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मृणाल वल्लरी के सभी पोस्ट

पुस्तक समीक्षाः शहर और साहित्य की रागदारी

लेकिन आठ-दस कदम चलने के बाद मुड़ा और पूरी शक्ति से दौड़ते हुए अंदर जाने के लिए छलांग मारी तो भड़ाक से दरवाजा खुलने...

कब खत्म होगी सरकारी कागजों पर बेदाग होने की जंग!

गीता के यथारूप काव्यात्मक निरूपण प्रज्ञा वेणु और रुद्रावतार जैसे महाकाव्य को रचने वाले और जीवन के 70 बसंत देख चुके उद्भ्रांत आज युवाओं...

बाजार की मार में भी जगमगाते दीये

दिवाली, दशहरा मनाते और बाजार के विरोध में कविता-कहानी पढ़ कर बड़ी हुई एक पीढ़ी ने पहली बार इस तरह बाजार को बंद देखा...

पांच सवाल- ‘वैचारिक आतंक के खिलाफ प्रतिरोध की आवाज तेज है’

गौरी लंकेश की हत्या के बाद के भारत और साहित्यिक माहौल में पसरी बेचैनी पर उनसे पांच सवाल।

लेखक को अपने समय से पीछे धकेल देती है गुटबंदी

लेखक ने क्या, क्यों और कैसे लिखा जैसे छोटे सवाल उस बड़े फलक को खोलते हैं जहां वह त्रेता जैसा महाकाव्य रच जाता है...

दोस्ती को सलाम के साथ नेपाली प्रधानमंत्री देउबा ने शुरू की भारत यात्रा

भारत-नेपाल-चीन के बनाए जा रहे त्रिकोण के बीच देउबा की प्राथमिकता कैंसर की बीमारी का इलाज करा रहे अपने मित्र डीपी त्रिपाठी का...

आमने-सामनेः ‘मेरी सामाजिक पृष्ठभूमि लेखन की सबसे बड़ी ताकत है’

अपने लेखन के माध्यम से लोक-मानस की अनुकृतियों को उकेरने वाले और सक्रिय कथाकारों में से एक भगवानदास मोरवाल की समकालीन हिंदी-कथा साहित्य में...

आत्मदीप बनें: बड़ा वेतन, छोटी जिम्मेदारी शायद ही कहीं एक साथ पाई जाती है

सकारात्मक ऊर्जा से भरी इस किताब में लेखक कहते हैं कि अगर आप पहले ही किसी को खारिज कर देते हैं तो आप...

किताबः बाजार से बने समाज का कोलाज

किसी भी रचनाकार के समग्र से गुजरते हुए कुछ ऐसे तत्त्व जेहन में रेखांकित हो जाते हैं जो पाठक के लिए लेखक की पहचान...

चंद्रकांता: एक सदाबहार शाहकार

हर भाषा में कुछ न कुछ ऐसी रचनाएं होती हैं, जिनकी प्रासंगिकता बनी रहती है। जमाना बदलता रहता है किसी रंगमंच की तरह, लेकिन...

आत्महत्या की खेती: पंजाब के समाज और सत्ता पर सवाल

‘दब के बाह ते रज्ज के खा’। इस पंजाबी कहावत का मतलब है कि खेत में दबाकर जोत और जमकर खा। यह हरित क्रांति...

तल्ख हकीकत से उठता पर्दा

अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने जब कहा था कि नोटबंदी का कदम न समझदारी भरा है और न मानवीय, तब नोटबंदी से कालाधान और भ्रष्टाचार...

अमेरिका ने कमजोर की लड़ाई: सुनीता

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जकों के अगुआ अमेरिका ने पेरिस समझौते से हाथ खींच लिए हैं।

साफ हवा और पानी की तरह सर्वसुलभ हो स्कूली शिक्षा

क्या देश भर में परीक्षाओं के लिए एक बोर्ड होना चाहिए? शिक्षा के अधिकार के तहत कमजोर तबके के बच्चों को महंगे निजी...

भारतीय साहित्य का वैश्वीकरण कर रहे प्रवासी लेखक: पद्मेश गुप्त

‘भारत के साहित्य का वैश्वीकरण करने में प्रवासी साहित्यकारों की अहम भूमिका है। भारत और भारतीयों के द्वारा जो रचा जा रहा है आज...

भगवा का भागवत काल

मोहन मधुकर भागवत। अगर आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गणवेश से लेकर लैंगिक और समलैंगिक मुद्दों पर आधुनिक ताना-बाना अख्तियार कर रहा है तो उसके...

तीन साल में उलटा लटका दिया लोकतंत्र को: सुरजेवाला

नरेंद्र मोदी का विजय अभियान कांग्रेस-मुक्त भारत के नारे के साथ शुरू हुआ था।

ट्विटर को नागवार लगा संघ विचारक का ‘इस्लामिक पाकिस्तान’

भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर सोशल मीडिया के प्रबंधक भी नजर रखे हुए हैं।