किचन में मौजूद अनाजों में गेहूं एक ऐसा अनाज है जिसे हम आटे के रूप में रोटी बनाकर और सूजी के रूप में खाते हैं। नाश्ते में सूजी से बना उपमा, हलवा या इडली जैसे हल्के व्यंजन खाए जाते हैं, जबकि गेहूं का सेवन दिन भर के भोजन में मुख्य रूप से रोटी के रूप में होता है। दोनों तरीके से इस अनाज का सेवन शरीर को ऊर्जा देता है, भूख शांत करता है और रोज़मर्रा की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता हैं।
हालांकि गेहूं का सूजी और रोटी के रूप में ज्यादा सेवन सेहत पर भारी पड़ सकता है। अधिक मात्रा में गेहूं या सूजी खाने से शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा होने लगती है, जिससे वजन बढ़ने और ब्लड शुगर लेवल असंतुलित होने का खतरा बढ़ सकता है। खासतौर पर डायबिटीज या मोटापे की समस्या से जूझ रहे लोगों को इस अनाजों का सेवन संतुलित मात्रा में, सही समय और हेल्दी तरीके से करना चाहिए ताकि सेहत को फायदा मिले और नुकसान से बचा जा सके।
गेहूं एक ऐसा अनाज है जिसे हम रोटी, ब्रेड, पास्ता, दलिया और कई दूसरे फूड्स में खाते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि गेहूं का सेवन आटे के रूप में ज्यादा फायदेमंद है या सूजी के रूप में? खासकर जब बात वजन घटाने, डायबिटीज कंट्रोल और पाचन की आती है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
सूजी क्या होती है?
सूजी, जिसे रवा या सेमोलिना भी कहा जाता है, गेहूं का थोड़ा मोटा पिसा हुआ रूप है। यह आमतौर पर ड्यूरम गेहूं से बनाई जाती है और इसकी बनावट खुरदरी होती है। भारत में सूजी का इस्तेमाल उपमा, रवा इडली, हलवा और कई तरह के स्नैक्स बनाने में किया जाता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इससे पास्ता भी तैयार होता है।
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन में सीनियर कंसल्टेंट डॉ गुप्ता के मुताबिक 100 ग्राम सूजी में लगभग 350-360 कैलोरी होती है, 72 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 12 ग्राम प्रोटीन और 1 ग्राम वसा होती है। इसमें फाइबर लगभग 3 ग्राम होता है जो काफी कम है। इसमें कुछ आवश्यक खनिज जैसे आयरन और मैग्नीशियम, बी विटामिन जैसे थायमिन और नियासिन होते हैं। सूजी में मौजूद पोषण की बात करें तो 100 ग्राम सूजी में करीब 350–360 कैलोरी, 72 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 12 ग्राम प्रोटीन और बहुत कम वसा होती है। हालांकि इसमें फाइबर की मात्रा कम होती है, लेकिन यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का अच्छा स्रोत मानी जाती है।
सूजी के फायदे
कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होने के कारण सूजी नाश्ते या प्री-वर्कआउट फूड के लिए अच्छी मानी जाती है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम होता है, यानी यह ब्लड शुगर को बहुत तेजी से नहीं बढ़ाती। इसके अलावा सूजी पेट के लिए हल्की होती है और अपच, गैस या भारीपन जैसी समस्याओं में आसानी से पच जाती है।
आटा क्या है और इसमें क्या खास है?
आटा साबुत गेहूं को बारीक पीसकर बनाया जाता है और इससे रोटी, चपाती और पराठे जैसे रोज़मर्रा के फूड तैयार किए जाते हैं। 100 ग्राम आटे में करीब 340–350 कैलोरी, 71 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 12–13 ग्राम प्रोटीन और लगभग 2 ग्राम फैट होता है। आटे की सबसे बड़ी खासियत इसकी फाइबर की मात्रा है, जो सूजी की तुलना में काफी ज्यादा होती है। इसके अलावा इसमें आयरन, मैग्नीशियम और बी-विटामिन्स भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं।
पेट, वजन और डायबिटीज के लिए आटा बेहतर है या सूजी?
अगर पाचन, वजन कंट्रोल और ब्लड शुगर मैनेजमेंट की बात करें तो आटा सूजी से ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। ज्यादा फाइबर होने की वजह से आटा देर तक पेट भरा रखता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव होता है। आटे से बनी रोटी ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाती है, इसलिए ये डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहतर विकल्प है। वहीं सूजी हल्की जरूर होती है, लेकिन कम फाइबर होने के कारण यह जल्दी पच जाती है और भूख भी जल्दी लग सकती है।
सूजी का GI लगभग 66 से 67 होता है। सूजी गेहूं के ‘एंडोस्पर्म’ से बनती है, इसलिए यह आटे की तुलना में शरीर में जल्दी ग्लूकोज रिलीज करती है। इसे खाकर डायबिटीज मरीजों की ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है। सिडनी यूनिवर्सिटी की ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स रिसर्च सर्विस ने विभिन्न अनाजों पर शोध किया है। रिसर्च के अनुसार होल व्हीट आटे का GI लेवल सूजी से कम पाया गया। कम GI वाला भोजन Blood Sugar को नॉर्मल रखने में मदद करता है।
निष्कर्ष
सूजी और आटा दोनों के अपने-अपने फायदे हैं। अगर आपको तुरंत एनर्जी चाहिए या पाचन से जुड़ी समस्या है, तो सूजी अच्छा विकल्प हो सकती है। लेकिन वजन घटाने, डायबिटीज कंट्रोल और लंबे समय तक पेट भरा रखने के लिए आटा ज्यादा बेहतर है। संतुलित डाइट के लिए दोनों का सही मात्रा में सेवन करना ही सबसे सही तरीका माना जाता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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