दिल्ली की हार के बाद आम आदमी पार्टी गोवा में अस्तित्व के संकट से जूझ रही है, भाजपा के भीतर भी असंतोष उभर रहा है। कहीं भरोसे टूट रहे हैं, कहीं जुबान फिसल रही है, तो कहीं सत्ता अपराधियों पर मेहरबान दिखती है।

गोवा का गम

आम आदमी पार्टी पर दिल्ली की हार ने संकट बढ़ाया था। पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल खुद दिल्ली विधानसभा चुनाव हार गए तो पार्टी में उनके रुतबे पर भी असर पड़ा। यह बात अलग है कि गुजरात विधानसभा की विसावदर सीट के उपचुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार की जीत हुई थी। पंजाब में विधानसभा की दो सीटों का उपचुनाव और पंचायत चुनाव भी उसने जीता। लेकिन गोवा के संकट ने केजरीवाल की चिंता बढ़ा दी है। गोवा विधानसभा में आम आदमी पार्टी के दो उम्मीदवार विजयी हुए थे। अब गोवा में पार्टी के भीतर बगावत हो गई है। अमित पालेकर ने पार्टी छोड़ दी है। कुछ दिन पहले तक वे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे। लेकिन पंचायत चुनाव में सफलता नहीं मिली तो केजरीवाल ने पालेकर को पद से हटा दिया था। नाराज पालेकर ने केजरीवाल और गोवा की प्रभारी आतिशी को चिट्ठी भी लिखी है, जिसमें उन्होंने पार्टी नेतृत्व की आलोचना की है। उनके साथ कार्यकारी अध्यक्ष श्रीकृष्ण परब और कुछ अन्य नेताओं ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया है। चर्चा है कि जल्दी ही पार्टी के दोनों विधायक भी त्यागपत्र दे सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो आम आदमी पार्टी का गोवा में वजूद ही खतरे में पड़ जाएगा। दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद से केजरीवाल अपना पूरा ध्यान पंजाब पर दे रहे हैं। अब चिंता है कि कहीं गोवा में पार्टी का अस्तित्व गुम न हो जाए।

श्रीलेखा का दुख

आर श्रीलेखा अपनी पार्टी भाजपा से दुखी हैं। किरण बेदी देश की पहली महिला आइपीएस रही हैं, तो श्रीलेखा केरल की पहली महिला आइपीएस अधिकारी। वे अपने राज्य की पुलिस महानिदेशक भी रही हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद से भाजपा की राजनीति कर रही हैं। भाजपा की केरल प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। भाजपा ने उन्हें तिरुवनंतपुरम का मेयर बनाने का भरोसा देकर नगर निगम चुनाव में पार्षद का चुनाव लड़ा दिया। वे न केवल खुद जीत गईं, बल्कि और भी पार्षद जितवाए। पर पार्टी ने उन्हें मेयर नहीं बनाया। केरल के किसी शहर के निगम चुनाव में भाजपा को पहली बार बहुमत मिला है। इस सफलता पर भाजपा का नेतृत्व बल्लियों उछल रहा है। खुद प्रधानमंत्री ने भी इस जीत के लिए केरल के लोगों को बधाई दी। पर तिरुवनंतपुरम का मेयर बना दिया वीवी रमेश को। बेचारी श्रीलेखा खुद को ठगा महसूस कर रही हैं।

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बार-बार फिसलती जुबान

भाजपा ने सत्ता में नए चेहरे दिए हैं तो उनकी फिसलती जुबान भी कांग्रेस नेताओं के लिए काम बन गई है। एक प्रदेश की मुख्यमंत्री के ऐसे बयानों की कड़ी ही तैयार हो गई है जो मीम की दुनिया में वायरल हो रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने करतार पुर कारिडोर को करतार सिंह कारिडोर बता दिया। इस पर कांग्रेस नेत्री ने भी तंज किया किया कि ये भाजपा शिरोमणि अद्भुत हैं और साथ में पूरे प्रकरण का वीडियो भी नत्थी कर दिया। इस वीडियो में भाजपा नेता इस कारिडोर को शुरू करने के लिए केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिना रही थीं। लग रहा है कि भाजपा नेता अति दृश्यता व अति उत्साह की शिकार हैं, जहां अर्थ का अनर्थ करने वाली बात मुंह से निकल जाती है।

आबादी बढ़ाओ

लोकसभा सीटों के परिसीमन ने दक्षिण के राज्यों की चिंता बढ़ाई है। केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों को डर है कि उत्तर भारत के राज्यों में लोकसभा सीटें आबादी के अनुपात में बढ़ जाएंगी। इस मापदंड पर दक्षिण के राज्यों में सीटें कम बढ़ेंगी। दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने इसे उनका बेवजह का डर बताया है और कहा है कि सीटें देश भर में ‘प्रो-राटा’ आधार पर बढ़ेंगी। बहरहाल, एमके स्टालिन और चंद्रबाबू नायडू ने अपने-अपने राज्यों में लोगों से जनसंख्या बढ़ाने का आग्रह किया है। हालांकि ज्यादा बच्चे पैदा करने की सलाह आरएसएस भी देता है पर केवल हिंदुओं को। हैरानी की बात यह है कि अब तेलंगाना की कांग्रेस सरकार भी आबादी बढ़ाओ के नारे के साथइसी होड़ में कूद पड़ी है। तेलंगाना सरकार ने दो से ज्यादा बच्चों वाले माता-पिता के पंचायत चुनाव लड़ने पर लगी रोक खत्म कर दी है। तेलंगाना में अब कोई भी अधिकृत होगा पंचायत चुनाव लड़ने को। चर्चा तो यह भी है कि तेलंगाना सरकार ज्यादा बच्चे पैदा करने पर प्रोत्साहन देने की योजना भी बना रही है। भारत में जनसंख्या को लेकर अभी भी असमंजस जारी है। एक तरफ तो बेरोजगारी से लेकर ट्रेनों में भीड़ तक की समस्या का दोषी ज्यादा जनसंख्या को माना जाता है। जानकार मानते हैं कि भारत के भूगोल के हिसाब से जनसंख्या उतनी बड़ी समस्या नहीं है, जितना कि संसाधनों का प्रबंधन। देश का बड़ा तबका कम बच्चों को लेकर जागरूक दिखता है।

अपराधी पर रहमदिल सत्ता

भाजपा के लिए गुरमीत राम रहीम सिंह आज भी संत हैं। बलात्कार के मामलों में उसे उम्रकैद की सजा 2017 में हुई थी। लेकिन हरियाणा की भाजपा सरकार उसे खतरनाक अपराधी नहीं मानती। हाई कोर्ट में उसने यही कहा था। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख इसी हफ्ते पैरोल पर जेल से बाहर आए पूरे 40 दिन के लिए। सजा के बाद वे 15वीं बार जेल से बाहर आए हैं।

कुल मिलाकर पैरोल और फरलो पर वह अब तक करीब एक साल जेल से बाहर रहे हैं। उसके पैरोल पर लोगों ने नुक्ताचीनी की तो मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने नादान बनने की कोशिश की और कहा कि अदालत के मामले में वे हस्तक्षेप नहीं करते। जबकि सजायाफ्ता कैदी को पैरोल या फरलो देने का अधिकार सरकार के पास होता है। अदालत के पास नहीं। आलोचक भूल रहे हैं कि गुरमीत के भक्तों की तादाद लाखों में है और उनका समर्थन भाजपा को मिलता रहा है। यहां तक कि जब 2014 में हरियाणा में भाजपा पहली बार सत्ता में आई थी तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उनके मंत्री मत्था टेकने डेरा सच्चा सौदा गए थे। ऐसे वीआइपी को पैरोल नहीं मिलेगी तो और किसे मिलेगी।