Jaundice cure: दिल्ली में यमुना नदी के पानी में अमोनिया की मात्रा 30 पीपीएम से ऊपर दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब पानी में अमोनिया का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो वह पीने योग्य नहीं रहता। ऐसी स्थिति में कई बार वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट सही तरीके से काम नहीं कर पाते, क्योंकि अमोनिया की अधिक मात्रा क्लोरीन के प्रभाव को कमजोर कर देती है। जब क्लोरीन प्रभावी ढंग से काम नहीं करता, तो पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हो पाते और पानी दूषित बना रहता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि अमोनिया खुद सीधे पीलिया या हेपेटाइटिस नहीं करता, लेकिन अमोनिया की अधिकता के कारण अगर पानी ठीक से ट्रीट न हो पाए, तो उसमें फीकल कंटैमिनेशन (मल से फैला संक्रमण) बना रह सकता है।
ऐसा दूषित पानी पीने से हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E जैसे जल जनित रोग फैल सकते हैं। इस स्थिति में मरीज को डायरिया, उल्टी, पेट में संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं और संक्रमण गंभीर होने पर आगे चलकर पीलिया (जॉन्डिस) भी हो सकता है। पीलिया एक ऐसी बीमारी हो जो दूषित खाने और पानी से फैलती है। इंदौर के महू नगर के पट्टी बाजार और चंदर मार्ग इलाकों में दूषित पानी पीने से दो दर्जन लोग बीमार पड़ गए। छावनी क्षेत्र में सफ़ाई का जिम्मा संभालने वाले अफसर मनीष अग्रवाल ने मीडिया को बताया ज्यादातर मरीज बच्चे हैं, जिन्हें उल्टी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। मरीजों के खून के नमूनों की जांच में पीलिया (जॉन्डिस) की पुष्टि हुई। डॉक्टरों का मानना है कि यह बीमारी दूषित पानी के कारण हो सकती है।
पीलिया क्या है और कैसे होता है?
पीलिया जिसे मेडिकल भाषा में जॉन्डिस (Jaundice) कहा जाता है। जब लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता या बिलीरुबिन को शरीर से बाहर नहीं निकाल पाता तब पीलिया होता है। ये एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में बिलीरुबिन नामक तत्व की मात्रा बढ़ जाती है। बिलीरुबिन खून में बढ़ने पर स्किन, आंखों का सफेद हिस्सा और नाखूनों का रंग पीला पड़ने लगता है। हेपेटाइटिस A और E से होने वाला पीलिया दूषित पानी और खाने से फैलता है, जबकि B और C संक्रमित खून या सुई से फैल सकते हैं। पीलिया की परेशानी अक्सर बच्चों में ज्यादा देखी जाती है।
पीलिया के लक्षण
- आंखों के सफेद हिस्से और स्किन का रंग पीला पड़ना
- गहरे पीले रंग का पेशाब आना
- हल्के पीले रंग का मल डिस्चार्ज होना
- थकान और कमजोरी होना
भूख नहीं लगना, मतली या उल्टी होना।
पर्याप्त पानी पिएं
पीलिया (Jaundice) के इलाज में दवा और परहेज के साथ-साथ पानी सबसे बड़ा ‘साइलेंट हीलर’ माना जाता है। रिसर्च बताती है कि पर्याप्त पानी पीना न केवल लिवर के बोझ को कम करता है, बल्कि शरीर से जहर (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने का सबसे आसान तरीका है। मेडिकल रिसर्च के अनुसार, बिलीरुबिन का कुछ हिस्सा किडनी के माध्यम से पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकलता है। जब आप पर्याप्त पानी पीते हैं, तो किडनी अधिक कुशलता से काम करती है और खून में जमा इस पीले पिगमेंट को तेजी से बाहर निकालने (Clearance) में मदद करती है। पीलिया की स्थिति में शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी होता है। दिन में कम से कम 7–8 गिलास पानी पीने से लिवर को विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद मिलती है। पर्याप्त पानी पीने से मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है और लिवर पर अतिरिक्त दबाव कम होता है।
कॉफी और ग्रीन टी फायदेमंद हो सकती हैं
कुछ रिसर्च में यह सामने आया है कि सीमित मात्रा में कॉफी और ग्रीन टी लिवर की सेहत के लिए लाभकारी हो सकती हैं। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट लिवर को नुकसान से बचाने और उसकी कार्यक्षमता बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन्हें जरूरत से ज्यादा पीने से बचना चाहिए।
साबुत धनिया का पानी
आयुर्वेद में साबुत धनिया को पाचन और लिवर से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी माना गया है। एक चम्मच साबुत धनिया रात भर पानी में भिगोकर सुबह उसका पानी पीना शरीर को हल्का रखने में मदद कर सकता है।
मूली और मूली के पत्ते खाएं
आयुर्वेद में तो मूली का उपयोग सदियों से हो रहा है, लेकिन अब आधुनिक विज्ञान और रिसर्च भी इसके हेपटोप्रोटेक्टीवे यानी लिवर की रक्षा करने वाले गुणों की पुष्टि करते हैं। मूली और उसके पत्तों को पाचन के लिए अच्छा माना जाता है। ये लिवर पर दबाव कम करने और भूख सुधारने में सहायक हो सकते हैं, जिससे रिकवरी में मदद मिलती है। कई फार्माकोलॉजिकल स्टडीज बताती हैं कि मूली में ‘एंटी-इक्टेरिक’ (Anti-icteric) प्रभाव होता है जो खून की सफाई करता है। Journal of Ethnopharmacology में प्रकाशित शोध के अनुसार, मूली के पत्तों का अर्क लिवर की कोशिकाओं (Hepatocytes) को डैमेज होने से बचाता है। यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है, जो पीलिया के दौरान लिवर में बढ़ जाता है।
गन्ने का रस पिएं
शोध बताते हैं कि गन्ने का रस शरीर में बिलीरुबिन के स्तर को तेजी से कम करने में मदद करता है। यह लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है, जिससे लिवर अतिरिक्त बिलीरुबिन को प्रोसेस करके शरीर से बाहर निकाल पाता है। गन्ने का रस शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और कमजोरी दूर करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा नींबू, संतरा, आंवला और टमाटर जैसे विटामिन-C से भरपूर फल लिवर की रिकवरी में सहायक हो सकते हैं।
त्रिफला का सीमित उपयोग
आयुर्वेद में त्रिफला को पाचन सुधारने वाला माना जाता है। इसे पानी में भिगोकर सीमित मात्रा में लेना शरीर की सफाई प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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