डायबिटीज मरीजों में कई बार देखा गया है कि वो समय पर दवाइयां लेते हैं, रोज़ वॉक करते हैं और मीठा भी छोड़ा देते हैं, फिर भी उनकी फास्टिंग शुगर 140–150 से नीचे नहीं आती। सारे जतन के बावजूद HbA1c कंट्रोल में नहीं रहता। इसकी एक बड़ी वजह ये हो सकती है कि भले ही आप सीधे तौर पर मीठा न खा रहे हों, लेकिन आपकी रोज़मर्रा की डाइट और आदतों में कुछ ऐसी चीजें छुपी हुई हैं जो आपकी शुगर को लगातार बिगाड़ रही हैं। ये छुपे हुए दुश्मन घर के किचन, फ्रिज और लेट-नाइट हैबिट्स में मौजूद होते हैं। ऐसे में अगर हम कितनी भी इंसुलिन या दवाइयां क्यों न लें लेकिन शुगर को नॉर्मल नहीं कर सकते हैं।

आयुर्वेदिक और युनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी ने बताया डायबिटीज मरीज जिन फूड्स का सेवन करते है उसके ग्लाइसेमिक इंडेक्स पर पहले ध्यान दें। डायबिटीज मरीज ऐसे फूड्स का सेवन करें जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 54 या इससे कम हो। आइए जानते हैं कि हमारी डाइट में ऐसे कौन-कौन से दुश्मन छुपे हैं जो हमारी फास्टिंग ब्लड शुगर को कभी भी नॉर्मल नहीं होने देते।  

सबसे पहला और सबसे आम दुश्मन है मैदा

The American Journal of Clinical Nutrition में प्रकाशित शोध के अनुसार, मैदे का GI बहुत अधिक यानी 71-75 होता है। आटे से चोकर (Fiber) निकल जाने के कारण मैदा रह जाता है जो पेट में जाते ही बहुत तेजी से पचता है और ग्लूकोज को सीधे खून में छोड़ देता है, जिससे शुगर लेवल तुरंत स्पाइक हो जाता है। वाइट ब्रेड जो पूरी तरह मैदा से तैयार होती है जिसे आमतौर पर हल्का नाश्ता माना जाता है वो डायबिटीज या प्री-डायबिटीज के मरीजों के लिए किसी बम से कम नहीं है। गेहूं जब खेत से आता है तो वह एक कम्प्लीट ग्रेन यानी साबुत अनाज होता है, जिसमें भूसी,अंकुर भाग और स्टार्च युक्त अंदरूनी भाग होते हैं। भूसी में फाइबर और जर्म में पोषक तत्व होते हैं, लेकिन मैदा बनाने की प्रक्रिया में भूसी और अंकुर को निकाल दिया जाता हैं और सिर्फ स्टार्च बचता है, जो लगभग पूरी तरह ग्लूकोज की चेन होता है।

जब फाइबर वाली रोटी खाई जाती है तो ग्लूकोज धीरे-धीरे खून में जाता है, लेकिन वाइट ब्रेड का सेवन किया जाता है तो ये पेट में जाते ही तेजी से घुल जाती है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत ज्यादा होता है, जिससे 15–20 मिनट के अंदर ब्लड में ग्लूकोज की बाढ़ आ जाती है। इसके जवाब में पैंक्रियाज अचानक बहुत ज्यादा इंसुलिन रिलीज करता है, जिसे इंसुलिन स्पाइक कहा जाता है। बार-बार होने वाला ये स्पाइक शरीर की कोशिकाओं को इंसुलिन रेजिस्टेंस बना देता है, नतीजा यह होता है कि शुगर खून में ही घूमती रहती है और सेल्स तक नहीं पहुंच पाती। इसके अलावा मैदा आंतों में चिपक कर गट बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाता है। रिसर्च बताती है कि खराब गट हेल्थ होने पर शुगर कंट्रोल करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

दूसरा बड़ा दुश्मन है कोल्ड ड्रिंक्स,

Harvard T.H. Chan School of Public Health की एक रिसर्च के अनुसार जब आप कोई फल खाते हैं, तो उसमें मौजूद फाइबर शुगर के पचने की गति को धीमा कर देती है। लेकिन कोल्ड ड्रिंक में जीरो फाइबर होता है। पीने के मात्र 10 से 15 मिनट के अंदर इसमें मौजूद सारी चीनी एक साथ आपके खून में पहुंच जाती है। ये शरीर के लिए एक शुगर शॉक जैसा होता है। पैकेज्ड जूस और कोल्ड ड्रिंक्स के अक्सर हम लोग हेल्दी ड्रिंक मान लेते हैं। इन ड्रिंक्स में मौजूद शुगर का बड़ा हिस्सा फ्रुक्टोज होता है।

ग्लूकोज को शरीर का हर सेल इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन फ्रुक्टोज सिर्फ लिवर में प्रोसेस होता है। जब आप फाइबर के बिना जूस पीते हैं, तो यह लिक्विड शुगर सीधे लिवर तक पहुंचती है और  लिवर की क्षमता सीमित होती है और जब वह ओवरलोड हो जाता है, तो फ्रुक्टोज को फैट में बदल देता है। यही फैट लिवर पर जमा होकर नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का कारण बनता है। फैटी लिवर और डायबिटीज का गहरा संबंध है। अगर लिवर फैटी है, तो फास्टिंग शुगर लगातार हाई बनी रहती है।

कोल्ड ड्रिंक्स में भारी मात्रा में शुगर होती है, जिसे फास्फोरिक एसिड और कार्बोनेशन छुपा देते हैं। एक छोटी बोतल में करीब 10 चम्मच चीनी के बराबर शुगर होती है, जो पीते ही तेजी से ब्लड शुगर बढ़ा देती है।

रात के खाने के बाद मीठा खाना

खाने के बाद मीठा खाने की आदत डायबिटीज मरीजों के लिए जहर की तरह है। यह आदत डायबिटीज कंट्रोल की सबसे बड़ी दुश्मन है। हमारी बॉडी एक जैविक घड़ी यानी सर्कैडियन रिदम पर चलती है। शाम होते-होते पैंक्रियाज की इंसुलिन बनाने की क्षमता कम हो जाती है और मेलाटोनिन हार्मोन बढ़ने लगता है, जो नींद में मदद करता है। मेलाटोनिन बढ़ने पर इंसुलिन का असर कम हो जाता है। अगर इस समय, यानी रात 9–10 बजे के बाद मीठा खाया जाए तो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ती है लेकिन शरीर उतना इंसुलिन नहीं बना पाता कि उसे कंट्रोल कर सके। नतीजा यह होता है कि शुगर पूरी रात खून में बनी रहती है, नींद खराब होती है, बार-बार पेशाब और प्यास लगती है। नींद पूरी न होने से अगले दिन स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल बढ़ता है, जो फिर से शुगर बढ़ाता है। यही वजह है कि रात को मीठा खाने वालों की फास्टिंग शुगर सुबह बहुत ज्यादा आती है चाहे उन्होंने दवा ली हो।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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