन्नई सुपर किंग्स एकेडमी में काम किया था। वह कहते हैं कि यह दौरा आंखें खोलने वाली थी। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो हमने जो चीजें सीखीं वे कमाल की थीं। बल्लेबाज के सेट करना जैसी चीजें सीखीं। हमने बहुत सारी चीजें सीखीं जो सच में बहुत अच्छी थीं। काली मिट्टी और लाल मिट्टी की पिचें कैसा बर्ताव करती हैं, यह मेरे लिए बड़ी सीख थी। एक क्रिकेटर के तौर पर मेरी जानकारी बढ़ी, जो शायद सबसे जरूरी चीज है।”
अशोक को मौके के लिए करना पड़ता है इंतजार
एज-ग्रुप सिस्टम से निकलकर आए 23 साल के इस खिलाड़ी की रैंकिंग काफी नीचे है। मिचेल सेंटनर, एजाज पटेल और ईश सोढ़ी के होने की वजह से अशोक को मौके के लिए सब्र से इंतजार करना पड़ा है। 2023 में इंटरनेशनल डेब्यू के बाद से उन्होंने सिर्फ दो वनडे और एक टी20 खेला है, क्योंकि पीठ की गंभीर चोट की वजह से वह एक साल से ज्यादा समय तक टीम से बाहर रहे। उनकी सर्जरी उसी सर्जन ने की थी जिसने जसप्रीत बुमराह का ऑपरेशन किया था।
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अशोक के पास खुद के साबित करने का मौका
भारत के खिलाफ न्यूजीलैंड सीरीज अशोक को खुद को साबित करने का एक अनोखा मौका देती है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस माहौल में रहना एक बड़ी बात है और मैं हमेशा प्रोसेस पर ध्यान देता रहा हूं। अगर मैं इस सीरीज से कुछ नए तरीके सीखकर या एक क्रिकेटर और एक इंसान के तौर पर खुद के बारे में कुछ सीखकर जाता हूं तो यह मुझे बेहतर स्थिति में रखेगा। जाहिर है सफलता बहुत अच्छी होगी, लेकिन मुझे लगता है कि अगर आप नतीजे से जुड़ी उम्मीदों और भावनाओं को हटा देते हैं तो यह आपको सीखने और बेहतर बनने का मौका मिलता है। यह ऐसे देश में खेलने का एक रोमांचक मौका है, जहां क्रिकेट का इतना महत्व है और क्रिकेट का माहौल हमेशा बना रहता है।”
अशोक को भारत की पिचों के बर्ताव का अच्छा अंदाजा
भारत के दौरों से अशोक की पिचों के बर्ताव का अच्छा अंदाजा हो गया है, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि इससे उन्हें कोई फायदा मिलता है। हाल के दिनों में न्यूजीलैंड के स्पिनरों को भारत में सभी फॉर्मेट में सफलता मिली है और ज्यादातर लोग इसका कारण अपने देश की मुश्किल परिस्थितियों को बताते हैं, जिससे वे अपनी लाइन और लेंथ में ज्यादा अनुशासित रख पाते हैं। आदित्य भी यही बात कहते हैं कि उनके देश की परिस्थितियां उनकी बॉलिंग में और गहराई और विविधता लाती हैं। उन्होंने कहा, “न्यूजीलैंड की पिचें (स्पिनरों को)ज्यादा मदद नहीं करतीं। इसलिए,सटीकता, हवा, ड्रिफ्ट, ड्रॉप ये सब न्यूजीलैंड में जरूर होने चाहिए। बाउंस फैक्टर भी। लेकिन जब भारत की बात आती है तो थोड़ा ज्यादा टर्न मिलने की संभावना होती है। पिच की उछाल थोड़ी कम होगी या लाल मिट्टी पर टर्न बहुत तेज होगा। आपको ढलना होगा।”
