नसों का ब्लॉकेज होना,नसें कमजोर होना, नसों का सख्त होना एक ऐसी परेशानी हो जो खराब डाइट और बिगड़ते लाइफस्टाइल का नतीजा है। जिन लोगों को नसों से जुड़ी ये परेशानी होती है उन्हें दिल के रोगों का खतरा ज्यादा रहता है। नसों से जुड़ी इन परेशानियों को नजरअंदाज करना दिल को खतरे में डालना है। सही खानपान, लाइफस्टाइल में बदलाव और नेचुरल उपाय अपनाकर आप दिल की हालत में सुधार कर सकते हैं। लहसुन एक ऐसा मसाला है जो हर घर के किचन में मौजूद होता है।  

लहसुन का सेवन दिल से जुड़ी परेशानियों का इलाज करने में, बीपी को नॉर्मल करने में और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में बेहद असरदार साबित होता है। कच्चा लहसुन का सेवन सभी परेशानियों का इलाज कर सकता है। हालांकि कच्चा लहसुन खाना हर किसी के बस की बात नहीं है, क्योंकि कच्चा लहसुन में तेज स्वाद, मुंह में जलन, बदबू और कई बार एसिडिटी जैसी समस्याएं होती हैं। इसी वजह से बहुत से लोग लहसुन को नियमित रूप से नहीं खा पाते।

आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक अगर आप कच्चा लहसुन नहीं खा सकते तो आप उसका सेवन फर्मेंट करके करें। फर्मेंटेड लहसुन (Fermented Garlic) का स्वाद हल्का और थोड़ा मीठा हो जाता है। उसकी बदबू कम हो जाती है और उसे खाना आसान हो जाता है। फर्मेंटेड लहसुन एसिडिटी की समस्या से निजात दिलाता है। फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से लहसुन के औषधीय गुण कई गुणा बढ़ जाते हैं। Journal of Agricultural and Food Chemistry के मुताबिक जब लहसुन को फर्मेंट किया जाता है  तो इसके गुण 4 गुना तक बढ़ जाते हैं। आइए जानते हैं कि लहसुन  का सेवन कैसे फायदेमंद होता है और इसे अगर फर्मेंट करके सेवन किया जाए तो सेहत पर कैसा असर होता है।

लहसुन के फायदे

लहसुन के फायदे केवल नसों तक ही सीमित नहीं हैं। यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने, खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाने, अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने, ट्राइग्लिसराइड्स कम करने और खून को पतला रखने में मदद करता है। इससे नसों में थक्का जमने की संभावना कम होती है। इसके अलावा लहसुन इम्यूनिटी बढ़ाने, शरीर में सूजन कम करने, जोड़ों के दर्द और अर्थराइटिस में राहत देने, लिवर को डिटॉक्स करने और फैटी लिवर जैसी समस्या में भी फायदेमंद माना जाता है।

फर्मेंटेड गार्लिक क्या है और इससे कौन-कौन से फायदे होते हैं?

फर्मेंटेड लहसुन एक आसान और टिकाऊ समाधान है। फर्मेंटेशन के दौरान लहसुन के अंदर मौजूद सक्रिय तत्व ज्यादा बायो-एक्टिव हो जाते हैं, जिससे शरीर उन्हें जल्दी और बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है। रिसर्च और अनुभव के आधार पर माना जाता है कि फर्मेंटेड लहसुन कच्चे लहसुन की तुलना में तीन से चार गुना तक अधिक प्रभावी हो सकता है।
फर्मेंटेड लहसुन सेहत को बहुत ज्यादा फायदा पहुंचाता है। ये नसों की सख्ती कम करता है और उन्हें लचीला बनाता है।  नसों में जमा ब्लॉकेज को कम करने में ये लहसुन मदद करता है। इसका सेवन करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है। ये खून को पतला करता है और थक्का जमने का खतरा घटाता है।  कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में ये लहसुन बहुत असरदार साबित होता है। इसका सेवन करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और बीमारियों से बचाव होता है।

फर्मेंटेड लहसुन बनाने का तरीका
आवश्यक सामग्री

  • साबुत लहसुन- 15–16
  • पानी- 1 लीटर
  • नमक- 4 टेबलस्पून
  • एप्पल साइडर विनेगर- 1 टीस्पून
  • ढक्कन वाला कांच का जार

बनाने की विधि

सबसे पहले लहसुन की सभी कलियों को अलग कर अच्छी तरह छील लें और साफ पानी से धो लें। अब एक साफ और सूखे कांच के जार में सारी लहसुन की कलियां डाल दें। इसके बाद 1 लीटर पानी में 4 चम्मच नमक अच्छी तरह घोलकर नमक वाला पानी तैयार करें। इस पानी को जार में इस तरह डालें कि लहसुन पूरी तरह डूब जाए और ऊपर लगभग आधा से एक इंच पानी बचा रहे।

अब इसमें 1 चम्मच सेब का सिरका मिला दें। जार का ढक्कन अच्छी तरह बंद कर दें और इसे कमरे के सामान्य तापमान पर ऐसी जगह रखें, जहां सीधी धूप या बहुत ज्यादा गर्मी न हो। इसके बाद इस जार को 30 से 45 दिनों तक ऐसे ही पड़ा रहने दें।

फर्मेंटेड लहसुन को कैसे स्टोर करें

फर्मेंटेशन के दौरान जार के अंदर गैस बनती है, जो बुलबुलों के रूप में दिखाई देती है। इसलिए हर 2–3 दिन में जार का ढक्कन हल्का सा खोलकर गैस बाहर निकालते रहें। इस प्रक्रिया के दौरान लहसुन का रंग गहरा भूरा या कभी-कभी हल्का बैंगनी भी हो सकता है। यह बिल्कुल सामान्य है और लहसुन के खराब होने का संकेत नहीं है।

सेवन करने का सही तरीका

फर्मेंटेड लहसुन तैयार होने के बाद रोज सुबह खाली पेट 2 से 3 कलियां खाई जा सकती हैं। अगर कोई व्यक्ति पहली बार इसका सेवन कर रहा है, तो शुरुआत में केवल 1 कली से शुरू करना बेहतर होता है। अगर शरीर में किसी तरह की परेशानी न हो, तो धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाई जा सकती है। अधिकतम 3 से 4 कलियों से ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए।

जितना ज्यादा पुराना फर्मेंटेड लहसुन होगा, उतना ही उसका असर बेहतर माना जाता है। 45 दिन के बाद इसे खाना शुरू किया जा सकता है, लेकिन 60 से 90 दिन तक फर्मेंटेड लहसुन और भी ज्यादा प्रभावी और स्वाद में बेहतर हो जाता है।

जरूरी सावधानियां

फर्मेंटेड लहसुन पूरी तरह प्राकृतिक और आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। लेकिन जो लोग पहले से खून पतला करने वाली दवाइयां (Blood Thinners) ले रहे हैं, उन्हें इसका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। इसके अलावा अगर किसी को लहसुन से एलर्जी है या सेवन के बाद कोई असामान्य लक्षण दिखें, तो तुरंत इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

निष्कर्ष

फर्मेंटेड लहसुन नसों की सेहत, ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ के लिए एक प्रभावी घरेलू उपाय हो सकता है। सही तरीके से और नियमित सेवन करने पर यह शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है। हालांकि, यह किसी गंभीर बीमारी का मेडिकल इलाज नहीं है, बल्कि एक सहायक प्राकृतिक उपाय है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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