पीरियड महिलाओं के शरीर में होने वाली एक पूरी तरह से नेचुरल और जरूरी प्रक्रिया है जो रिप्रोडक्टिव हेल्थ से सीधे जुड़ी होती है। आमतौर पर एक हेल्दी महिला में पीरियड साइकिल 25 से 28 दिनों का होता है, हालांकि कुछ महिलाओं में ये 21 से 35 दिनों तक भी नॉर्मल माना जाता है। मेडिकल साइंस के अनुसार पीरियड्स की अवधि आमतौर पर 3 से 7 दिनों के बीच होती है। इस दौरान शरीर हर महीने गर्भधारण की तैयारी करता है। जब प्रेग्नेंसी नहीं होती तो यूटेरस की अंदरूनी परत टूटकर ब्लीडिंग के रूप में बाहर निकल जाती है, जिसे हम पीरियड कहते हैं।
जैसे-जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है, शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं। इसका असर पीरियड साइकिल और ब्लीडिंग की अवधि पर भी पड़ता है। आमतौर पर 30 के बाद पीरियड डेज धीरे-धीरे कम या ज्यादा हो सकते हैं, लेकिन 40 की उम्र के बाद ये बदलाव ज्यादा साफ तौर पर दिखाई देने लगते हैं। इस समय कई महिलाओं में पीरियड्स जल्दी खत्म होने लगते हैं, ब्लीडिंग हल्की हो सकती है या साइकल अनियमित हो जाता है।
40 के बाद पीरियड में बदलाव क्यों होता है?
40 के बाद पीरियड्स में होने वाले ये बदलाव अक्सर पेरिमेनोपॉज की शुरुआत के संकेत होते हैं। इस दौर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का लेवल धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिसकी वजह से पीरियड्स कभी जल्दी आ सकते हैं, कभी देर से या फिर कुछ महीनों तक रुक भी सकते हैं। हालांकि यह पूरी तरह से नेचुरल प्रोसेस है, लेकिन अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो, बहुत कम हो या लंबे समय तक पीरियड्स बंद रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
कुल मिलाकर, पीरियड्स का नियमित होना महिलाओं की अच्छी हार्मोनल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ का संकेत माना जाता है। उम्र के साथ इसमें बदलाव आना सामान्य है, लेकिन कुछ महिलाओं को 20 से 30 साल की उम्र में भी पीरियड 2 से तीन दिनों तक आता है। अब सवाल ये उठता है कि 2 दिन ब्लीडिंग होना किसी बड़ी समस्या का संकेत तो है? आइए डॉक्टर से जानते हैं।
2 दिन पीरियड आना नॉर्मल है या बड़ी परेशानी
स्त्री रोग विशेषज्ञ, आईवीएफ एक्सपर्ट और लेप्रोस्कोपिक सर्जन लखनऊ में डॉ.अमृता तिवारी के मुताबिक पीरियड के कम या ज्यादा आने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। एक्सपर्ट ने बताया पीरियड में कम दिनों ब्लीडिंग होने के लिए कुछ कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे प्रेग्नेंसी, तनाव का बढ़ना, गंभीर बीमारी की स्थिति में पीरियड मिस हो सकते हैं या फिर पीरियड्स में ब्लीडिंग कम हो सकती है। बढ़ते वजन की वजह से भी पीरियड्स में ब्लीडिंग कम हो सकती है। पीरियड में दो दिन ब्लीडिंग होती है तो उसकी मेडिकल हिस्ट्री को समझना जरूरी है।
नॉर्मल पीरियड कितने दिनों तक होता है?
नॉर्मल पीरियड की अवधि 2 से 7 दिनों तक होती है, जिसमें अक्सर पहले दो दिनों में ब्लीडिंग सबसे ज्यादा होती है, हालांकि उनमें भिन्नता हो सकती है। पूरा चक्र यानी मासिक धर्म के पहले दिन से अगले पीरियड के पहले दिन तक आमतौर पर 21 से 35 दिनों के बीच होता है, हालांकि ये कम या ज्यादा भी हो सकता है, खासकर किशोरियों के लिए और उम्र के साथ यह चक्र छोटा और नियमित हो जाता है। 8 दिनों से अधिक की अवधि को आमतौर पर लंबा माना जाता है।
अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट के अनुसार, 8 दिनों से अधिक समय तक चलने वाली ब्लीडिंग को Menorrhagia की श्रेणी में रखा जा सकता है। यानी अत्यधिक रक्तस्राव होने की श्रेणी में रखा जाता है। पहले 1-2 दिनों में गर्भाशय की परत (Endometrium) सबसे तेजी से गिरती है, इसलिए रक्तस्राव भारी होता है। इसके बाद प्रोस्टाग्लैंडिंस का स्तर कम होने पर प्रवाह धीमा हो जाता है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ गायनेकोलॉजी एंड आब्सटेट्रिक्स’ (FIGO) के मुताबिक, यदि चक्र 21 दिन से छोटा या 38 दिन से अधिक लंबा है, तो इसे अनियमित माना जाता है।
| लक्षण | सामान्य सीमा (Normal Range) | चिंता का विषय (Clinical Concern) |
| ब्लीडिंग के दिन | 2 – 7 दिन | 8 दिन से अधिक |
| चक्र की लंबाई | 21 – 35 दिन | 21 से कम या 38 से अधिक |
| रक्त की मात्रा | 30 – 80 ml | हर 1-2 घंटे में पैड बदलना |
डॉक्टर से कब मिलें?
- अगर आपका पीरियड अचानक से बहुत भारी होने लगें तो कुछ परेशानी का संकेत हो सकता है। ऐसे में आप तुरंत डॉक्टर से मिलें।
- अगर आपको 90 दिनों तक पीरियड नहीं आए तो ये बॉडी के लिए किसी बड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है। ऐसे में आप तुरंत डॉक्टर से मिलें।
दो पीरियड के बीच में स्पॉटिंग या ब्लीडिंग होना भी किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में भी आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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