ललित कालिदास। “मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या करना है, सर। आइए हम चर्चा करें और कुछ करते हैं…।” कोच विजयकुमार मद्यालकर को वह शाम अच्छी तरह याद है जब कर्नाटक अंडर-25 का उनका एक शिष्य अपने करियर को पटरी पर लाने की हताशा भरी अपील के साथ उनकी एकेडमी पहुंचा। भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले दूसरे खिलाड़ी करुण नायर को जून में 2022 सत्र के बाद घरेलू टीम कर्नाटक से नजरअंदाज कर दिया गया था।

करुण नायर ने 2022 की सर्दियों में ‘डियर क्रिकेट’ वाला भावनात्मक ट्वीट किया था। इसके बाद करुण नायर ने मद्यालकर और एक व्हाट्सएप ग्रुप की मदद से इस झटके से उबरने की कोशिश की। भारतीय टीम में वापसी के साथ शनिवार (25 मई) को करुण नायर के ट्रेनर साई प्रसन्ना और उनके सहायक के साथ ‘कमबैक सीजन’ ग्रुप का उद्देश्य पूरे दो साल की कड़ी मेहनत, पसीने और चुप्पी के बाद पूरा हुआ। सात साल में पहली बार टेस्ट में वापसी घरेलू सत्र में सभी प्रारूपों में शानदार प्रदर्शन से संभव हुई। बदलाव के दौर से गुजर रही टीम इंडिया ने नए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप साइकल में शुभमन गिल की अगुआई में करुण नायर को मौका दिया।

लगभग तीन घंटे की यात्रा

कुछ समय पहले करुण नायर का करियर दांव पर था क्योंकि वह कर्नाटक की टीम से बाहर होने के बाद जुलाई 2022 और 14 महीने बाद नॉर्थम्पटनशायर में प्रथम श्रेणी में वापसी के बीच जवाब तलाश रहे थे। बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित जस्ट क्रिकेट एकेडमी में कर्नाटक अंडर-19 और अंडर-25 के दौरान कोच रहे मद्यालकर से जुड़ते हुए करुण नायर ने हर दूसरे दिन लगभग तीन घंटे की यात्रा की।

टूट चुके थे करुण नायर

मद्यालकर ने करुण नायर को लेकर कहा, “वह अंदर से टूट चुके थे। मैं इस बात पर चर्चा नहीं करना चाहता था कि वह कर्नाटक टीम में क्यों नहीं चुने गए। मैंने उनसे कहा कि चिंता मत करो। हम केवल उनके अंदर के बल्लेबाज को देखेंगे और जितना संभव हो सके उसके कौशल को निखारेंगे। छह महीने। हर दूसरे दिन वह हमारी एकेडमी में साइड-आर्म थ्रोअर और अन्य गेंदबाजों का सामना करते हुए ठीक 600 गेंदें खेलने के लिए आते थे।”

भारत में मौका नहीं मिला तो काउंटी खेले

केएल राहुल और करुण नायर जैसे खिलाड़ियों को एज ग्रुप क्रिकेट के दिनों से खेलते हुए देखने वाले मद्यालकर का कहना है कि यह दोनों खिलाड़ी तकनीक से और शॉट को बेहतर बनाने पर जोर देते थे। उन्होंने बताया कि पूरे घरेलू सत्र के दौरान घरेलू मैदान पर मैच न होने से नायर बेचैन होने लगे। उन्होंने “वह अपने खेल को परखना चाहते थे, लेकिन हम उन्हें यहां खेलने का मौका नहीं दे पाए। जब ​भारत में कोई अवसर नहीं मिला तो उन्होंने एक साल बाद काउंटी में खेलना शुरू कर दिया।”

ओवल से ओवल तक का सफर

करुण नायर को ओवल में 2018 में झटका लगा था। वह भारतीय टीम से बाहर हो गए थे। नायर ने नॉर्थम्पटनशायर के लिए अपने दूसरे काउंटी डिवीजन 1 गेम में करियर को पुनर्जीवित करने वाली 150 रन की पारी खेली। इस पारी के कारण 2023-24 के लिए विदर्भ के साथ गेस्ट प्लेयर के तौर पर मौका मिला। इससे वह चर्चा में आए। 33 पारियों में 1553 रन ठोके। करियर का सर्वश्रेष्ठ रणजी ट्रॉफी सीजन में 883 रन ठोके और विदर्भ को खिताब दिलाया। इसके बाद उनकी भारतीय टीम में वापसी हुई।

चयनकर्ताओं को किया मजबूर

विदर्भ के कोच उस्मान गनी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में नायर के पहले साल में ही टीम में शामिल होने के सहज बदलाव के बारे बताया। उन्होंने कहा, “उन्होंने अपने प्रदर्शन से राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को टीम में वापसी के लिए मजबूर कर दिया है।” गनी कहते हैं कि इस वर्ष की शुरुआत में विजय हजारे ट्रॉफी टूर्नामेंट के लिए नायर को 50 ओवरों की कप्तानी सौंपने का निर्णय एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ।

विजय हजारे के लिए कप्तान

गनी ने कहा,”जब करुण आए तो उन्हें मध्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी गई। वह अपने पहले सीजन में ही छा गए थे इसलिए हमने उन्हें इस बार विजय हजारे के लिए कप्तान बनाने का फैसला किया। अतिरिक्त जिम्मेदारी ने उन्हें और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। मोमेंटम और आत्मविश्वास ने टीम को रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट में पहुंचा दिया।”

389.50 के औसत से 779 रन

वीएचटी में कर्नाटक के खिलाफ फाइनल में हारने के बावजूद नायर के 389.50 के औसत से 779 रन और पांच शतक (लगातार चार) के कारण उनकी भारत में वापसी की बात होने लगी। मार्च में केरल के खिलाफ फाइनल में शतक सहित 423 रन बनाकर रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट में शानदार प्रदर्शन के कारण आखिरकार उन्हें टीम में मौका मिल गया।

मानसिक रूप से एक बेहतरीन खिलाड़ी

गनी ने कहा, “करुण मानसिक रूप से एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं। टेस्ट टीम में अपनी जगह फिर से हासिल करने के लिए उनमें ईमानदारी और काम करने की भावना थी। यह ऐसी चीज है जिससे सभी युवा सीख सकते हैं। उन्होंने अपनी फिटनेस का भी ध्यान रखा। इसलिए चयनकर्ताओं ने आज उन्हें इस तरह पुरस्कृत किया।”

10 किलो वजन कम किया

करुण नायर की फिटनेस पर प्रसन्ना ने कहा, “उन्होंने 10 किलो वजन कम किया और मांसपेशियों में लगभग 5 किलो की वृद्धि हुई। इस सीजन में जब उन्होंने स्कोर करना शुरू किया तो पहले कुछ मैचों के बाद हमने उन्हें बहुत सारी पावर ट्रेनिंग और हैवी लिफ्ट से परिचित कराया। वह बस पूरी तरह से बदलना चाहते थे।” कोच के अनुसार 2018 और 2025 के करुण नायर कई मायनों में अलग नहीं हैं। तकनीक और स्वभाव नहीं बदला है औरमद्यालकर “प्रार्थना” कर रहे हैं कि करुण दौरे पर भारत के लिए पहला शतक लगाए।