कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना एक ऐसी परेशानी है जिसके लिए खराब डाइट और बिगड़ता लाइफस्टाइल जिम्मेदार है। भारत में शहरों में रहने वाले 25-30 फीसदी लोगों में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की परेशानी बढ़ रही है। कोलेस्ट्रॉल ब्लड में मौजूद चिपचिपा पदार्थ होता है। ब्लड में अगर कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने लगे तो ये नसों में जमा होने लगता है और नसों को ब्लॉक कर देता है। कोलेस्ट्रॉल लिवर द्वारा निर्मित होता और पानी में ये घुलता नहीं है। कोलेस्ट्रॉल दो तरह का होता है एक खराब कोलेस्ट्रॉल और दूसर गुड कोलेस्ट्रॉल। खराब कोलेस्ट्रॉल की बॉडी में मात्रा बढ़ने से बॉडी में कई बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है।
अगर खराब कोलेस्ट्रॉल 130-159 mg/dL है तो बॉर्डर लाइन कोलेस्ट्रॉल माना जाता है। LDL का स्तर 160-189 mg/dL से ऊपर चला जाए तो सेहत के लिए खतरा बन सकता है। खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने से ये नसों के अंदर की सतह पर चिपक जाता है और ऑक्सीजन के स्तर को प्रभावित करता है। अगर इस गंदे कोलेस्ट्रॉल की लेयर हार्ड हो जाए तो ये नसों में जमा होने लगता है जिससे बॉडी में ब्लड सप्लाई कम होने लगती है।
आयुर्वेदिक और युनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक ब्लड में गंदे कोलेस्ट्रॉल का स्तर ज्यादा होने से दिल के रोगों का खतरा बढ़ जाता है। WHO के मुताबिक 20 साल की उम्र के बाद साल में एक बार ब्लड में कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच कराना जरूरी है। अगर खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कंट्रोल करना है तो डाइट में पैकेज्ड स्नैक्स, डेयरी प्रोडक्ट्स और मीट का सेवन करने पर कंट्रोल करें।
नॉनवेज खाने से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है जो हार्ट अटैक का कारण बनता है। ब्लड में Normal HDL levels -130 mg/dLसे ऊपर नहीं होना चाहिए। LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का नॉर्मल स्तर 100 mg/dL से कम होना चाहिए। इस स्तर से ज्यादा होने पर बॉडी बीमारियों का घर बनने लगती है। आइए जानते हैं कि ब्लड में कोलेस्ट्रॉल का स्तर हाई होने से कौन-कौन सी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है।
- क्रोनेरी हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है जिसकी वजह से दिल को ब्लड सप्लाई कम होने लगती है जिससे हार्ट में दर्द और चुभन महसूस होती है। क्रोनेरी हार्ट डिजीज की वजह से ही दिल के रोगों का खतरा बढ़ता है।
- स्ट्रॉक का बढ़ सकता है खतरा। LDL का स्तर बढ़ने से ब्रेन की ब्लड सप्लाई कम होने लगती है जिसकी वजह से ब्रेन के किसी भी पार्ट की ब्लड वैसल्स ब्लॉक होने लगती है। स्ट्रॉक के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपके ब्रेन के किस हिस्से में ब्लड सप्लाई प्रभावित हुई है। अचानक से चक्कर आना,आखों की रोशनी कम होना या चली जाना, चेहरे पर लकवा मारना,बॉडी के किसी हिस्से का काम नहीं करना,बॉडी के आधे हिस्से पर लकवा होना स्ट्रॉक के लक्षण हैं।
- पेरिफेरल आर्टरी डिजीज भी कोलेस्ट्रॉल हाई होने के संकेत हैं। इसके लक्षणों की बात करें तो पैरों में दर्द होना,चलने में परेशानी होना,सूजन होना और क्रैंप आने जैसे लक्षण दिखते हैं। जिन लोगों को ये परेशानी होती है उन्हें हार्ट अटैक और स्ट्रॉक का जोखिम अधिक रहता है।
- हाई कोलेस्ट्रॉल होना ब्लड प्रेशर हाई होने की परेशानी को भी बढ़ा सकता है।
- इरेक्टाइल डिस्फंक्शन भी हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से होता है। इरेक्शन के लिए प्रोपर ब्लड सप्लाई की जरूरत होती है, जब प्रोपर ब्लड सप्लाई नहीं होती तो इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की परेशानी बढ़ सकती है।
