दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने बुधवार को केंद्र सरकार से ये अपील की है कि भारतीय करेंसी पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की तस्वीरें लगाई जाए, उनका मानना है कि इससे देश में “समृद्धि” आएगी, भाजपा ने उनकी इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे आप का हिन्दू देवी-देवताओं के प्रति सोच में “यू-टर्न” बताया तो वहीं कांग्रेस ने केजरीवाल को भाजपा-आरएसएस की “बी-टीम” कहा है। 

भारतीय मुद्रा पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश  की तस्वीर लगाने की मांग नई नहीं है, इससे पहले भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी ठीक ऐसी ही मांग की थी, अब सवाल यह है कि भारतीय मुद्रा के डिजाइन और उसपर क्या छपेगा क्या नहीं, इसका अधिकार किसके पास होता है ? आइए जानते हैं

नोट जारी करने में RBI की क्या भूमिका है? 

बैंक नोटों और सिक्कों के डिजाइन और रूप में बदलाव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार द्वारा तय किए जाते हैं। करेंसी नोट के डिजाइन में किसी भी बदलाव को आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड और केंद्र सरकार द्वारा अप्रूव किया जाता है और सिक्कों के डिजाइन में बदलाव केंद्र सरकार का विशेषाधिकार है। केंद्रीय बैंक  एक डिजाइन तैयार करता है, जिसे आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड के सामने रखा जाता है, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 22, आरबीआई को भारत में बैंक नोट जारी करने का “एकमात्र अधिकार” देती है। वहीं धारा 25 में कहा गया है कि “बैंक नोटों का डिज़ाइन, रूप और सामग्री ऐसी होनी चाहिए जो आरबीआई  के केंद्रीय बोर्ड द्वारा की गई सिफारिशों पर विचार करने के बाद केंद्र सरकार द्वारा अप्रूव हो, वर्तमान में डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर की अध्यक्षता में आरबीआई के मुद्रा प्रबंधन विभाग के पास  मुद्रा प्रबंधन के मुख्य कार्य को प्रशासित करने की जिम्मेदारी है। 

देखें, केजरीवाल ने क्या कहा

आरबीआई की वेबसाइट के अनुसार, विभाग “बैंक नोटों के डिजाइन” से संबंधित नीति और परिचालन संबंधी मुद्दों को संबोधित करता है जैसे नोटों और सिक्कों की मांग का पूर्वानुमान लगाना,पूरे देश में बैंकनोटों और सिक्कों का सुचारू वितरण सुनिश्चित करना और प्रचलन से अनुपयुक्त नोटों और अवैध सिक्कों की अपने कब्जे में लेना आदि।  यदि किसी करेंसी नोट का डिज़ाइन बदलना है तो विभाग डिज़ाइन पर काम करता है और इसे आरबीआई के सामने  प्रस्तुत करता है जो केंद्र सरकार को इसकी अनुशंसा करता है और सरकार अंतिम मंजूरी देती है।

आरबीआई का मुद्रा प्रबंधन काम कैसे करता है?

रिजर्व बैंक केंद्र सरकार और अन्य हितधारकों से सलाह लेकर एक वर्ष में मूल्यवर्ग के मुताबिक आवश्यक नोटों की मात्र का अंदाजा लगता है और उनकी आपूर्ति के लिए विभिन्न मुद्रा प्रिंटिंग प्रेसों के सामने मांगपत्र रखता है। अपनी स्वच्छ नोट नीति के संदर्भ में, RBI जनता को अच्छी गुणवत्ता वाले बैंकनोट प्रदान करता है। प्रचलन से वापस प्राप्त होने वाले नोटों की जांच की जाती है, जिसके बाद जो नोट प्रचलन के लिए उपयुक्त होते हैं उन्हें फिर से जारी किया जाता है, जबकि गंदे और कटे-फटे नोटों को नष्ट कर दिया जाता है।

सिक्कों को ढालने का निर्णय कौन करता है ?

सिक्का अधिनियम 2011 के अंतर्गत केंद्र सरकार को विभिन्न मूल्यवर्ग के सिक्कों को डिजाइन करने और ढालने का अधिकार मिलता है। सिक्कों के मामले में आरबीआई की भूमिका केंद्र सरकार द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले सिक्कों के वितरण तक सीमित है।

सरकार आरबीआई से सालाना आधार पर प्राप्त होने वाले माल की फरमाइश के आधार पर सिक्कों की मात्रा तय करती है। मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और नोएडा में भारत सरकार के स्वामित्व वाली चार टकसालों में सिक्के ढाले जाते हैं।

भारत में कहां छपते हैं नोट ? 

भारत में  करेंसी नोट प्रिंटिंग प्रेस नासिक और देवास में मोजूद है जोकि भारत सरकार के अंतर्गत है।  दो अन्य  प्रिंटिंग प्रेस मैसूर और सालबोनी में हैं जोकि  भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण लिमिटेड (बीआरबीएनएमएल) के स्वामित्व में हैं।

वर्तमान में 10 रुपये, 20 रुपये, 50 रुपये, 100 रुपये, 200 रुपये, 500 रुपये और 2,000 रुपये के बैंकनोट जारी किए जा रहे हैं। 2 रुपये और 5 रुपये के नोट अब जारी नहीं किए जाते हैं, हालाँकि इन मूल्यवर्ग के पुराने नोट यदि अभी भी प्रचलन में हैं तो वैध मुद्रा बने रहेंगे।