India Chabahar Port Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच टकराव को लेकर वैश्विक तनाव बढ़ गया है। दूसरी ओर अमेरिका द्वारा लगाए गए तमाम प्रतिबंधों और बढ़े टैरिफ के चलते ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों की परेशानियां भी बढ़ गई हैं। इसका असर भारत पर भी पड़ने की संभावना है। भारत के लिए ईरान का चाबहार बंदरगाह काफी अहम रहा है। ऐसे में भारत अमेरिका के साथ ईरान के साथ संबंधों को लेकर संतुलन बनाने की कोशिश कर रह है।

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इसके चलते सिस्तान-बलूचिस्तान में ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत की भूमिका को लेकर असमंजस की स्थिति थी लेकिन अब स्थिति साफ होने लगी है क्योंकि अमेरिका ने भारत को कुछ महीनों की छूट दे दी है।

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विदेश मंत्रालय ने US से बातचीत में क्या क्या कहा?

चाबहार पोर्ट को लेकर अमेरिका ने अपनी पिछली छूट को रद्द कर दिया था, लेकिन उसने भारत को 26 अप्रैल, 2026 तक वैध छह महीने की छूट प्रदान की। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की कि भारत शर्तों को स्पष्ट करने और सुरक्षित तरीके से अपनी भागीदारी जारी रखने के लिए अमेरिका के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है।

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विदेश मंत्रालय ने बताई रणनीतिक अहमियत

दरअसल, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत परियोजना में प्रत्यक्ष जोखिम को कम करने के लिए अपने द्वारा प्रतिबद्ध 120 मिलियन डॉलर की राशि को स्थानांतरित करने सहित कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। बता दें कि भारत इस परियोजना के प्रति प्रतिबद्ध है क्योंकि इसका रणनीतिक महत्व है और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) में इसकी संभावित भूमिका है, जो भारत, ईरान, अफगानिस्तान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला 7,200 किलोमीटर लंबा परिवहन नेटवर्क है।

इसके अलावा ईरान से भारत के व्यापारिक रिश्तों पर पड़ने वाले असर को लेकर सामने आया कि दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1.6 अरब डॉलर रहा, जिसमें 1.2 अरब डॉलर का निर्यात और 0.4 अरब डॉलर का आयात शामिल था। तनाव के बावजूद, सरकारी सूत्रों का कहना है कि नए शुल्क का भारत के व्यापार पर नगण्य प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

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