उम्र बढ़ने का असर शरीर के हर अंग पर पड़ता है, लेकिन कुछ अंग ऐसे होते हैं जिन पर बढ़ती उम्र का प्रभाव सबसे पहले दिखाई देने लगता है। 40 साल की उम्र के बाद कई लोगों को पैरों में दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव (मसल पेन) की शिकायत होने लगती है। यह समस्या खासतौर पर सर्दियों के मौसम में ज्यादा बढ़ जाती है। ठंड के कारण पैरों की मांसपेशियों में अकड़न आने लगती है, जिससे चलना-फिरना, उठना-बैठना तक दर्दनाक हो जाता है। कई बार हल्की सी हरकत पर भी पैरों में खिंचाव या ऐंठन महसूस होती है, जिससे पीड़ित व्यक्ति दिनभर असहज महसूस करता है। उम्र बढ़ने के साथ मसल्स की ताकत कम होना, ब्लड सर्कुलेशन का धीमा पड़ना और कैल्शियम की कमी इस परेशानी की बड़ी वजह मानी जाती है।
मेडिकल साइंस के मुताबिक 40 साल की उम्र के बाद शरीर में Sarcopenia (सार्कोपेनिया) नामक प्रक्रिया शुरू होती है, जिसमें मांसपेशियों का द्रव्यमान (Muscle Mass) धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसके अलावा, विटामिन D3, कैल्शियम और B12 की कमी पैरों की नसों और हड्डियों को कमजोर कर देती है। अक्सर देखा जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों को कुर्सी से उठते समय घुटनों पर हाथ रखना पड़ता है। रात में पिंडलियों में अचानक ऐंठन, थोड़ी दूर चलने पर पैरों में जान खत्म होना, सीढ़ियां चढ़ते समय घुटनों में दर्द या कटकट की आवाज़ आना इन सभी समस्याओं को लोग बुढ़ापे की मजबूरी मान लेते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट्स और आयुर्वेद मानते हैं कि सही खानपान और देखभाल से किसी भी उम्र में शरीर को मजबूत रखा जा सकता है। आयुर्वेद के मुताबिक अगर शरीर को सही ईंधन मिले तो वह खुद को रिपेयर करने की क्षमता रखता है। कुछ देसी फूड्स ऐसे हैं जिनका सेवन करके उम्र बढ़ने पर मसल्स लॉस की इस प्रक्रिया का उपचार किया जा सकता है। कुछ फूड्स की मदद से आसानी से हड्डियों के दर्द को रोका जा सकता है। आइए जानते हैं कि कौन-कौन से ऐसे फूड्स हैं जो सर्दी में मसल्स पेन से राहत देने में मददगार साबित होते हैं।
सुबह की शुरुआत इस देसी ड्रिंक से करें
सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में ¼ चम्मच हल्दी, एक चुटकी काली मिर्च, 2 कुटी हुई लहसुन की कलियां डालकर पका लें और इस पानी को गुनगुना करके पी लें। ये पानी पैरों में होने वाली सूजन को कंट्रोल करेगा, ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करेगा। इस ड्रिंक को पीने से हार्ट और पैरों को फायदा मिलता है।
चना और गुड़ का करें सेवन
चना प्रोटीन से भरपूर होता है जो मांसपेशियों की मरम्मत करता है, जबकि गुड़ आयरन देकर ब्लड सर्कुलेशन सुधारता है। 40 की उम्र के बाद मांसपेशियों का द्रव्यमान कम होने लगता है ऐसे में आप चने और गुड़ का सेवन करें तो आपकी हड्डियों को ताकत मिलेगी। चने में उच्च गुणवत्ता वाला प्लांट प्रोटीन होता है जो मांसपेशियों के ऊतकों की मरम्मत करता है, जबकि गुड़ में मौजूद कार्बोहाइड्रेट उस प्रोटीन को मांसपेशियों तक पहुंचाने के लिए इंसुलिन स्पाइक प्रदान करता है। इससे पैरों की मसल्स ढीली नहीं पड़तीं और उसमें कसावट बनी रहती है। Journal of Bone and Mineral Research के सिद्धांतों के अनुसार, हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम के साथ मैग्नीशियम और फास्फोरस का संतुलन जरूरी है। यह मिश्रण हड्डियों को खोखला होने से बचाता है, जिससे पैरों का ढांचा मजबूत रहता है।
मखाना खाएं
मखाना कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होता है। यह जोड़ों की सूजन कम करता है और घुटनों के लुब्रिकेशन को बेहतर बनाता है। Journal of Agriculture and Food Chemistry में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, मखाने में ‘कैंप फेरोल’ (Kaempferol) नामक एक प्राकृतिक फ्लेवोनोइड पाया जाता है। ये तत्व शरीर में सूजन पैदा करने वाले मार्क्स जैसे इंटरल्यूकिन को रोकता है। यह जोड़ों की पुरानी सूजन और गठिया (Arthritis) के दर्द को कम करने में उतना ही प्रभावी हो सकता है जितना कि पेनकिलर
रागी का करें सेवन
रागी को कैल्शियम का राजा कहा जाता है। इसमें गेहूं से कई गुना ज्यादा कैल्शियम होता है, जो बोन डेंसिटी बढ़ाने में मदद करता है। वैज्ञानिक शोध और National Institute of Nutrition के आंकड़ों के अनुसार 100 ग्राम गेहूं में केवल 41-48 मिलीग्राम कैल्शियम होता है, जबकि 100 ग्राम रागी में लगभग 344-350 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है। Journal of Food Science and Technology में प्रकाशित शोध के अनुसार रागी में मौजूद कैल्शियम का स्वरूप ऐसा होता है जिसे शरीर आसानी से सोख लेता है। 40 की उम्र के बाद महिलाओं और पुरुषों में होने वाली हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis) को रोकने के लिए रागी का सेवन रामबाण है। यह हड्डियों के घनत्व (Density) को बढ़ाता है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा कम हो जाता है।
सहजन की पत्तियों का करें सेवन
सहजन की फलियां और पत्तियां प्राकृतिक पेन किलर की तरह काम करती हैं। यह जोड़ों के दर्द और सूजन में बेहद फायदेमंद है। Journal of Inflammation में प्रकाशित एक शोध के अनुसार सहजन की पत्तियों में Isothiocyanates और Quercetin जैसे शक्तिशाली तत्व होते हैं। ये तत्व शरीर में सूजन पैदा करने वाले एंजाइम जैसे COX-2 को दबाते हैं। यह ठीक उसी तरह काम करता है जैसे एलोपैथिक सूजनरोधी दवाएं (NSAIDs) करती हैं, लेकिन इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं होते।
भीगे हुए अखरोट और बादाम
अखरोट का ओमेगा-3 नसों को मजबूत करता है और बादाम का विटामिन-E मांसपेशियों को सपोर्ट देता है।
देसी गाय का घी
सीमित मात्रा में देसी घी जोड़ों के लिए लुब्रिकेंट का काम करता है और वात दोष को शांत करता है।
हल्दी-काली मिर्च-दालचीनी वाला दूध
रात में पिंडलियों की ऐंठन और दर्द से राहत के लिए यह दूध बेहद असरदार माना जाता है।
खजूर खाएं
खजूर पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर होता है, जो मांसपेशियों की ऐंठन और कमजोरी को दूर करता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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