नहाने से पहले पेशाब करना एक सामान्य आदत मानी जाती है और ज़्यादातर लोग नहाने से पहले यूरिन डिस्चार्ज करते भी हैं। लेकिन कुछ लोगों को एक अलग समस्या होती है वे नहाने से पहले यूरिन डिस्चार्ज कर लेते हैं, फिर भी जैसे ही शरीर पर पानी पड़ता है, उन्हें दोबारा पेशाब की इच्छा होने लगती है। कई बार तो पानी गिरते ही यूरिन लीक होने लगता है। अक्सर लोग इसे कोई बीमारी नहीं मानते और न ही इस पर खुलकर बात करते हैं, जबकि यह आदत भविष्य में कई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकती है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह कोई बीमारी नहीं बल्कि एक कंडीशन्ड रिस्पॉन्स (Conditioned Response) है। रिसर्च बताती है कि बहते पानी की आवाज हमारे दिमाग में एक सिग्नल भेजती है। इसे ‘पावलोवियन इफेक्ट कहते हैं जैसे ही आप पानी गिरने की आवाज सुनते हैं, आपका दिमाग मूत्राशय (Bladder) को सिकुड़ने का संकेत दे देता है।
कुछ फिजिकल थेरेपिस्ट और रिसर्च ये चेतावनी देते हैं कि महिलाओं के लिए यह आदत भविष्य में नुकसानदेह हो सकती है। जब आप खड़े होकर पेशाब करते हैं, तो पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां पूरी तरह से रिलैक्स नहीं हो पातीं। रिसर्च के अनुसार, बार-बार ऐसा करने से ब्लैडर को ‘खराब ट्रेनिंग’ मिल जाती है। भविष्य में जब भी आप हाथ धोएंगे या स्विमिंग पूल के पास होंगे, तो आपका ब्लैडर अपने आप लीक (Incontinence) होने लगेगा।
नहाते समय पेशाब करने की आदत क्यों बन जाती है?
बहते पानी की आवाज़ और ठंडे पानी का स्पर्श दिमाग और ब्लैडर के बीच एक कंडीशन रिफ्लेक्स बना सकता है। इसका मतलब यह है कि दिमाग पानी की आवाज़ को पेशाब करने के संकेत के रूप में लेने लगता है। यही कारण है कि कई लोगों को नल, शॉवर या पानी की आवाज़ सुनते ही यूरिन आने लगता है।
ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने का खतरा
क्लाउडनाइन अस्पताल में वरिष्ठ सलाहकार एवं एसोसिएट निदेशक (प्रसूति एवं स्त्री रोग) डॉ. शैली शर्मा के अनुसार नहाते समय पेशाब करने से पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को पूरा रिलैक्सेशन नहीं मिल पाता। इससे ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हो पाता, जिसे इनकंप्लीट ब्लैडर एम्प्टींग कहा जाता है। इस स्थिति को अगर कंट्रोल नहीं किया जाए तो आगे चलकर बार-बार यूरिन इंफेक्शन, ब्लैडर स्टोन, किडनी से जुड़ी दिक्कतें, पेल्विक फ्लोर मसल्स कमजोर हो सकती हैं। समय रहते इलाज नहीं हो तो बार-बार पेशाब लगने की समस्याएं हो सकती हैं।
बोन एंड बर्थ क्लिनिक के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. गाना श्रीनिवास बताते हैं कि नियमित रूप से शॉवर के दौरान पेशाब करना ब्लैडर हेल्थ के लिए तुरंत खतरनाक नहीं है, लेकिन यह एक गलत व्यवहारिक आदत को जन्म देता है। खासतौर पर महिलाओं के लिए यह आदत ज्यादा नुकसानदेह मानी जाती है। महिलाओं को चाहिए कि पेशाब हमेशा बैठकर और सही पॉश्चर में करें। नहाते समय पुरुषों में खड़े होकर पेशाब करने से पेल्विक फ्लोर मसल्स पर गलत दबाव पड़ता है। मसल्स धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। पुरुषों में प्रोस्टेट ग्लैंड सपोर्ट देता है, इसलिए उन्हें महिलाओं की अपेक्षा कम जोखिम होता है।
हाइजीन से जुड़ी हो सकती हैं समस्याएं
डॉ. श्रीनिवास के अनुसार नहाने की जगह पर पेशाब करने से स्वच्छता से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं। यूरिन में मौजूद बैक्टीरिया, अमोनिया, शॉवर एरिया में जमा होकर इंफेक्शन का खतरा बढ़ा सकते हैं। बाथरूम में दुर्गंध फैला सकती हैं और हानिकारक सूक्ष्मजीव तेजी से पनप सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को पहले से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) है, तो यह आदत स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
किन लोगों को नहाते समय पेशाब नहीं करना चाहिए?
- जिन्हें बार-बार यूरिन इंफेक्शन होता है
- जिन्हें यूरिन लीकेज या ब्लैडर कंट्रोल की समस्या है
- पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन से पीड़ित लोग
- प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के बाद की महिलाएं नहाते समय पेशाब को कंट्रोल करें।
सही आदत क्या होनी चाहिए?
नहाने से पहले टॉयलेट जाकर आराम से पेशाब करें
ब्लैडर को पूरी तरह खाली होने का समय दें
पानी की आवाज़ से खुद को कंडीशन न होने दें
पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज जैसे कीगल एक्सरसाइज करें।
निष्कर्ष
नहाते समय पेशाब करना भले ही आम आदत लगती हो, लेकिन लंबे समय में यह ब्लैडर कंट्रोल, पेल्विक फ्लोर हेल्थ और हाइजीन से जुड़ी समस्याओं की वजह बन सकती है। अगर आपको यूरिन से जुड़ी कोई परेशानी रहती है, तो इस आदत को समय रहते बदलना बेहतर है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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