इन दिनों पेट से जुड़ी परेशानियां आम होती जा रही हैं। गैस, अपच, कब्ज, पेट दर्द और मरोड़ अब सिर्फ बुज़ुर्गों की समस्या नहीं रही, बल्कि युवा भी इससे लगातार जूझ रहे हैं। गलत खानपान, जंक फूड, देर रात तक जागना, तनाव और अनियमित दिनचर्या ने पेट की सेहत पर सीधा असर डाला है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर समय रहते गट हेल्थ पर ध्यान न दिया जाए, तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है। बता दें कि पेट की सेहत को ही गट हेल्थ कहा जाता है। हमारा गट सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करता, बल्कि शरीर की इम्युनिटी और दिमागी सेहत से भी गहराई से जुड़ा होता है। जब पेट सही तरीके से काम करता है, तो शरीर को जरूरी पोषक तत्व सही मात्रा में मिलते हैं और बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ती है। इसके अलावा गट और दिमाग के बीच सीधा कनेक्शन होता है, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है। यानी पेट ठीक रहेगा तो सोचने-समझने की क्षमता और मूड भी बेहतर रहेगा।
हर दूसरे व्यक्ति को पेट की समस्या क्यों?
एएमयू के एग्रीकल्चर विभाग के शोधकर्ता शिरजील अहमद सिद्दीकी के मुताबिक, आज के समय में हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी पेट की समस्या से परेशान है। किसी को गैस रहती है, किसी को खाना ठीक से नहीं पचता, तो किसी को पेट में भारीपन या दर्द की शिकायत रहती है। इसकी सबसे बड़ी वजह बिगड़ती लाइफस्टाइल है। ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और प्रोसेस्ड फूड खाने से पेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। साथ ही तनाव और नींद की कमी भी पाचन तंत्र को कमजोर बना देती है।
पेट की समस्याओं की जड़ क्या है?
शोधकर्ता बताते हैं कि पेट की अधिकतर समस्याओं की जड़ पेट के अंदर होने वाली सूजन यानी इंफ्लेमेशन और हानिकारक बैक्टीरिया की बढ़ी हुई संख्या होती है। हमारे पेट में अच्छे और बुरे, दोनों तरह के बैक्टीरिया होते हैं। जब खराब खानपान और तनाव के कारण बुरे बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं, तो पाचन गड़बड़ा जाता है। इसका नतीजा गैस, कब्ज, अपच और पेट दर्द के रूप में सामने आता है।
प्रोबायोटिक्स: पेट के लिए वरदान
गट हेल्थ को सुधारने का सबसे आसान और असरदार तरीका है प्रोबायोटिक्स को डाइट में शामिल करना। प्रोबायोटिक्स दरअसल ऐसे गुड बैक्टीरिया होते हैं, जो पेट के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। इनमें लैक्टोबैसिलस, बिफिडोबैक्टीरियम और सैक्रोमाइसीस जैसे बैक्टीरिया और यीस्ट शामिल हैं। ये पेट में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया की संख्या को कम करते हैं, सूजन घटाते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं। इससे खाना सही तरीके से पचता है और पेट से जुड़ी कई समस्याओं में राहत मिलती है।
प्रोबायोटिक्स फूड्स
प्रोबायोटिक्स कोई नई चीज नहीं हैं। हम सदियों से इन्हें अपने खानपान में शामिल करते आ रहे हैं। दही और छाछ प्रोबायोटिक्स के सबसे आसान और सस्ते स्रोत हैं। रोजाना एक कटोरी दही खाने या छाछ पीने से पेट की सेहत काफी हद तक सुधर सकती है। इसके अलावा फर्मेंटेड फूड्स जैसे सॉरक्राउट, किमची और सिरके में फर्मेंट किए गए खाद्य पदार्थों में भी गुड बैक्टीरिया भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
सप्लीमेंट कब लें?
अगर किसी व्यक्ति को पेट की समस्या ज्यादा रहती है और घरेलू उपायों से राहत नहीं मिलती, तो डॉक्टर की सलाह से प्रोबायोटिक सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है। बाजार में ये सप्लीमेंट लैक्टोबैसिलस या बिफिडोबैक्टीरियम के नाम से उपलब्ध होते हैं। हालांकि बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक सप्लीमेंट लेना सही नहीं माना जाता।
इन बातों का रखें ध्यान
सिर्फ प्रोबायोटिक्स लेना ही काफी नहीं है। पेट को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, समय पर खाना, पर्याप्त पानी पीना, तनाव कम करना और रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज भी बेहद जरूरी है। जंक फूड और ज्यादा तला-भुना खाने से बचना चाहिए। साथ ही पर्याप्त नींद लेना भी गट हेल्थ को बेहतर बनाता है।
निष्कर्ष
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेट की सेहत को नजरअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है। गट हेल्थ सिर्फ पाचन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इम्युनिटी और मानसिक सेहत से भी जुड़ी है। सही खानपान, प्रोबायोटिक्स और स्वस्थ दिनचर्या अपनाकर पेट की सेहत को बेहतर बनाया जा सकता है और गैस, अपच, कब्ज जैसी समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
