देवेंद्र पांडे। फिलहाल यह दूर की कौड़ी लग सकती है, लेकिन अजिंक्य रहाणे को अब भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की उम्मीद है। राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने भले ही युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताया हो, लेकिन 36 साल के अजिंक्य रहाणे का मानना ​​है कि वह फिट हैं और अब भी टीम में योगदान दे सकते हैं। अजिंक्य रहाणे ने भारत के लिए आखिरी बार लगभग दो साल पहले वेस्टइंडीज में खेला था।

विदर्भ के खिलाफ रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) सेमीफाइनल (Semi Final) से एक दिन पहले मुंबई (Mumbai) के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने द इंडियन एक्सप्रेस से अपनी इच्छा के बारे में बात की और बताया कि उनके लिए घर पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (Border-Gavaskar Trophy) देखना कितना मुश्किल था। रणजी ट्रॉफी में दो बड़ी पारियां अजिंक्य रहाणे को फिर से दावेदारी में ला सकती हैं।

36 साल की उम्र में अजिंक्य रहाणे के लिए क्या बदल गया है?

जाहिर है, मैं पहले से ज्यादा अनुभवी हूं, लेकिन फिर भी खुद को युवा महसूस करता हूं। मैं उच्चतम स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए पर्याप्त रूप से फिट हूं। मैं जुनूनी हूं और इस खेल से प्यार करता हूं। अच्छा करने की भूख है। मैं अपने खेल से कभी संतुष्ट नहीं होता और चीजों को हल्के में नहीं लेता। उच्चतम स्तर पर खेलने के लिए मेरे अंदर अब भी आग जल रही है। मुझे लगता है कि मेरे अंदर अभी और क्रिकेट बाकी है।

क्या आप शुरू से ही अंतर्मुखी थे और अब आपको इस बात का पछतावा है कि आपने समय अपनी बात नहीं रखी?

मैं हमेशा से शर्मीला था, अब मैं खुल गया हूं। मेरा ध्यान क्रिकेट खेलने और घर जाने पर रहा है। किसी ने मुझे नहीं बताया कि आगे बढ़ने के लिए कुछ चीजों की जरूरत होगी। आज भी, कभी-कभी मुझे लगता है कि बस क्रिकेट खेलो, घर जाओ। अब मुझे कहा जाता है कि मुझे अपनी मेहनत के बारे में बात करनी चाहिए। लोग कहते हैं कि आपको खबरों में बने रहने की जरूरत है… मेरे पास कोई PR टीम नहीं है, मेरा एकमात्र PR मेरा क्रिकेट है। मुझे अब अहसास हो गया है कि खबरों में बने रहना बहुत जरूरी है। नहीं तो लोग सोचते हैं कि मैं खबरों से बाहर हो गया हूं।

चयनकर्ताओं की ओर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने के बावजूद आप किस वजह से खेल रहे हैं?

टेस्ट क्रिकेट। मेरे अंदर अब भी जोश और जुनून है। मैं इस समय रणजी ट्रॉफी खेल रहा हूं, मुंबई टीम के लिए अपना सब कुछ देने की कोशिश कर रहा हूं। मेरा लक्ष्य साफ है कि मैं फिर से वापसी करूं। जब कुछ साल पहले मुझे टीम से बाहर किया गया था, तो मैंने रन बनाए और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए चुना गया और फिर मुझे फिर से टीम से बाहर कर दिया गया, लेकिन मेरे नियंत्रण में क्या है? खेलना है।

क्या आपको इस अनदेखी से दुख नहीं हुआ?

मैंने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन किया और मुझे फिर से बुलाया गया। जब भी कोई अनुभवी खिलाड़ी वापसी करता है, तो उसे पता होता है कि उसे 2-3 सीरीज मिलेंगी। मुझे पता था कि दक्षिण अफ्रीका एक चुनौतीपूर्ण सीरीज थी। मुझे कॉल की उम्मीद थी, लेकिन मुझे नहीं चुना गया। मुझे बुरा लगा क्योंकि मैं इतने लंबे समय से टीम को अपनी सेवाएं दे रहा हूं।

क्या आपको नहीं लगता कि अपनी प्रतिभा के मुताबिक आप और अधिक कर सकते थे? (चेतेश्वर) पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया दौरा शानदार खेला था, लेकिन आपके मामले में, ऐसी कुछ ही पारियां हैं?

जिस नंबर पर मैं बल्लेबाजी करता था, जो भी योगदान देता था, वह महत्वपूर्ण था। कोविड के बाद, जिस तरह की पिचों पर हम खेलते थे, उसके कारण सभी के बल्लेबाजी औसत में भारी गिरावट आई है। ऐसी पिचों पर केवल शीर्ष क्रम को ही फायदा होता है। मैं बहाने नहीं बना रहा हूं। मुझे कोई पछतावा नहीं है, क्योंकि मुझे पता है कि जब भी टीम चाहती थी कि मैं अच्छा प्रदर्शन करूं, मैंने किया। जरूरी नहीं कि योगदान बड़े शतकों के रूप में हो, यह 70, 80 या 50 रन का भी हो सकता है।

लेकिन हाल ही में बहुत बड़ी पारियां नहीं खेली गई हैं?

यह दुखद बात है। मेरे लिए, यह रनों के बारे में नहीं है, यह योगदान के बारे में है। एक बल्लेबाज के रूप में, कोई भी व्यक्ति बड़े रन बनाना चाहता है, लेकिन यह नहीं भूलता कि वह किस परिस्थिति में खेल रहा है। मैं वह व्यक्ति नहीं हूं जो जाकर चिल्लाएगा, पिचों की आलोचना करेगा, क्योंकि हर टीम की एक रणनीति होती है और पिचों को उसी तरह तैयार किया जाता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि शीर्ष खिलाड़ियों का भी औसत कम हो गया है। यह केवल हम ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर, सभी ने संघर्ष किया है। यह वास्तविकता है जिसके बारे में हम सार्वजनिक रूप से बात नहीं करते हैं।

Ajinkya Rahane, Ajinkya Rahane interview, Ajinkya Rahane exclusive interview
कोलकाता के ईडन गार्डन स्टेडियम पर रणजी ट्रॉफी एलीट 2024-25 के तीसरे क्वार्टर फाइनल में हरियाणा के खिलाफ टीम की जीत पर तस्वीर के लिए पोज देते हुए मुंबई के कप्तान अजिंक्य रहाणे, प्लेयर ऑफ द मैच शार्दुल ठाकुर और टीम के साथी सूर्यकुमार यादव। (सोर्स- फाइल फोटो एएनआई)

क्या आपने चयनकर्ताओं से बात की?

मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो जाकर पूछे कि मुझे क्यों हटाया जा रहा है। कोई संवाद नहीं हुआ। कई लोगों ने कहा कि ‘जाओ और बात करो’ लेकिन कोई तभी बात कर सकता है जब दूसरा व्यक्ति बात करने के लिए तैयार हो। अगर वह तैयार नहीं है, तो लड़ने का कोई मतलब नहीं है। मैं आमने-सामने बात करना चाहता था। मैंने कभी मैसेज नहीं किया। मुझे अजीब लगा जब मुझे WTC फाइनल के बाद बाहर कर दिया गया, क्योंकि मैंने इसके लिए कड़ी मेहनत की थी। मुझे लगा कि मैं अगली सीरीज के लिए वहां रहूंगा। शिकायत करने का कोई मतलब नहीं है। मैं केवल वही कर सकता हूं जो मेरे हाथ में है। मुझे विश्वास है कि मैं वापसी करूंगा।

आपने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन किया?

मैं इससे बहुत खुश था। मैं अच्छी तरह से खेल रहा था। मेरी फिटनेस अच्छी थी। मैंने अपने शॉट्स में सुधार किया।

क्या आपने कभी सोचा था कि अपनी कप्तानी में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीतने के बाद आपका करियर उतार-चढ़ाव भरा होगा?

जब मैं BGT के बाद लौटा तो मुझे पता था कि मैं केवल उसी अवधि के लिए कप्तान था और फिर से उप-कप्तान बन जाऊंगा। मैंने कभी नहीं सोचा था कि आगे का सफर उतार-चढ़ाव भरा होगा।

क्या आपको वह श्रेय मिला जिसके आप हकदार थे?

शायद। हम एक टीम की वजह से जीते, न कि इसलिए कि मैं कप्तान था। हो सकता है कि मैंने जो एक निर्णय लिया वह सही रहा हो, लेकिन यह एक टीम का प्रयास था।

कई खिलाड़ी सोशल मीडिया का इस्तेमाल कहानी बनाने के लिए करते हैं, लेकिन आपने इसका इस्तेमाल नहीं किया?

मैंने कभी इसके बारे में नहीं सोचा। मुझे हमेशा लगता है कि हर क्रिया की अपनी प्रतिक्रिया होती है। मेरे दोस्तों ने कहा कि मुझे मीडिया में रहना चाहिए, उनसे बात करते रहना चाहिए क्योंकि आपकी कप्तानी में टीम जीती है, लेकिन मुझे लगता है कि जो होना है वह होगा।

क्या इस बार टीवी पर बीजीटी (Border Gavaskar Trophy) देखना मुश्किल था?

हां। मुझे अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद बाहर कर दिया गया था, इसलिए कहीं न कहीं लगता है कि मैं अब भी भारतीय टीम की सेवा कर सकता हूं। मेरे अंदर अब भी क्रिकेट बचा है।

…लेकिन ऐसा लगता है कि भारतीय क्रिकेट आगे बढ़ गया है?

अगर आप मुझसे पूछें, तो मैं अब भी अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकता हूं और मेरे इरादे अच्छे हैं। मेरे लिए, यह सब देश के बारे में है।

आपने BGT के दौरान विशेषज्ञ बनने का प्रस्ताव क्यों नहीं लिया?

मुझे विशेषज्ञ बनने का प्रस्ताव मिला था। यह आसान था और अच्छा पैसा था लेकिन मेरे भीतर, एक व्यक्ति कह रहा है कि मैं अब भी खेल सकता हूं। चुना जाना या नहीं चुना जाना मेरे हाथ में नहीं है। आगे चलकर, मैं ऐसी स्थिति नहीं चाहता जहां मुझे लगे कि इस विशेषज्ञ असाइनमेंट को तो मैं बाद में ले सकता था। पूरी खबर यहां पढ़ें