आज की खराब जीवनशैली और खानपान के कारण लोगों का शरीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है। तनाव और वर्कप्रेशर के कारण हाई बीपी की समस्या बढ़ रही है। भारत में ही नहीं बल्कि आज विदेशों में भी डायबिटीज और हाई बीपी की बीमारी से करोड़ों लोग जूझ रहे हैं। हालांकि, आयुर्वेदिक नुस्खों और जड़ी-बूटियों के जरिए आप इन बीमारियों से खुद का बचाव कर सकते हैं।
आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में कुछ ऐसे पौधों का जिक्र किया गया है। जिनकी पत्तियों का खाली पेट सेवन करने से आप डायबिटीज यानी मधुमेह और हाई बीपी की समस्या से निजात पा सकते हैं। तो आइये बताते हैं कि इन पौधों का आप किस तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं।
तुलसी: हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा काफी मायने रखता है। इसके औषधीय गुण कई तरह की बीमारियों को ठीक करने में कारगर हैं। यूं तो हिंदू धर्म में तुलसी की पूजा की जाती है, लेकिन इसका अगर आयुर्वेदिक तरीकों से इस्तेमाल करें तो उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है।
बता दें, तुलसी में मरकरी और आयरन की अधिक मात्रा होती है। जब हम इन्हें चबाते हैं, तो यह दोनों तत्व रिलीज होते हैं, जो हमारे दांतों के लिए काफी नुकसानदेह हैं। तुलसी के पत्तों का सेवन करने के लिए पहले उन्हें पीसकर उसमें पानी मिला लें। फिर इसका सेवन करें।
करी पत्ता: करी पत्ते का इस्तेमाल खाने का जायका बढ़ाने के लिए किया जाता है। आमतौर पर सभी घरों में पाया जाने वाला करी पत्ते को मीठी नीम के नाम से भी जाना जाता है। मधुमेह के मरीजों के लिए करी पत्ता काफी लाभदायक साबित होता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर में इंसुलिन की मात्रा को बढ़ाते हैं। ऐसे में आपको रोजाना करी पत्तों का सेवन करना चाहिए।
नीम: नीम समग्र स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है। नीम की दातुन का इस्तेमाल दांतों से संबंधित सभी तरह की समस्या को दूर करने के लिए किया जाता है। वहीं, इसके पत्ते कील-मुहांसे आदि को ठीक करने में कारगर हैं। नीम की पत्तियां डायबिटीज जैसी बीमारी को भी नियंत्रित करने में कारगर हैं। इसके अलावा यह ब्लड शुगर लेवल को भी कंट्रोल रखती है।
इसके अलावा नीम के पत्तों में एंटीहिस्टामाइन तत्व होता है, जो रक्त वाहिकाओं को पतला कर सकता है। यह हाई बीपी की समस्या को ठीक करने में कारगर हैं।

