नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण कंट्रोल सिस्टम होता है। यह दिमाग, रीढ़ की हड्डी और नसों का एक जटिल नेटवर्क है, जो शरीर के हर छोटे-बड़े काम को नियंत्रित करता है। हम सोचते हैं, चलते हैं, महसूस करते हैं, सांस लेते हैं या दर्द महसूस करते हैं इन सभी प्रक्रियाओं के पीछे नर्वस सिस्टम ही काम करता है।
नर्वस सिस्टम शरीर में एक मैसेज कैरियर की तरह काम करता है। जब हम किसी चीज़ को देखते, सुनते या छूते हैं, तो नसें उस जानकारी को दिमाग तक पहुंचाती हैं। दिमाग उस जानकारी को समझ कर तुरंत आदेश देता है, और नसें उस आदेश को शरीर के संबंधित हिस्सों तक पहुंचाती हैं। इसी वजह से हमारा शरीर तुरंत प्रतिक्रिया दे पाता है। बॉडी के लिए जरूरी इस सिस्टम का दुरुस्त होना बेहद जरूरी है।
खराब डाइट और बिगड़ते लाइफस्टाइल का असर आपके नर्वस सिस्टम को भी बिगाड़ सकता है। अगर नर्वस सिस्टम कमजोर या असंतुलित हो जाए तो थकान, चक्कर, याददाश्त कमजोर होना, घबराहट, तनाव, नींद की समस्या, हाथ-पैरों में झनझनाहट और फोकस की कमी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। नर्वस सिस्टम कमजोर होने का असर पाचन पर भी पड़ता है।
भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र के मुताबिक नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाना है तो योनि मुद्रा करें। इस योग मुद्रा को करने से मन को शांति मिलती है, तनाव कंट्रोल होता है और फोकस करने की क्षमता बढ़ती है। आइए जानते हैं कि योनि मुद्रा कैसे हमारी बॉडी को सपोर्ट करती है और नर्वस सिस्टम में सुधार करती है।
योनि मुद्रा कैसे हमारी बॉडी को सपोर्ट करती है और नर्वस सिस्टम में सुधार करती है?
भारतीय दर्शन में माना जाता है कि पूरे ब्रह्मांड की शुरुआत एक दिव्य गर्भ से हुई, जिसे हिरण्यगर्भ या ब्रह्मा योनि कहा जाता है। यहां योनि का मतलब गर्भ होता है। इसी सोच से प्रेरित एक योग अभ्यास है योनि मुद्रा। यह मुद्रा करने पर व्यक्ति को वैसी ही शांति और सुरक्षा का एहसास होता है, जैसा गर्भ में होता है। इसलिए योनि मुद्रा को मन को शांत करने और भीतर से सुकून देने वाला योग अभ्यास माना जाता है। योगा एक्सपर्ट के मुताबिक योनि मुद्रा एक प्रभावी साइको-फिजिकल तकनीक है, जो इंद्रियों को बाहरी दुनिया से हटाकर भीतर की ओर केंद्रित करती है। इससे दिमाग में चलने वाली बेवजह की हलचल शांत होती है और मन को स्पष्टता मिलती है।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र (Hansa Yogendra) के मुताबिक योनि मुद्रा नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करने का बेहतरीन योग अभ्यास है। ये योग इंद्रियों पर पड़ने वाले लगातार दबाव को कम करता है, जिससे दिमाग को आवश्यक विराम मिलता है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।
योनि मुद्रा करने का आसान तरीका
- सबसे पहले आराम से सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं। अगर ज़मीन पर बैठना मुश्किल हो तो सीधी कुर्सी पर भी बैठ सकते हैं।
- अपनी पीठ सीधी रखें और आंखें बंद कर लें।
- अब दोनों अंगूठों से कान हल्के से बंद करें।
- तर्जनी उंगलियों को आंखों की पलकों पर रखें, बस हल्का सा स्पर्श हो।
- मध्य उंगली को नाक के दोनों छिद्रों के पास रखें।
- अनामिका को ऊपरी होंठ के ऊपर और छोटी उंगली को निचले होंठ के नीचे रखें।
- ध्यान रखें कि आपकी कोहनियां कंधों के बराबर और ज़मीन के समानांतर रहें।
- अब बस सामान्य तरीके से सांस लें और छोड़ें और अपना ध्यान केवल सांस पर रखें।
कितनी देर करें?
रोजाना 5 से 10 मिनट तक योनि मुद्रा का अभ्यास करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
नर्वस सिस्टम पर कैसे असर डालती है योनि मुद्रा?
ये योगाभ्यास इंद्रियों की ओवर-स्टिमुलेशन कम करता है और दिमाग को शांत करता है। इस योगाभ्यास को करने से तनाव कंट्रोल होता है और बेचैनी दूर होती है। इसे रोज करने से फोकस और एकाग्रता बढ़ती है। ये योगाभ्यास नर्वस सिस्टम को मजबूती देता है। योगाचार्य बताते हैं कि यह मुद्रा भगवद गीता के अध्याय 2, श्लोक 58 में बताए गए कछुए के उदाहरण जैसी है जहां इंद्रियों को भीतर समेटकर ऊर्जा और मन दोनों को संतुलित किया जाता है।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
डिप्रेशन या अत्यधिक बेचैनी से जूझ रहे लोग शुरुआत में श्वासों की गिनती करते हुए इस मुद्रा का अभ्यास करें।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
