जिंदगी की कितनी भी मसरूफियत हो लोग मोबाइल देखने के लिए हर हाल में घंटा दो घंटा निकाल ही लेते हैं। कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो बिस्तर से उठते ही सीधा मोबाइल पकड़ते हैं। मोबाइल और गैजेट्स का ज्यादा इस्तेमाल आंखों की सेहत के लिए खतरा साबित हो रहा है। लोग बिना चश्मा लगाएं घंटों मोबाइल की रील पलटते रहते हैं, उन्हें अहसास ही नहीं होता कि उनका मोबाइल से ये लगाव उनकी आंखों की रोशनी कम कर रहा है। एक्सपर्ट के मुताबिक लगातार मोबाइल का स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, थकान, सूखापन और नजर कमजोर होने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

यूनानी चिकित्सा पद्धति के जाने-माने चिकित्सक और हेल्थ एक्सपर्ट हकीम सुलेमानी जो वर्षों से पारंपरिक यूनानी और घरेलू नुस्खों के माध्यम से लोगों की सेहत से जुड़ी समस्याओं के समाधान बताते आ रहे हैं, ने बताया अगर आपकी आंखों की रोशनी कम हो रही है तो आप कुछ घरेलू नुस्खों को अपना सकते हैं। कुछ नुस्खे ऐसे हैं जो आपकी आंखों की कमजोरी को दूर करेंगे, आंखों को ताकत देंगे और आंखों की गिरती रोशनी को थामे रखेंगे। हकीम सुलेमान ने बताया आंखों की रोशनी सुधारने के लिए सबसे पहले आंखों को पोषण देना जरूरी है। जब आंखें मजबूत होती हैं, तभी चश्मे का नंबर कम होने की संभावना बनती है। आइए जानते हैं कि आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए हकीम सुलेमानी ने कौन-कौन से देसी नुस्खे बताएं है।

गाजर का जूस आंखों के लिए है जरूरी

हकीम सुलेमान के अनुसार अगर आप आंखों की रोशनी बढ़ाना चाहते हैं तो आप रोज एक गिलास गाजर का जूस पिएं।  गाजर में मौजूद विटामिन A और बीटा-कैरोटीन आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करते हैं और आंखों की कमजोरी को धीरे-धीरे कम कर सकते हैं। गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन और ल्यूटीन जैसे तत्व सीधे तौर पर आंखों के रेटिना और कॉर्निया की हिफाजत करते हैं।

Journal of Ophthalmology और NIH (National Institutes of Health) द्वारा की गई एक रिसर्च के मुताबिक गाजर में भरपूर मात्रा में बीटा-कैरोटीन होता है जिसे हमारा शरीर विटामिन-A में बदल देता है। विटामिन-A आंखों में रोडोप्सिन (Rhodopsin) नामक प्रोटीन बनाने में मदद करता है। रोडोप्सिन वो पिगमेंट है जो हमें कम रोशनी या अंधेरे में भी देखने में मदद करता है। बॉडी में इसकी कमी होने से रतौंधी नामक आंखों का रोग हो जाता है। 2019 के एक क्लिनिकल रिव्यू में पाया गया कि गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन का लगातार इस्तेमाल करने से आंखों की बाहरी सतह को लुब्रिकेटेड और हेल्दी रखता है।

सौंफ और गोंद कतीरा से बढ़ाएं आंखों की रोशनी

गाजर सीजनल हो तो बहुत बढ़िया है लेकिन आप गाजर के ऑफ सीजन में सौंफ और गोंद कतीरा का भी सेवन कर सकते हैं। हकीम सुलेमान सौंफ को गोंद कतीरा के साथ लेने की सलाह देते हैं क्योंकि यह नसों को पोषण देता है। बात करें सौंफ की तो, Journal of Dietary Supplements (2018-20) और Ophthalmology की पुरानी रिपोर्ट्स के आधुनिक विश्लेषण के मुताबिक सौंफ में विटामिन A और विटामिन C प्रचुर मात्रा में होता है। सौंफ में एनेथोल (Anethole) नामक एक खास कंपाउंड होता है। 2020 की एक लैब स्टडी के अनुसार ये आंखों के अंदर के दबाव को कंट्रोल करने में मदद करता है। इस दबाव के बढ़ने से ही ग्लूकोमा यानि काला मोतिया बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है। सौंफ एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होती है जो रेटिना की सूजन को कंट्रोल करते है और विजन को क्लियर करते हैं।

सौंफ के साथ गोंद कतीरा का सेवन आंखों के लिए डबल डोज है। Phytotherapy Research जिसे 2022-23 में अपडेट किया गया है, बताया है कि गोंद कतीरा सीधे तरीके से आंखों का नंबर कम नहीं कर सकता लेकिन ये आंखों की हिफाजत करता है। आयुर्वेद के मुताबिक बॉडी में ‘पित्त’ या गर्मी (Oxidative Heat) ज्यादा बढ़ने से आंखों की महीन नसें ड्राई होने लगती है जिससे आंखों में ड्राइनेस बढ़ती है, आंखों से धुंधला दिखाई देता है। ऐसे में गोंद कतीरा नेचुरल कूलेंट का काम करता है। रिसर्च बताती हैं कि गोंद कतीरा बॉडी के तापमान को कंट्रोल कर आंखों में लुब्रिकेशन को बढ़ाता है। इसका सेवन करने से आंखों में होने वाली रेडनेस और जलन से राहत मिलती है और आंखों से धुंधला दिखाई देना बंद होता है।

गोंद कतीरा और सौंफ का सेवन कैसे करें

आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए आप 3–4 चम्मच सौंफ को पानी में उबाल लें। कुछ देर पकाने के बाद पानी को ठंडा कर लें और उसमें थोड़ा सा रात भर भीगा हुआ गोंद कतीरा मिक्स कर लें।  दोनों चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें और इस पानी को रोज सुबह पिएं। आप ये पानी अपने बच्चों को भी आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए पिला सकते हैं।  इस पानी को रोज पीने से आंखों की ड्राईनेस कंट्रोल रहेगी, थकान कम होगी और आंखों की जलन से भी राहत मिलेगी।

आंखों को हेल्दी रखने के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान

  • अगर चाहते हैं कि आपकी आंखों की रोशनी बरकरार रहे तो आप मोबाइल और टीवी देखने का समय सीमित रखें।
  • बच्चों के लिए पढ़ते समय पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करें।
  • आंखों को बार-बार मलने से बचें, ऐसा करने से आंखों में लाली और जलन बढ़ सकती है।
  • आंखों के लिए डाइट भी बहुत अहम है। डाइट में हरी सब्ज़ियां और फलों का रोज़ सेवन करें।

डॉक्टर की सलाह

6 महीने में एक बार आंखों के डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
अगर बच्चे को लगातार आंखों में परेशानी हो रही है या उन्हें सिरदर्द रहता है तो तुरंत उनकी आंखों को टेस्ट कराएं।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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