Silent Diabetes: डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो रातों रात नहीं होती जिसके लिए सालों का खराब लाइफस्टाइल और डाइट जिम्मेदार है। खराब लाइफस्टाइल से मतलब है बॉडी की एक्टिविटी में कमी होना, वॉक नहीं करना जिम्मेदार हो सकता है। खराब डाइट यानी कि पैकेटबंद फूड का ज्यादा सेवन करना, ज्यादा खाना, नींद कम लेना, तनाव में रहना और घंटों डेस्क वर्क करना डायबिटीज की बीमारी के लिए जिम्मेदार कारण हो सकते हैं। डायबिटीज एक साइलेंट किलर डिजीज है जिसमें मरीज हेल्दी दिखता है लेकिन इंसुलिन प्रतिरोध से जूझ रहा होता हैं। भारत को डायबिटीज हब कहा जाता है, जहां 10 करोड़ से अधिक वयस्क डायबिटीज से पीड़ित हैं।

आंकड़ों के मुताबिक भारत में लगभग 13 करोड़ से 14 करोड़ लोग प्रीडायबिटीज का शिकार हैं। प्री डायबिटीज मतलब मरीज का ब्लड शुगर का स्तर पहले से ही हाई है, लेकिन इतना अधिक नहीं कि इसे डायबिटीज कहा जा सके। चिंता की बात ये है कि प्रीडायबिटीज मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जो कुछ समय बाद डायबिटीज में कन्वर्ट हो जाती है। भारत में 20 से 30 साल की उम्र के लोगों में टाइप 2 डायबिटीज है, जो पहले दुर्लभ हुआ करता था। विडंबना ये है कि इनमें से अधिकांश को इस बीमारी का पता भी नहीं होता। 

सहयाद्री हॉस्पिटल पुणे के कंसल्टेंट और इंडोक्रॉइनॉलिजिस्ट एंड डायबोटॉलिज्स डॉक्टर मिलिंद पाटिल ने बताया है कि अगर आप डायबिटीज के शुरूआती लक्षणों को पहचान लेंगे तो आसानी से बीमारी को काबू कर सकते हैं। इस बीमारी के लक्षणों की बात करें तो डायबिटीज या प्रीडायबिटीज में न बुखार, न तेज दर्द होता है बल्कि हल्की थकान,प्यास लगना, बार-बार यूरिन आने जैसे लक्षण दिखते हैं। बहुत भूख और प्यास लगना, बिना किसी कारण के वजन का तेजी से कम होना, आंखों से धुंधला दिखाई देना, प्राइवेट पार्ट में खुजली होना डायबिटीज के लक्षण हैं।

डायबिटीज के साइड इफेक्ट

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसे कंट्रोल नहीं किया जाए तो ये दिल के रोगों का खतरा बढ़ा सकती है। डायबिटीज की वजह से किडनी फेल, नर्व डैमेज और फैटी लिवर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डायबिटीज को लम्बे समय तक कंट्रोल नहीं किया जाए तो ये बीमारी चुपचाप बॉडी के लगभग हर अंग को प्रभावित कर सकती है।

डायबिटीज को क्या रिवर्स किया जा सकता है?

डायबिटीज कोच और फिटनेस न्यूट्रिशन कोच डॉक्टर अनुपम घोष ने बताया डायबिटीज को जड़ से खत्म किया जा सकता है। डायबिटीज को रिवर्स करने के लिए आप डाइट में सुधार करें और लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन करें तो आप बहुत जल्दी अपना डायबिटीज रिवर्स कर सकते हैं।

डायबिटीज रिवर्स करने का तरीका

सुबह जल्दी उठें और किसी एक गेम को रूटीन में शामिल करें

डायबिटीज कोच और फिटनेस न्यूट्रीशन कोच डॉ. अनुपम घोष के अनुसार अगर ब्लड शुगर कंट्रोल करना है तो रोज़ाना फिजिकल एक्टिविटी बेहद जरूरी है। इसके लिए आप किसी एक गेम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं जैसे क्रिकेट, बैडमिंटन या गोल्फ। इसके अलावा वॉकिंग या जॉगिंग भी फायदेमंद है। रोज़ कम से कम 45 मिनट से 1 घंटे की एक्टिविटी इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने और ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद कर सकती है। American Diabetes Association (ADA) के अनुसार हमारे शरीर की मांसपेशियां ग्लूकोज की सबसे बड़ी खपत करने वाली जगह हैं। जब बॉडी एक्टिव रहती हैं, तो मांसपेशियों में GLUT4 नामक एक प्रोटीन सक्रिय हो जाता है। ये प्रोटीन बिना इंसुलिन की मदद के खून से शुगर को खींचकर मांसपेशियों की कोशिकाओं में ले जाता है। यानी एक्सरसाइज के दौरान आपका शरीर इंसुलिन पर निर्भर नहीं रहता, जिससे पैंक्रियाज को आराम मिलता है और शुगर लेवल गिर जाता है।

मेथी दाना का पानी पिएं

ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने के लिए मेथी दाना एक पारंपरिक और कारगर उपाय माना जाता है। रात में एक चम्मच मेथी दाना पानी में भिगो दें। सुबह इस पानी को हल्का उबालकर पिएं या मेथी को चबाकर खा लें। मेथी दाना फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो ग्लूकोज़ के अवशोषण को धीमा करता है और ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकने में मदद करता है। International Journal for Vitamin and Nutrition Research के मुताबिक मेथी दाना में मौजूद फाइबर पेट में जाकर एक जैल जैसा पदार्थ बनाता है, जो पाचन की गति को धीमा कर देता है। इससे खाना खाने के बाद खून में शुगर का स्तर अचानक नहीं बढ़ता।

नाश्ते में अंडे को दें प्राथमिकता

अक्सर भारतीय नाश्ते में ज्यादा कार्बोहाइड्रेट होता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में नाश्ते में अंडे एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं। 2–3 अंडे  योक के साथ प्रोटीन और हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत होते हैं, जो लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं। आप अंडे को उबालकर, आमलेट या भुर्जी के रूप में खा सकते हैं। इसके साथ हरी सब्जियों की स्मूदी जोड़ना और भी फायदेमंद हो सकता है।

 खास तरह के आटे की रोटी अपनाएं

डायबिटीज में गेहूं के आटे की जगह लो-कार्ब और हाई-प्रोटीन आटे का इस्तेमाल बेहतर माना जाता है। बादाम का आटा, नारियल का आटा या सोया आटा ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने से रोकने में मदद कर सकते हैं। बाजार में मिलने वाले लो-कार्ब आटे भी एक विकल्प हो सकते हैं। ऐसे आटे से बनी रोटियां खाने से ब्लड शुगर स्टेबल रहता है और वजन कंट्रोल करने में भी सहायता मिल सकती है।

बाहर के खाने से बनाएं दूरी

डायबिटीज को मैनेज करने के लिए बाहर का प्रोसेस्ड और ऑर्डर किया हुआ खाना कम करना बेहद जरूरी है। फूड डिलीवरी ऐप्स, रिफाइंड शुगर और जंक फूड ब्लड शुगर को बिगाड़ सकते हैं। मीठे के लिए स्टीविया जैसे नेचुरल स्वीटनर का सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है। घर का ताजा, संतुलित और कम प्रोसेस्ड भोजन न सिर्फ ब्लड शुगर कंट्रोल करता है, बल्कि ओवरऑल सेहत को भी बेहतर बनाता है।

निष्कर्ष

डायबिटीज कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो एक दिन में ठीक हो जाए, लेकिन सही लाइफस्टाइल, संतुलित खानपान और नियमित फिजिकल एक्टिविटी से इसे प्रभावी ढंग से कंट्रोल किया जा सकता है। खेल, वॉकिंग, प्रोटीन-रिच नाश्ता, लो-कार्ब डाइट और प्रोसेस्ड फूड से दूरी जैसे छोटे-छोटे बदलाव लंबे समय में बड़ा असर डालते हैं। हालांकि, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह और नियमित जांच बेहद जरूरी है, ताकि ब्लड शुगर सुरक्षित स्तर पर बना रहे और जटिलताओं से बचा जा सके।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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