भारत की ओलंपिक स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल एक बार फिर सोशल मीडिया पर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह न तो कोई मैच है और न ही कोई मेडल, बल्कि जिम में किया गया उनका प्लैंक एक्सरसाइज है। हाल ही में साझा किए गए वीडियो में साइना प्लैंक करते हुए शानदार फॉर्म और स्टेबिलिटी दिखाती नजर आ रही हैं। देखने में प्लैंक भले ही आसान एक्सरसाइज लगे, लेकिन फिटनेस एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह पूरे शरीर के लिए सबसे असरदार व्यायामों में से एक है। साइना नेहवाल का यह वीडियो इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि अगर एक्सरसाइज सही तकनीक और फॉर्म के साथ की जाए, तो कम समय में भी बेहतरीन रिजल्ट मिल सकता है। आइए अब कंसल्टेंट डाइटिशियन और फिटनेस एक्सपर्ट गरिमा गोयल से जानते हैं कि प्लैंक एक्सरसाइज शरीर के लिए कितना फायदेमंद है और इसे सही तरीके से कैसे करना चाहिए।

कोर स्ट्रेंथ की असली पहचान है प्लैंक

गरिमा गोयल के मुताबिक, प्लैंक एक्सरसाइज पूरे शरीर की कोर स्ट्रेंथ को मजबूत करती है। उनके अनुसार, प्लैंक करते समय अगर कोर एक्टिव रहे, रीढ़ की हड्डी सीधी हो और सांसें नियंत्रित रहें, तो यह पेट, पीठ, कंधे और हिप्स को एक साथ काम करने पर मजबूर करता है। इससे शरीर को एक मजबूत आधार मिलता है, जो हर तरह की मूवमेंट के लिए जरूरी है।

सिर्फ बॉडी शेप नहीं, सेहत के लिए भी जरूरी

अक्सर लोग सोचते हैं कि कोर एक्सरसाइज सिर्फ एब्स या बॉडी शेप के लिए होती है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा है। गरिमा गोयल बताती हैं कि मजबूत कोर से शरीर का पोश्चर बेहतर होता है, कमर दर्द का खतरा कम होता है और संतुलन भी अच्छा रहता है। रोजमर्रा के काम जैसे चलना, वजन उठाना, झुकना या सीढ़ियां चढ़ना – सब कुछ आसान हो जाता है।

एथलीट और आम लोगों दोनों के लिए फायदेमंद

साइना नेहवाल जैसी एथलीट के लिए कोर स्ट्रेंथ का मतलब है बेहतर पावर, तेज रिएक्शन और ज्यादा स्टेबिलिटी। वहीं आम लोगों के लिए यह उम्र बढ़ने के साथ शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। गरिमा के अनुसार, मजबूत कोर से गिरने का खतरा कम होता है और शरीर लंबे समय तक एक्टिव रहता है।

प्लैंक से दिमाग भी होता है मजबूत

प्लैंक सिर्फ शरीर ही नहीं, दिमाग को भी ट्रेन करता है। इस पोजीशन में बने रहना आसान नहीं होता। इसमें फोकस, धैर्य और मानसिक मजबूती की जरूरत होती है। गरिमा गोयल कहती हैं कि प्लैंक करते समय शरीर और दिमाग दोनों को एक साथ काम करना पड़ता है। धीरे-धीरे समय बढ़ाने या प्लैंक के अलग-अलग वेरिएशन करने से तालमेल और फंक्शनल स्ट्रेंथ और बेहतर होती है।

सही फॉर्म है सबसे जरूरी

फिटनेस एक्सपर्ट्स कहते हैं कि प्लैंक कितनी देर किया, यह उतना जरूरी नहीं है जितना कि उसे कैसे किया। गलत फॉर्म से फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। गरिमा गोयल बताती हैं कि प्लैंक करते समय कुछ गलतियों को करने से बचना चाहिए। इस दौरान हिप्स को नीचे लटकने न दें, सांस रोककर न रखें और कंधों को लॉक न करें। सही प्लैंक में रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है, ग्लूट्स हल्के से टाइट रहते हैं और कंधे सीधे कोहनियों के ऊपर होते हैं।

निष्कर्ष

अगर आप भी फिट रहना चाहते हैं तो साइना नेहवाल की तरह फॉर्म पर ध्यान दें। रोज थोड़ी देर सही तरीके से प्लैंक करें। धीरे-धीरे इसका असर आपकी ताकत, पोश्चर और रोजमर्रा की जिंदगी में साफ नजर आएगा।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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