हर मां-बाप चाहते हैं कि उनकी औलाद हमेशा खुश और हेल्दी रहे। बात हेल्थ की आती है तो वो अपने बच्चे को ऐसी डाइट देना चाहते हैं जिसमें पर्याप्त पोषक तत्व मौजूद हो। बच्चे के जन्म से लेकर मां बाप की ये फिक्र शुरु हो जाती है। जन्म लेते ही हर मां चाहती है कि उसका बच्चा उसके करीब रहे और वो अपने बच्चे को स्तनपान कराकर ही उसका पेट भरे। शुरुआती पोषण ही बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास की नींव रखता है। डॉक्टर भी मां के दूध को बच्चे के लिए सबसे बेहतर डाइट मानते हैं, क्योंकि इसमें जरूरी पोषक तत्व, एंटीबॉडी और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले तत्व मौजूद होते हैं। हालांकि कुछ परिस्थितियों में जब मां किसी वजह से स्तनपान नहीं करा पाती, तो डॉक्टर की सलाह से फॉर्मूला मिल्क एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

हाल ही में फॉर्मूला मिल्क को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी और पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा ने लोकप्रिय पॉडकास्ट Call Her Daddy में खुलासा किया कि वह खुद एक फॉर्मूला बेबी थीं। बातचीत के दौरान उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा मैं फॉर्मूला बेबी हूं, मेरी हाइट 5’11 है और मेरा दिमाग बिल्कुल ठीक काम कर रहा है।

मिशेल ओबामा के इस बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या फार्मूला मिल्क बच्चों के लिए सुरक्षित और फायदेमंद है। विशेषज्ञों के मुताबिक मां का दूध शिशु के लिए सबसे बेहतरीन आहार माना जाता है, लेकिन जिन परिस्थितियों में मां स्तनपान नहीं करा पातीं जैसे दूध का पर्याप्त उत्पादन न होना या किसी गंभीर बीमारी की स्थिति तब डॉक्टर की सलाह से फॉर्मूला मिल्क दिया जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि फॉर्मूला मिल्क को अनहेल्दी नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह ब्रेस्ट मिल्क का वैज्ञानिक रूप से तैयार किया गया विकल्प है, जो बच्चे को जरूरी पोषण देता है। हालांकि इसका उपयोग हमेशा चिकित्सीय सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए। आइए एक्सपर्ट से और WHO की रिपोर्ट से जानते हैं कि फॉर्मूला मिल्क क्या है और ये बच्चों की सेहत पर कैसे करता है असर।

बेबी फार्मूला क्या होता है?

फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम के पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. कृष्ण चुग बताते हैं कि बेबी फॉर्मूला मां के दूध का विकल्प होता है। यह गाय के दूध से तैयार किया जाता है, जिसे इस तरह बदला जाता है कि उसकी संरचना मां के दूध के जैसी ही होती है। इस दूध को बनाने के लिए उबले पानी में फार्मूला पाउडर मिलाकर बच्चे को दिया जाता है। इस दूध से बच्चे को जरूरी पोषण मिलता है लेकिन बच्चे को बोतल से दूध पिलाने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है। बच्चे को कटोरी या चम्मच से फीड कराना ज्यादा सुरक्षित होता है।

कब दिया जा सकता है फॉर्मूला मिल्क?

डॉ. चुग के अनुसार बच्चे को उसकी ज़रूरत के हिसाब से दूध देना चाहिए। फॉर्मूला मिल्क जन्म के पहले दिन से भी दिया जा सकता है, खासकर तब जब मां गंभीर रूप से बीमार हो या स्तनपान संभव न हो। डॉक्टर ने बताया बच्चे के जन्म के दो महीनों बाद तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध ही पिलाना चाहिए।

WHO की नई गाइडलाइंस क्या कहती हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक बच्चे के जन्म से छह महीनों तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध ही पिलाना चाहिए। WHO के मुताबिक मां चाहें तो बच्चे को दो साल तक भी दूध पिला सकती है। लेकिन मां दूध नहीं पिला सकती, हेल्थ इश्यू है,मां का देहांत हो गया है तो ऐसी स्थिति में फॉर्मूला दूध ही बेस्ट है। ऐसे में बच्चे को 6 महीने की उम्र के बाद फुल-फैट गाय का दूध दिया जा सकता है। WHO के मुताबिक छह महीने के बाद दूध से बच्चे को पर्याप्त आयरन नहीं मिल पाता, इसलिए इस उम्र से आयरन युक्त डाइट जैसे दालें, हरी सब्ज़ियां, अंडा, मांस, बीन्स और नट बटर देना जरूरी है।

फॉर्मूला मिल्क देते हैं तो इन बातों का रखें ध्यान

6 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए मां का दूध या फॉर्मूला ही ज़रूरी
12 महीने से बड़े बच्चों के लिए टॉडलर फॉर्मूला की सिफारिश नहीं करता। टॉडलर फॉर्मूला दरअसल एक तरह का पाउडर दूध होता है, जिसे 1 से 3 साल के बच्चों के लिए बनाया जाता है। इसे अक्सर ग्रोइंग-अप मिल्क भी कहा जाता है।
आपात स्थिति में 6 महीने के बाद गाय का दूध सुरक्षित विकल्प हो सकता है

निष्कर्ष

मां का दूध शिशु के लिए सबसे बेहतर पोषण माना जाता है, लेकिन जब यह संभव न हो, तो फॉर्मूला मिल्क एक सुरक्षित और वैज्ञानिक विकल्प है। जरूरी यह है कि बच्चे को उसकी उम्र और ज़रूरत के मुताबिक सही पोषण मिले, चाहे वो मां के दूध से हो या फॉर्मूला से।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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