सर्दियों का मौसम आते ही लोग ठंड से बचने के इंतजामों में लग जाते हैं। गर्म कपड़े, चाय-कॉफी और आराम भरी दिनचर्या इस मौसम की पहचान बन जाती है। लेकिन इसी दौरान एक बड़ी गलती अक्सर हो जाती है, पानी कम पीना। ठंड में पसीना कम आता है, इसलिए प्यास भी कम लगती है। लोग सोचते हैं कि जब प्यास नहीं लग रही तो पानी की जरूरत भी नहीं है। जबकि हकीकत यह है कि सर्दियों में पानी कम पीना किडनी की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। जुपिटर हॉस्पिटल के पेडिएट्रिक नेफ्रोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. पुनीत छाजेड अनुसार, पानी की कमी अगर लंबे समय तक बनी रहे तो किडनी से जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके साथ ही सेहत से जुड़ी कई परेशानियां हो सकती हैं।

सर्दियों में प्यास कम लगने की असली वजह

गर्मियों में शरीर पसीने के जरिए काफी पानी बाहर निकाल देता है। यही कारण है कि बार-बार प्यास लगती है और लोग पानी ज्यादा पीते हैं। सर्दियों में पसीना कम आता है, इसलिए शरीर प्यास का संकेत भी कम देता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शरीर को पानी की जरूरत नहीं होती। सर्दियों में भी सांस लेने, पेशाब करने और त्वचा के सूखने के कारण शरीर से पानी लगातार निकलता रहता है। जब इस कमी को समय पर पूरा नहीं किया जाता, तो शरीर में साइलेंट डिहाइड्रेशन की स्थिति बन जाती है, जो धीरे-धीरे किडनी पर दबाव डालती है।

किडनी पर पड़ता है असर

किडनी का काम खून को साफ करना, शरीर से गंदे टॉक्सिन्स बाहर निकालना और पानी व इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखना होता है। इन सभी कामों के लिए किडनी को पर्याप्त पानी चाहिए। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो किडनी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे किडनी पर स्ट्रेस बढ़ता है। कम पानी पीने से पेशाब गाढ़ा हो जाता है। यही गाढ़ा पेशाब कैल्शियम, ऑक्सलेट और यूरिक एसिड जैसे तत्वों को जमा करने लगता है, जो आगे चलकर किडनी स्टोन का कारण बन सकते हैं। सर्दियों में ज्यादा नमक, प्रोटीन और तली-भुनी चीजें खाने की आदत इस खतरे को और बढ़ा देती है।

बच्चों में सर्दियों के दौरान किडनी की परेशानी

बच्चों में सर्दियों के दौरान किडनी से जुड़ी समस्याओं को अक्सर हल्के में ले लिया जाता है। कम पेशाब आना, पेशाब का रंग गहरा होना, हल्का कमर दर्द या बिना वजह थकान को मौसम की वजह मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि ये किडनी पर दबाव पड़ने के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। जिन बच्चों को पहले से किडनी की बीमारी होती है, उनमें सर्दियों के दौरान वायरल या सांस से जुड़े संक्रमण नेफ्रोटिक सिंड्रोम जैसी बीमारियों को दोबारा सक्रिय कर सकते हैं। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले बच्चों में यह खतरा ज्यादा रहता है।

किन लोगों को सर्दियों में ज्यादा सावधान रहना चाहिए

कुछ लोगों के लिए सर्दियों में हल्का सा डिहाइड्रेशन भी खतरनाक साबित हो सकता है। पहले से किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोग, बुज़ुर्ग जिनमें प्यास का एहसास कम हो जाता है, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज, हार्ट पेशेंट्स और वे लोग जो पेशाब बढ़ाने वाली दवाइयां लेते हैं। इन सभी को सर्दियों में खास सावधानी बरतनी चाहिए। इन लोगों में पानी की कमी से क्रिएटिनिन बढ़ सकता है और शरीर का इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बिगड़ सकता है।

सर्दियों में किडनी को स्वस्थ रखने के आसान उपाय

सर्दियों में किडनी को स्वस्थ रखने के लिए थोड़ी सी समझदारी बहुत काम आ सकती है। प्यास न लगे तब भी नियमित अंतराल पर पानी पीना चाहिए। गुनगुना पानी, सूप और हर्बल चाय को रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद होता है। पेशाब के रंग पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि बहुत गहरा रंग डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है। ज्यादा नमक और अत्यधिक प्रोटीन लेने से बचना चाहिए। ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की नियमित जांच भी जरूरी है। इसके साथ ही सर्दियों में भी हल्की फिजिकल एक्टिविटी बनाए रखना किडनी की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।

हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक

ठंड के मौसम में डिहाइड्रेशन के कारण शरीर में खून का गाढ़ापन बढ़ जाना सीधे तौर पर कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को प्रभावित कर सकता है। जब खून अधिक गाढ़ा हो जाता है, तो धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है, जिससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियों की आशंका बढ़ती है। खासतौर पर बुजुर्गों और हार्ट से पीड़ित लोगों के लिए सर्दियों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। शरीर में पानी का स्तर सही रहने से ब्लड सर्कुलेशन सामान्य बना रहता है और सभी अंगों तक ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर तरीके से पहुंचती है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचाव संभव हो पाता है।

त्वचा का रूखापन

जब शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो वह त्वचा से नमी खींचने लगता है। इसका सीधा असर त्वचा पर दिखाई देता है, जिससे चेहरा बेजान, होंठ फटना और खुजली जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

पाचन संबंधी समस्याएं

पानी की कमी होने पर मल सख्त हो जाता है, जिससे पुरानी कब्ज और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। सर्दियों के मौसम में गुनगुना पानी पीना खासतौर पर फायदेमंद माना जाता है। इससे न सिर्फ पाचन बेहतर रहता है, बल्कि यह शरीर के आंतरिक तापमान को संतुलित रखने में भी मदद करता है, जिससे ठंड के मौसम में सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है।

कैसे पता करें कि शरीर में पानी की कमी है?

शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होने पर कई लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इनमें अत्यधिक प्यास लगना, गहरा पीला पेशाब, पेशाब की मात्रा कम होना, लगातार थकान, चक्कर आना, सूखा मुंह, सिरदर्द और त्वचा का लचीलापन कम होना शामिल हैं। इसके अलावा कई लोगों को मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या भी हो सकती है।

अगर लंबे समय तक शरीर में पानी की कमी बनी रहे, तो इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। डिहाइड्रेशन से किडनी, हृदय और पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है, साथ ही ब्लड सर्कुलेशन भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए सर्दियों में भी पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और शरीर के इन संकेतों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।

निष्कर्ष

सर्दियों में कम पानी पीना भले ही छोटी सी बात लगे, लेकिन इसका असर धीरे-धीरे किडनी पर पड़ता है। लगातार पानी की कमी से शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है, जो किडनी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। खासतौर पर जिन लोगों को पहले से किडनी से जुड़ी समस्या है, उनके लिए यह जोखिम और बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि ठंड के मौसम में भी पानी पीने की आदत न बदली जाए। शरीर में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव महसूस हो, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

अंकुरित अनाज पोषण का खजाना हैं और सर्दियों में पाचन सुधारने का आसान प्राकृतिक तरीका भी। बस जरूरी है कि इन्हें सही मात्रा और सही तरीके से खाया जाए। पूरी जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें।