यूरिक एसिड प्यूरीन मेटाबोलिज्म का एक नेचुरल अपशिष्ट पदार्थ है। प्यूरीन एक ऐसा तत्व है जो हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से बनता है और कुछ खाद्य पदार्थों से भी मिलता है। जब प्यूरीन टूटता है तो यूरिक एसिड बनता है, जिसे शरीर सामान्य स्थिति में यूरिन के ज़रिये बाहर निकाल देता है। लेकिन जब प्यूरीन युक्त डाइट का अधिक सेवन किया जाता है तो शरीर यूरिक एसिड को पूरी तरह बाहर नहीं निकाल पाता और इसका स्तर खून में बढ़ने लगता है। प्यूरीन हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से भी बनता है और कुछ फूड्स जैसे रेड मीट, ऑर्गन मीट, सी-फूड और शराब से भी मिलता है। जब प्यूरीन टूटता है तो उसके मेटाबोलिज्म के दौरान यूरिक एसिड बनता है। किडनी इस यूरिक एसिड को खून से छानकर यूरिन के ज़रिये शरीर से बाहर निकाल देती है। इस प्रक्रिया से शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बैलेंस रहता है।
कुछ फूड्स ऐसे हैं जो तेजी से यूरिक एसिड का स्तर बढ़ाते हैं। कुछ खाद्य पदार्थों में प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है, जिसका ज्यादा सेवन यूरिक एसिड को बढ़ा सकता है। इन फूड्स में रेड मीट और ऑर्गन मीट, सी-फूड्स, बीयर और अल्कोहल, हाई प्रोटीन और प्रोसेस्ड फूड शामिल हैं। इसके अलावा मोटापा, डिहाइड्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और कुछ दवाएं भी यूरिक एसिड बढ़ने की वजह बन सकती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जब ब्लड में यूरिक एसिड का स्तर 6.8 mg/dL से ऊपर चला जाता है, तो यह तरल अवस्था से ठोस क्रिस्टल बनने लगता है।
हाई यूरिक एसिड के लक्षण जो बिल्कुल न करें नजरअंदाज
जब ब्लड में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है, तो शरीर इसके संकेत देने लगता है। इसके आम लक्षण हैं है जोड़ों में तेज दर्द, खासतौर पर पैर के बड़े अंगूठे में, जोड़ों में सूजन और रेडनेस, उठने-बैठने में परेशानी होना, जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमना, बार-बार गठिया का अटैक होना, कब्ज, थकान और कमजोरी होना, स्किन का ड्राई होना शामिल है।
एक्सपर्ट की राय और रिसर्च क्या कहती है?
केयर हॉस्पिटल, बंजारा हिल्स, हैदराबाद की क्लिनिकल डायटीशियन और कंसल्टेंट डॉ. जी. सुषमा के अनुसार यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर हाइपरयूरिसीमिया की स्थिति पैदा कर सकता है, जिससे जोड़ों में यूरेट क्रिस्टल जमने लगते हैं। यही आगे चलकर गठिया और अन्य समस्याओं की वजह बनते हैं। यूरिक एसिड और आहार के बीच के संबंध को प्रमाणित करने वाली एक महत्वपूर्ण रिसर्च ‘The New England Journal of Medicine’ (NEJM) में वर्ष 2004 में प्रकाशित हुई थी, जिसे 2012 के अपडेटेड डेटा के साथ और अधिक पुख्ता किया गया।
Health Professionals Follow-up Study के नाम से मशहूर इस रिसर्च में 47,150 पुरुषों पर लगातार 12 वर्षों तक अध्ययन किया गया। इस शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि जो पुरुष अपनी डाइट में प्यूरीन की अधिक मात्रा जैसे रेड मीट और सीफूड का सेवन करते हैं, उनमें यूरिक एसिड बढ़ने और गाउट होने का खतरा दूसरों की तुलना में 41% अधिक पाया गया। वहीं, इसी शोध के विश्लेषण में यह भी सामने आया कि विटामिन-C का नियमित सेवन किडनी के माध्यम से यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे जोड़ों में दर्दनाक क्रिस्टल बनने की संभावना कम हो जाती है।
देसी नुस्खा आंवला जो दवा की तरह करता है काम
यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए आंवला एक बेहद असरदार आयुर्वेदिक उपाय माना जाता है। बदलते मौसम में जिन लोगों का यूरिक एसिड बढ़ जाता है, उनके लिए आंवला किसी औषधि से कम नहीं।
आंवला कैसे करता है यूरिक एसिड कंट्रोल?
आंवला को साबुत फल, जूस या पाउडर के रूप में लिया जा सकता है। इसमें मौजूद भरपूर मात्रा में विटामिन C किडनी के जरिये यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद करता है। इससे खून में यूरिक एसिड का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। आंवला में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों की सूजन और दर्द को कम करने में मददगार होते हैं।
आंवला में छिपा है सेहत का खजाना
आंवला में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण ये सभी तत्व मिलकर यूरिक एसिड को कंट्रोल करने और किडनी को हेल्दी रखने में मदद करते हैं। Journal of Ethnopharmacology और Evidence Based Complementary and Alternative Medicine में प्रकाशित रिसर्च जो 2011 और 2022 में हुई इसके निष्कर्ष प्रकाशित हुए। ये शोध मुख्य रूप से प्रयोगशाला में चूहों पर किया गया। चूहों में पोटैशियम ओक्सोनेट के जरिए कृत्रिम रूप से यूरिक एसिड बढ़ाया गया (Hyperuricemia)। इसके बाद उन्हें आंवले का अर्क दिया गया। आंवला किडनी के फिल्टरेशन रेट को सुधारता है। इससे रक्त में जमा यूरिक एसिड पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकल जाता है।
आंवला खाने के जबरदस्त फायदे
आंवला का सेवन करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और मौसमी बीमारियों से बचाव होता है। आंवला पाचन सुधारता है, कब्ज, गैस और एसिडिटी में राहत देता है। ये हर्ब शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करता है। ये जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करता है, गाउट के खतरे को कम करता है। ये हर्ब मेटाबॉलिज्म बूस्ट कर वजन कंट्रोल करने में मदद करता है। डायबिटीज मरीज ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने के लिए रोज आंवला खा सकते हैं। आंवला का सेवन हड्डियों को मजबूत बनाता है साथ ही किडनी की सफाई करने में असरदार साबित होता है।
निष्कर्ष
अगर यूरिक एसिड को समय रहते कंट्रोल न किया जाए, तो यह गठिया और जोड़ों की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। सही डाइट, पर्याप्त पानी और आंवला जैसे देसी उपाय अपनाकर यूरिक एसिड को नेचुरल तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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