NYC Mayor Zohran Mamdani Letter To Umar Khalid: न्यूयॉर्क शहर के नव नियुक्त मेयर जोहरान ममदानी ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र और कार्यकर्ता उमर खालिद को एक पत्र लिखा है। बिना तारीख वाले इस नोट को गुरुवार को खालिद की साथी बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया।

हाथ से लिखे गए इस पत्र में जोहरान ममदानी ने कहा, “डियर उमर, मैं अक्सर कड़वाहट के बारे में आपके शब्दों और इसे स्वयं पर हावी न होने देने के महत्व के बारे में सोचता हूं। आपके माता-पिता से मिलकर बहुत खुशी हुई। हम सभी आपके बारे में सोच रहे हैं।” खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने टॉइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि परिवार पिछले साल दिसंबर की शुरुआत में खालिद की बहन से मिलने के लिए अमेरिका की यात्रा के दौरान ममदानी से मिला था।

ममदानी के साथ आधे घंटे चली मुलाकात- इलियास

इलियास ने बताया कि उन्होंने ममदानी को उनकी नियुक्ति पर बधाई देने के लिए उनसे समय मांगा था और आखिर में उनकी मुलाकात ममदानी और उनकी पत्नी के साथ लगभग आधे घंटे तक चली। उन्होंने कहा, “उन्होंने हमें विशेष समय दिया और हमने उमर की कैद समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। हमें उम्मीद है कि वे न्यूयॉर्क के लोगों से किए गए अपने वादों को पूरा करेंगे।”

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इलियास ने आगे कहा, “हमने मेरे बेटे के साथ जो कुछ हो रहा है और उसके मामले में हो रहे घटनाक्रमों के बारे में भी बात की। ममदानी ने कहा कि वह मामले पर नजर रख रहे हैं और उन्होंने जेल से उमर के पत्र पढ़े हैं।” इल्यास ने बताया कि उनकी मुलाकात अमेरिकी कांग्रेस के डेमोक्रेट सांसद जेमी रास्किन से अलग से भी हुई। उन्होंने कहा, “उन्होंने उमर की गिरफ्तारी पर चिंता जताई और समर्थन व्यक्त किया। मैंने उन्हें बताया कि मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है और परिवार को अनुकूल फैसले की उम्मीद है।”

अमेरिकी कांग्रेस सदस्यों ने विनय मोहन क्वात्रा को लिखा पत्र

रस्किन ने तीन अन्य अमेरिकी कांग्रेस सदस्यों के साथ मिलकर 30 दिसंबर को भारत के अमेरिकी राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को पत्र लिखकर खालिद की हिरासत पर चिंता जाहिर की थी। सांसदों ने कहा कि खालिद को यूएपीए के तहत पांच साल से जमानत नहीं दी गई है और उनका तर्क है कि “उनके साथ किया जा रहा विचाराधीन व्यवहार अपने आप में दंडात्मक है।”

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। खालिद पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत दिल्ली दंगों को भड़काने की साजिश रचने का आरोप है। पिछले पांच सालों में उनकी जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज होती रही हैं। दिसंबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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