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मृणाल वल्लरी के सभी पोस्ट

अभिमन्यु का अमर अध्याय

साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित अभिमन्यु अनत का सोमवार को निधन हो गया। मॉरीशस में जन्मे और पल-बढ़े अभिमन्यु ने विदेश में हिंदी की...

रंगमंच : समाधि भाई रामसिंह, एकल का समूह बन जाना

आमतौर पर पुरुषों को स्त्री के वेश में नाटक या प्रस्तुति करते देखना बहुत आम है। विभा रानी ने इस नाटक में अपने स्त्रीपन...

बारादरी: ‘फिल्म उद्योग में सरोकार की कमी नहीं’

दृश्य माध्यम जितना सशक्त तरीके से आम लोगों पर अपना प्रभाव छोड़ता है वह किसी और माध्यम से नहीं हो सकता। सिनेमा के संवाद,...

पुस्तक समीक्षाः सामंती सत्ता के रेशे उधेड़ता ‘हसीनाबाद’

वाणी प्रकाशन से प्रकाशित ‘हसीनाबाद’ महज उपन्यास नहीं शब्दचित्रों की एक पेंटिंग है। इस पूरे उपन्यास में गीताश्री की एक राजनीतिक समझ दिखती है।...

पुस्तक समीक्षाः बेजान होते इंसान में जिंदा हरकतों की खोज

रचना से पूर्व, उसके पिछवाड़े में बहुत कुछ पड़ा होता है चमकते पत्थर तो कचरा भी। हर लेखक, अपने-अपने ढंग से इससे निपटता है...

ब्रिटिश वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग: अभी तो आपकी सबसे ज्यादा जरूरत थी

ब्रिटिश वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को जो बीमारी हुई थी, उसका नाम है मोटर न्यूरॉन था।

कपड़ा बनाम पैड तक सिमटी बहस

पैड बनाम कपड़े में पर्यावरण को लेकर भी बहस शुरू हो चुकी है। उषा अग्निहोत्री कहती हैं कि आज भी पैड को लेकर मितव्ययता...

पुस्तकायनः भ्रष्टाचार पर ‘खुली किताब’

अभागे हैं वे जो रिश्वत को समाजविरोधी बताते हैं। अरे रिश्वत तो वह संपर्क सूत्र है जो खडूस से खडूस अफसर को विनम्रता की...

पुस्तक समीक्षाः जिंदा इतिहास का नया पाठ

इतिहास न तो माफी के लिए है और न बदले के लिए है। इतिहास, इतिहास के लिए है। शशि थरूर अपनी किताब ‘अंधकार काल...

मुखाग्नि फिल्मः दहेज की विडंबनाओं से उपजा सिनेमाई कोलाज

बेटा पैदा होने पर कर क्यों देना होता है..यह तो गलत बात है न मां। बेटे को पैदा तो एक बेटी ही करती है...

किताबों के मेले में गूंजी कॉपीराइट की वाणी

वाणी प्रकाशन समूह ने एनी बुक्स प्रकाशन को जॉन एलिया की शायरी की किताबें छापने के लिए कानूनी नोटिस भेजा है।

विश्व पुस्तक मेलाः समाज के साथ संवाद कर रहा किताबों का मेला

वरिष्ठ कवयित्री अनामिका कहती हैं, ‘पुस्तक मेले में सबसे अच्छा मुझे यह देख कर लगा कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के छोटे कस्बों...

ठिठुरती दिल्ली को मिली किताबों की धूप

लुढ़के पारे के बाद भी शनिवार दोपहर तक दिल्लीवाले प्रगति मैदान को बता चुके थे कि वह बहुत बड़ा नहीं है। कड़ाके की ठंड...

पुस्तक समीक्षाः शहर और साहित्य की रागदारी

लेकिन आठ-दस कदम चलने के बाद मुड़ा और पूरी शक्ति से दौड़ते हुए अंदर जाने के लिए छलांग मारी तो भड़ाक से दरवाजा खुलने...

कब खत्म होगी सरकारी कागजों पर बेदाग होने की जंग!

गीता के यथारूप काव्यात्मक निरूपण प्रज्ञा वेणु और रुद्रावतार जैसे महाकाव्य को रचने वाले और जीवन के 70 बसंत देख चुके उद्भ्रांत आज युवाओं...

बाजार की मार में भी जगमगाते दीये

दिवाली, दशहरा मनाते और बाजार के विरोध में कविता-कहानी पढ़ कर बड़ी हुई एक पीढ़ी ने पहली बार इस तरह बाजार को बंद देखा...

पांच सवाल- ‘वैचारिक आतंक के खिलाफ प्रतिरोध की आवाज तेज है’

गौरी लंकेश की हत्या के बाद के भारत और साहित्यिक माहौल में पसरी बेचैनी पर उनसे पांच सवाल।

लेखक को अपने समय से पीछे धकेल देती है गुटबंदी

लेखक ने क्या, क्यों और कैसे लिखा जैसे छोटे सवाल उस बड़े फलक को खोलते हैं जहां वह त्रेता जैसा महाकाव्य रच जाता है...