आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। सुबह अलार्म की आवाज से लेकर रात को मोबाइल स्क्रीन पर आंख बंद होने तक दिमाग किसी न किसी चिंता में उलझा रहता है। काम का दबाव, बढ़ती महंगाई, रिश्तों की उलझन, बच्चों का भविष्य और सोशल मीडिया पर खुद को बेहतर दिखाने की होड़ इंसान को मानसिक रूप से थका देती है। कई लोग मानते हैं कि तनाव सिर्फ दिमाग तक सीमित होता है, लेकिन हकीकत यह है कि इसका सीधा असर दिल की सेहत पर भी पड़ता है। यही वजह है कि आजकल कम उम्र में हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

तनाव और दिल के बीच क्या है रिश्ता?

Paras Health, Gurugram के Associate Director (Cardiology) डॉ. विकास गोयल के अनुसार, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है तो शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं। ये हार्मोन दिल की धड़कन को तेज कर देते हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं। अगर यह स्थिति कुछ समय के लिए हो तो शरीर संभाल लेता है, लेकिन जब तनाव लगातार बना रहता है तो दिल की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। धीरे-धीरे यही दबाव हार्ट डिजीज और हार्ट फेलियर की वजह बन सकता है।

अचानक तनाव भी बन सकता है जानलेवा

सिर्फ लंबे समय का तनाव ही नहीं, बल्कि अचानक आया गहरा सदमा भी दिल को नुकसान पहुंचा सकता है। किसी अपने की मौत, एक्सीडेंट, नौकरी छूटना या कोई बड़ा मानसिक झटका कुछ लोगों में अचानक हार्ट फेलियर जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। मेडिकल भाषा में इसे Stress-Induced Cardiomyopathy या Broken Heart Syndrome कहा जाता है। इस स्थिति में दिल की पंपिंग क्षमता अचानक कमजोर हो जाती है और मरीज को हार्ट फेलियर जैसे लक्षण महसूस होने लगते हैं।

किन लोगों को रहता है ज्यादा खतरा?

हर इंसान पर तनाव का असर अलग-अलग होता है, लेकिन कुछ लोग इसके प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। डॉ. विकास गोयल बताते हैं कि जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या दिल से जुड़ी कोई बीमारी है, उनमें तनाव का असर ज्यादा खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा धूम्रपान, शराब का सेवन, नींद की कमी और फिजिकल एक्टिविटी का अभाव भी दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ा देता है।

शुरुआती लक्षण

तनाव के दौरान या बाद में दिखने वाले लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अगर आपको सीने में दर्द, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, चक्कर आना, ज्यादा पसीना आना या अचानक बहुत ज्यादा थकान महसूस हो, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। डॉ. गोयल के अनुसार, ऐसे लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि समय पर इलाज से जान बचाई जा सकती है।

तनाव कम करने के उपाय

दिल को स्वस्थ रखने के लिए तनाव को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। इसके लिए रोजाना योग, ध्यान और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। नियमित वॉक या हल्की एक्सरसाइज, पूरी नींद और संतुलित खानपान भी तनाव कम करने में मदद करता है। परिवार और दोस्तों से खुलकर बात करना, मोबाइल और सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी बनाना और जरूरत पड़ने पर मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना भी फायदेमंद होता है।

निष्कर्ष

तनाव को हल्के में लेना दिल की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। हर तनाव हार्ट फेलियर की वजह नहीं बनता, लेकिन लंबे समय तक बना रहने वाला या बहुत ज्यादा तनाव दिल की गंभीर बीमारियों का खतरा जरूर बढ़ा देता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखें।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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