Border Vs Border 2: 90 के दशक में जहां फिल्म इंडस्ट्री में रोमांटिक मूवीज बनाने का ज्यादा चलन था, वहीं 1997 में निर्देशक जेपी दत्ता वॉर मूवी ‘बॉर्डर’ लेकर आए। 13 जून, 1997 को रिलीज हुई इस फिल्म में सनी देओल, सुनील शेट्टी, अक्षय खन्ना, पूजा भट्ट, जैकी श्रॉफ, पुनीत इस्सर और तब्बू समेत कई सितारे नजर आए। फिल्म की कहानी से लेकर इसके गाने, सितारों के अभिनय तक को लोगों ने काफी पसंद किया था। अब लगभग 28 साल बाद मेकर्स ने इसका दूसरा पार्ट ‘बॉर्डर 2’ रिलीज कर दिया है।

इसमें सनी देओल तो हैं, लेकिन बाकि की कास्ट बदल गई है। सिर्फ इतना ही नहीं, ‘बॉर्डर 2’ में पहले पार्ट के गानों का भी इस्तेमाल किया गया है, लेकिन उसे नया रूप दिया गया। वहीं, इस बात निर्देशन की कमान जेपी दत्ता की जगह अनुराग सिंह ने संभाली। ऐसे में चलिए आपको बताते हैं कि यह अपने पहले पार्ट से कितनी अलग है।

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बदल गई है ‘बॉर्डर 2’ की कहानी

सबसे पहले ‘बॉर्डर और बॉर्डर 2’ दोनों फिल्मों की कहानी को लेकर बात करते हैं। इस बार यह समझना होगा कि ‘बॉर्डर 2’ पहले पार्ट का रीमेक या सीक्वल नहीं है। दोनों फिल्मों में भले ही 1971 के युद्ध की कहानी बताई गई है, लेकिन ये दोनों ही युद्ध अलग थे। 1997 में आई ‘बॉर्डर’ राजस्थान के लोंगेवाला में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध पर आधारित थी।

वहां लगभग 55 साल पहले पाकिस्तान ने आधी रात को दबे पांव अपने 2-3 हजार सैनिकों के साथ लोंगेवाला में मौजूद इंडियन आर्मी पर हमला कर दिया था। उस समय हमारी सीमा पर सिर्फ 120 भारतीय सैनिक मौजूद थे। वहीं, उस युद्ध में  पंजाब रेजिमेंट के 23वीं बटालियन के मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी लोंगेवाला में उनका नेतृत्व कर रहे थे, जिनका किरदार सनी देओल ने निभाया था।

उस युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेना ने वायु सेना से मदद मांगी थी, लेकिन उस समय इस्तेमाल होने वाले ‘हॉकर हंटर’ विमान रात में उड़ान नहीं भर सकते थे, इसलिए वायु सेना ने सुबह होने तक का इंतजार किया। फिर जैसे ही सूरज की पहली किरण निकली, दोनों आर्मी ने मिलकर पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ दिया। इस लड़ाई में हमारे कई जवान शहीद हो गए थे।

दूसरी तरफ ‘बॉर्डर 2’ बॉर्डर की विरासत को आगे बढ़ाते हुए कहानी का स्केल बड़ा करती है। यह फिल्म दिखाती है कि वह जंग सिर्फ लोंगेवाला तक सीमित नहीं थी, बल्कि जमीन, हवा और समुद्र तीनों मोर्चों पर भी लड़ी गई थी। इसके दूसरे पार्ट में ऑपरेशन ‘चंगेज खान’ के बारे में दिखाया गया है। इस बार की कहानी में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स तीनों के शौर्य को बराबर दिखाया गया है।

फिल्म की कास्ट और अभिनय

इस बार सिर्फ कहानी नहीं बदली, बल्कि कहानी के साथ-साथ फिल्म की कास्ट भी बदल गई है। ‘बॉर्डर’ में जहां सनी देओल, सुनील शेट्टी, पूजा भट्ट, अक्षय खन्ना, जैकी श्रॉफ, पुनीत इस्सर और तब्बू नजर आए थे। वहीं, ‘बॉर्डर 2’ में एकलौते सनी देओल रहे, जो पुरानी कास्ट से नजर आए। हालांकि, इस बार वह मेजर कुलदीप सिंह नहीं, बल्कि लेफ्टिनेंट कर्नल फतेह सिंह कलेर के किरदार में नजर आए।

उनके साथ वरुण धवन, अहान शेट्टी, दिलजीत दोसांझ और सोनम बाजवा समेत कई सितारे नजर आए। वरुण ने होशियार सिंह का किरदार निभाया, जो उस युद्ध में थल सेना का नेतृत्व कर रहे थे। वहीं, दिलजीत एयरफोर्स के निर्मल जित सिंह सेखों के रोल में नजर आए और अहान ने नेवी के एम एस रावत का किरदार निभाया।

‘बॉर्डर’ में हर सितारे ने बखूबी अपना किरदार निभाया था। जब इमोशनल सीन आते हैं, तो वह इमोशनल हो गए। जब वॉर सीन आए, तो उनमें देशभक्ति देखने को मिली। हालांकि, इस बार कई जगह स्टार्स का अभिनय भी उतना खास नहीं रहा। वरुण अपने अभिनय को लेकर ट्रोल हो रहे थे, लेकिन फिल्म देखने के बाद उनके अभिनय को सराहा गया। वहीं, अहान काफी चर्चा में थे और फिल्म देखने के बाद उनके अभिनय को लेकर काफी निराशा हो सकती है।

दिलजीत दोसांझ ने अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग और नैचुरल परफॉर्मेंस से जहां लोगों का दिल जीता, वहीं सनी देओल का अभिनय अच्छा था, लेकिन अगर उनके किरदार की ‘बॉर्डर’ वाले कुलदीप से तुलना की जाए। तो वह ‘बॉर्डर 2’ में थोड़े फीके पड़ सकते हैं।

वीएफएक्स में खा गई मात

‘बॉर्डर 2’ की कहानी भले ही काफी लोगों को पसंद आई हो, लेकिन इसमें भारतीय सेना को कम पावरफुल दिखाया गया है और पाकिस्तान को काफी बढ़ा के दिखाया गया। इसके अलावा अगर बात की जाए फिल्म के एक्शन सीन्स की तो वह ‘बॉर्डर’ में काफी अच्छे थे और ‘बॉर्डर 2’ में बहुत सी जगह उतने अच्छे से मेकर्स शायद लोगों को नहीं दिखा पाए।

1997 में वीएफएक्स और सीजीआई नहीं थे, लेकिन तब भी जेपी दत्ता ने हर चीज को रियल दिखाने के लिए कड़ी मेहनत की। उन्होंने बीकानेर जैसी जगहों पर फिल्म की शूटिंग की। आर्मी के साथ मिलकर-बात करके वैसे ही बंकर बनाए गए। रियल आग और गन का इस्तेमाल हुआ। अब इतनी तकनीक होने के बाद भी ‘बॉर्डर 2’ के अपने वीएफएक्स को लेकर कई जगह मात खा गई। जब नेवी पर हमला होता है, तो वहां जिस तरह के वीएफएक्स का इस्तेमाल किया गया है वह बेहद ही खराब है। इसके अलावा भी कई जगह ये निराश करते हैं।

पुराने गानों को दिया नया रूप

फिल्म की कहानी, सितारों के अलावा अगर किसी फिल्म के चलने के चांस होते हैं, तो वह उसके गानों पर भी निर्भर करता है। इस बार ‘बॉर्डर 2’ में ‘बॉर्डर’ के ही दो फेमस गानों ‘संदेशे आते हैं’ और ‘जाते हुए लम्हों’ को नया रूप देकर इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा फिल्म ‘बॉर्डर 2’ का अलग कोई गाना चला है, तो वो सिर्फ ‘मिट्टी के बेटे’ हैं जो लोगों को इमोशनली काफी कनेक्ट करता है।

निर्देशन में कौन रहा बेहतर

अब बात आती है निर्देशन की, तो जेपी दत्ता ने ‘बॉर्डर’ में लंबे शॉट्स और रॉ-इमोशंस को बखूबी दिखाया। वहीं, ‘बॉर्डर 2’ में अनुराग सिंह ने इसे आज की पीढ़ी के हिसाब से फास्ट-पेस्ड बनाया। उन्होंने कई जगहों पर पुराने पैंतरे को जोड़ते हुए नए स्टाइल को भी जोड़ा।

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