हिंदी सिनेमा के भाईजान सलमान खान (पूरा नाम- अब्दुल रशीद सलीम सलमान खान) बीते दिसंबर को 58 साल के हो गए। वह पटकथा लेखक सलीम खान और उनकी पहली पत्नी सुशीला चरक के सबसे बड़े बेटे हैं। एक मुस्लिम पिता और हिंदू मां के घर जन्मे सलमान खान का पालन-पोषण दोनों धर्मों में हुआ। हालांकि सलीम खान से शादी के बाद सुशीला सलमा हो गई थीं।

माना जाता है कि सलमान खान के परदादा अफगानिस्तान के अलकोज़ई पश्तून थे, जो 1800 के दशक के मध्य में ब्रिटिश भारत के इंदौर रेजीडेंसी (अब मध्य प्रदेश में) में आकर बस गए थे। हालांकि, जसीम खान ने सलमान खान की जीवनी ‘बीइंग सलमान’ में बताया है कि अभिनेता के पूर्वज ब्रिटिश भारत (वर्तमान खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान) के उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत की स्वात घाटी में मलकंद के यूसुफजई पश्तूनों की अकुजई उप-जनजाति से थे।

तैराकी से डरते थे सलमान

जसीम खान की सलमान खान की जीवनी में उनके बचपन का किस्सा लिखा है। जसीम को सलमान के करीबी रिश्तेदारों ने बताया है कि कैसे अभिनेता बचपन में तैराकी से डरते थे। एक दिन सलमान को उनकी बड़ी अम्मी ने रस्सी से बांधकर पड़ोस के कुएं में फेंक दिया था। यह तैराकी का उनका पहला पाठ था।

बचपन में इंदौर रही पसंदीदा जगह

सलमान का ज्यादातर बचपन मुंबई में बीता। फिर भी, जब वह ग्वालियर के सिंधिया बोर्डिंग स्कूल में पढ़ रहे थे तो इंदौर उनकी पसंदीदा जगह थी। सलमान के चाचा नईम खान ने जसीम को बताया है कि कैसे उनके भतीजे ने एक बार स्कूल जाने से मना कर दिया था ताकि वह इंदौर में अपने दोस्तों और चचेरे भाइयों के साथ मौज-मस्ती कर सकें।

सलमान के भाई अरबाज खान सिंधिया बोर्डिंग स्कूल में उनके दोस्त थे। सलमान आठवीं कक्षा में थे जबकि अरबाज छठी कक्षा में थे; दोनों ने वहां दो साल तक पढ़ाई की। सलमान रानोजी हाउस में थे और अरबाज शिवाजी हाउस में। दोनों ने 1979 में स्कूल छोड़ दिया और उनका दाखिला मुंबई के सेंट स्टैनिस्लॉस कॉन्वेंट हाई स्कूल में कर दिया गया।

सलमान कई स्कूलों में पढ़ें, लेकिन इंदौर उनकी जिंदगी का हिस्सा बना रहा। वह गर्मी की छुट्टियों में इंदौर जाते रहे। कभी उन्हें गुलेल से खेलना बहुत पसंद था। वह दोपहर में इंदौर की सड़कों पर घंटों साइकिल चलाते थे। इंदौर में ही उन्होंने घोड़ागाड़ी चलाना भी सीखा। उन दिनों उनके दिन मौज-मस्ती में गुजारते थे और शाम मधुशाला में खत्म होती थी। इंदौर में उन दिनों गन्ने के रस की दुकान मधुशाला कहा जाता था। वैसे खान भाइयों के सिंधिया बोर्डिंग स्कूल छोड़ने का किस्सा भी अनोखा है।

जब अरबाज ने दी किले की दीवार से कूद जाने की धमकी

सलमान के सभी रिश्तेदार बताते हैं कि सलमान को पढ़ाई से ज्यादा खेलना पसंद था। यही एक कारण था कि सलीम खान ने उन्हें ग्वालियर के सिंधिया बोर्डिंग स्कूल में भेज दिया था। देश के शीर्ष चार स्कूलों में गिना जाने वाला यह स्कूल मूल रूप से शाही घरानों के बच्चों को शिक्षा देने के लिए बनाया गया था।

लेकिन इतना हाई-प्रोफाइल कैंपस भी सलमान के दिल और दिमाग को पढ़ाई के लिए प्रेरित नहीं कर सका। आखिरकार सलीम खान को उन्हें सेंट स्टैनिस्लॉस कॉन्वेंट हाई स्कूल में पढ़ाई के लिए वापस मुंबई ले जाना पड़ा।

जीवनी में नईम खान ने सलमान के सिंधिया स्कूल छोड़ने का किस्सा शेयर किया, “ये स्कूल ग्वालियर किले के ऊपरी हिस्से में है। छात्रों को नीचे आने की इजाजत नहीं है। मुंबई में मौज-मस्ती करने के आदी सलमान के लिए यह किसी जेल से कम नहीं था। वहां जिंदगी स्कूल, खेल के मैदान और हॉस्टल तक ही सीमित थी। सलमान ने अपने माता-पिता को बाहर निकालने के लिए हर तरह के नखरे दिखाए। अरबाज ने अपने एक पत्र में यहां तक धमकी दी थी कि अगर उन्हें बोर्डिंग से वापस नहीं बुलाया गया तो वह किले की दीवार से कूद जाएंगे। इससे उनका परिवार नरम पड़ गया।”