थकान और कमजोरी को अक्सर हम काम का तनाव मानकर टाल देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस कमजोरी और थकान के जरिए आपका शरीर आपको अंदरूनी ‘बर्बादी’ का संकेत दे रहा हो सकता है। विटामिन B12 हमारे शरीर की नसों (Nervous System) और लाल रक्त कोशिकाओं के लिए ईंधन का काम करता है। जब इसकी कमी होती है, तो सबसे पहले लक्षण हमारे हाथ और पैरों में महसूस होते हैं। डॉक्टर अक्सर इसे एक ‘साइलेंट डेफिशियेंसी’ कहते हैं क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं। अगर समय रहते इन 5 संकेतों को नहीं पहचाना गया, तो नसों को होने वाला नुकसान स्थायी (Permanent) हो सकता है।
गैस्ट्रो लीवर हॉस्पिटल स्वरूप नगर, कानपुर में गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉक्टर वीके मिश्रा के मुताबिक विटामिन B12 हमारे शरीर, खासतौर पर नर्वस सिस्टम और रेड ब्लड सेल्स के लिए बेहद जरूरी है। इसकी कमी धीरे-धीरे गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि बॉडी में विटामिन बी 12 की कमी होने पर हाथ-पैरों में कौन-कौन से लक्षण दिखते हैं।
लगातार थकान महसूस होना (Constant Fatigue)
Mayo Clinic और National Institutes of Health के अनुसार विटामिन B12 की कमी से शरीर में रेड ब्लड सेल्स ठीक से नहीं बन पाते और इस कारण शरीर की ऑक्सीजन कैरिंग कैपेसिटी कम हो जाती है, जिससे व्यक्ति को बिना ज्यादा मेहनत किए भी लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस होती है। आपको बता दें कि रेड ब्लड सेल्स का मुख्य काम फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के अंगों तक पहुंचाना है।
हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन (Tingling & Numbness)
विटामिन B12 की कमी में शरीर मायलिन शीथ यानी नर्व को कवर करने वाली परत ठीक से नहीं बना पाता। इसका नतीजा यह होता है कि हाथों और पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या सुई चुभने जैसा एहसास होने लगता है। journal of Neurological Sciences के अनुसार, विटामिन B12 ‘माइलिनेशन’ की प्रक्रिया के लिए एक अनिवार्य को-फैक्टर है। मायलिन एक फैटी सुरक्षात्मक परत है जो हमारी नसों के चारों ओर लिपटी होती है। यह बिजली के तारों पर लगे इंसुलेशन (प्लास्टिक कवर) की तरह काम करती है। यह नसों के संकेतों को तेजी से और सही जगह पहुंचाने में मदद करती है।
डिप्रेशन और मूड में बदलाव (Depression & Mood Changes)
विटामिन B12 न्यूरोट्रांसमीटर के सिंथेसिस में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर व्यक्ति को उदासी, चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। PubMed Central और American Journal of Psychiatry के अनुसार विटामिन B12 सेरोटोनिन (Serotonin) और डोपामाइन (Dopamine) जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के संश्लेषण (Synthesis) में एक महत्वपूर्ण ‘को-फैक्टर’ है। जब B12 कम होता है, तो मस्तिष्क में इन ‘हैप्पी रसायनों’ का उत्पादन घट जाता है, जिससे व्यक्ति बिना किसी बाहरी कारण के उदास (Low mood) रहने लगता है।
बैलेंस और कोऑर्डिनेशन की होती है समस्या (Balance & Coordination Problems)
B12 की कमी से नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है, जिससे चलते समय लड़खड़ाना, चक्कर आना, शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। British Medical Journal के अनुसार विटामिन B12 की कमी रीढ़ की हड्डी के पोस्टीरियर कॉलम को प्रभावित करती है। जब B12 की कमी से यहां की नसों का सुरक्षा कवच (Myelin) नष्ट हो जाता है तो मस्तिष्क को पैरों की सही स्थिति का पता नहीं चलता।
भूलने की आदत और ब्रेन फॉग (Forgetfulness & Brain Fog)
भूलने की समस्या, ध्यान न लगना और दिमाग का भारी या कन्फ्यूजन रहना विटामिन B12 की कमी का एक बड़ा और गंभीर संकेत माना जाता है। लंबे समय तक कमी रहने पर मेमोरी पर असर पड़ सकता है।
विटामिन बी 12 की कमी की भरपाई कैसे करें
विटामिन B12 की कमी को दूर करने के लिए डाइट और मेडिकल सप्लीमेंट्स का सेवन किया जा सकता है। ये विटामिन एनिमल फूड्स जैसे अंडे, दूध, दही और पनीर में भरपूर होता है। मांसाहारी लोग मछली और लिवर का सेवन करके इसकी भरपाई कर सकते हैं। शाकाहारी लोग फोर्टिफाइड अनाज और न्यूट्रिशनल यीस्ट (Nutritional Yeast) को डाइट में शामिल कर सकते हैं। अगर कमी गंभीर है और नसों में झनझनाहट जैसे लक्षण ज्यादा हो रहे हैं तो आप तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
निष्कर्ष
अगर आपको इनमें से एक या एक से ज्यादा लक्षण लगातार महसूस हो रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय रहते जांच और सही इलाज से विटामिन B12 की कमी को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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