देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार गिर रहा है। ठंड बढ़ने के साथ लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें से एक आम समस्या पैरों का ठंडा रहना है। सर्द मौसम में शरीर अपना आंतरिक तापमान बनाए रखने के लिए सबसे पहले दिल और दिमाग जैसे जरूरी अंगों तक खून और गर्मी पहुंचाने को प्राथमिकता देता है। इस प्रक्रिया में हाथ-पैर जैसे हिस्सों तक रक्त संचार कम हो जाता है, जिससे पैरों में ठंडक ज्यादा महसूस होती है।
इस प्राकृतिक प्रक्रिया को वेसोकंसट्रिक्शन (Vasoconstriction) कहा जाता है, जिसमें हाथ-पैर जैसे बाहरी अंगों की रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे पैरों में ब्लड फ्लो कम हो जाता है और वे ज्यादा ठंडे होने लगते हैं।अक्सर लोग इस समस्या से बचने के लिए मोज़े पहन लेते हैं, लेकिन कई बार मोज़े पहनने के बाद भी पैर ठंडे रहते हैं, जो परेशान करने वाला हो सकता है। मोजे पहनने के बाद भी पैरों के ठंडे रहने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। आइए जानते हैं इसके संभावित कारण कौन-कौन से हैं।
मोज़े पहनने के बाद भी पैर ठंडे रहने के कारण
खराब ब्लड सर्कुलेशन (Poor Blood Circulation)
खराब ब्लड सर्कुलेशन ठंडे पैरों का सबसे आम वैज्ञानिक कारण है। जब हृदय (Heart) पर्याप्त तेजी से या सही दबाव के साथ शरीर के दूरस्थ हिस्सों जैसे पैर की उंगलियों तक खून नहीं पहुंचा पाता, तो पैर ठंडे पड़ जाते हैं। पैरों के ठंडे रहने के लिए परिफेरल आर्टरी डिजीज, डायबिटीज या रेनॉड्स फेनोमेनन जैसी बीमारियों में रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे पैरों तक खून कम पहुंचता है और पैर ठंड महसूस होते हैं।
नसों को नुकसान
लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से पैरों की नसें (Nerves) क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, इसे ‘पेरिफेरल न्यूरोपैथी’ कहते हैं। इसमें वास्तव में पैर ठंडे नहीं होते, बल्कि क्षतिग्रस्त नसों के कारण दिमाग को ठंडक या सुन्नता का गलत सिग्नल मिलता है। यही वजह है कि मोजे या हीटर भी इस स्थिति में गर्माहट का एहसास नहीं करा पाते। इस बीमारी से शरीर के तापमान का सही अहसास नहीं हो पाता और मोज़े पहनने के बावजूद पैर ठंडे लगती हैं।
आयरन की कमी या एनीमिया
खून की कमी और ठंडे पैरों के बीच सीधा गहरा संबंध है। हमारे रेड ब्लड सेल्स (RBCs) में मौजूद हीमोग्लोबिन ही शरीर के हर अंग तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। जब शरीर में आयरन कम होता है तो हीमोग्लोबिन कम बनता है और अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। Journal of Clinical Medicine’ के शोध के अनुसार, एनीमिया के मरीजों में हाथ-पैर ठंडे रहना सबसे प्राथमिक लक्षणों में से एक है।
पैरों में नमी या पसीना आना
पैरों में पसीना या नमी होने से मोज़े गीले हो जाते हैं, जिससे गर्मी जल्दी निकल जाती है और पैर ज्यादा ठंडे लगते हैं। खासकर कॉटन मोज़े पसीना सोख तो लेते हैं, लेकिन उसे बाहर नहीं निकालते। नमी ठंडी होकर पैरों से गर्मी खींच लेती है, जिससे पैर नम और ठंडे महसूस होते हैं।
शरीर का तापमान संतुलन
सर्दियों में शरीर सबसे पहले अपने कोर को गर्म रखने की कोशिश करता है। इस वजह से हाथ-पैरों की ओर खून का प्रवाह कम हो जाता है और पैर ठंडे रहने लगते हैं।
जूतों और मोजों की समस्या
बहुत टाइट जूते या ऐसे जूते जो सांस नहीं लेने देते, ब्लड सर्कुलेशन को रोक सकते हैं। साथ ही ये ठंडी सतहों से बचाव भी नहीं कर पाते। अगर मोज़े बहुत पतले या हल्के हैं, तो वे पर्याप्त गर्मी नहीं दे पाते। ठंड में ऊनी या थर्मल मोज़े पहनना ज्यादा फायदेमंद होता है।
लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें
शारीरिक गतिविधि की कमी, स्मोकिंग और खराब खानपान भी ब्लड सर्कुलेशन और शरीर के तापमान नियंत्रण को प्रभावित करते हैं, जिससे पैर ठंडे रहते हैं।
अन्य स्वास्थ्य समस्याएं
हाइपोथायरायडिज्म और एनीमिया जैसी बीमारियां भी ब्लड फ्लो को प्रभावित करती हैं, जिससे पैर सामान्य से ज्यादा ठंडे महसूस हो सकते हैं।
पैरों को ठंड से बचाने और मैनेज करने के आसान टिप्स
- अच्छी क्वालिटी के ऊनी या थर्मल मोज़े पहनें। ऊन खासतौर पर फायदेमंद होता है, क्योंकि नमी होने पर भी यह गर्मी बनाए रखता है।
- जरूरत पड़ने पर दो जोड़ी मोज़े पहन सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि ऊपर वाला मोज़ा बहुत टाइट न हो, ताकि ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित न हो।
- अगर मोज़े पसीने या नमी से गीले हो जाएं, तो तुरंत बदल लें। नमी को सोखने वाले मोज़ों का इस्तेमाल करें।
- कुछ देर के लिए गुनगुने पानी में पैर डालें या हीटिंग पैड का इस्तेमाल करें। ध्यान रखें कि ज्यादा गर्म न हो, ताकि जलने का खतरा न रहे।
- पैरों की उंगलियां हिलाना, हल्की वॉक करना या पैरों की स्ट्रेचिंग करना ब्लड फ्लो बढ़ाने में मदद करता है।
- ऐसे जूते चुनें जो सही फिट हों, गर्मी दें और हवा के आने-जाने की जगह भी छोड़ें। बहुत टाइट जूतों से बचें।
- घर को ठंड और ठंडी हवा से बचाएं। घर के अंदर स्लीपर या गर्म हाउस शूज़ पहनना फायदेमंद होता है।
- नियमित शारीरिक गतिविधि से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे हाथ-पैर ज्यादा गर्म रहते हैं।
- अगर पैरों के ठंडे रहने की समस्या लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ अन्य लक्षण भी दिखें, तो किसी डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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