आज के समय में ब्लड शुगर की समस्या केवल डायबिटीज मरीजों तक सीमित नहीं रह गई है। गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या, तनाव और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण कई लोगों में शुगर लेवल बार-बार ऊपर-नीचे होता रहता है। ऐसे में लोग दवाइयों और सप्लीमेंट्स का सहारा लेने लगते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर शुगर लेवल को नेचुरल तरीके से स्थिर रखा जाए, तो लंबे समय में डायबिटीज और दूसरी बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) के मुताबिक, सही डाइट, फिजिकल एक्टिविटी और हेल्दी आदतों से ब्लड शुगर को नेचुरली कंट्रोल किया जा सकता है। इसी विषय पर न्यूट्रिशनिस्ट नेहा सिन्हा और जनरल फिजिशियन डॉ. श्री करण उद्देश तनुगुला ने कुछ जरूरी बातें बताई हैं, जिनके बारे में यहां विस्तार से जानिए।

इंटरमिटेंट फास्टिंग

डॉ. श्री करण उद्देश तनुगुला के अनुसार, डॉक्टर की सलाह से 12 से 16 घंटे की इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाई जा सकती है। जैसे कि सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक भोजन करना। इससे शरीर को इंसुलिन को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में मदद मिलती है और फैट मेटाबॉलिज्म भी तेज होता है। हालांकि, डायबिटीज मरीज या किसी अन्य बीमारी से ग्रस्त लोग इसे अपनाने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

हर्बल सपोर्ट

करेला, मेथी के दाने और दालचीनी जैसे कुछ हर्बल उपाय ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। डॉ. तनुगुला बताते हैं कि आधा चम्मच दालचीनी रोज चाय में लेने से खाने के बाद होने वाले शुगर स्पाइक कम हो सकते हैं। ये चीजें इंसुलिन के स्राव को बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती हैं, लेकिन इन्हें भी एक्सपर्ट की सलाह से ही डाइट में शामिल करना चाहिए।

समय पर भोजन करना

न्यूट्रिशनिस्ट नेहा सिन्हा के मुताबिक, समय पर खाना ब्लड शुगर को स्थिर रखने का सबसे आसान तरीका है। अगर रोज एक ही समय पर खाना खाया जाए, तो शरीर को इंसुलिन रिलीज करने में आसानी होती है। इससे अचानक शुगर बढ़ने की समस्या नहीं होती और अनहेल्दी क्रेविंग भी कम हो जाती है। देर से या अनियमित समय पर खाना शुगर लेवल को बिगाड़ सकता है।

डाइटरी फाइबर

ब्लड शुगर को बैलेंस रखने के लिए डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ाना बेहद जरूरी है। फाइबर शुगर के एब्जॉर्प्शन की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे शुगर धीरे-धीरे ब्लड में जाती है। इससे डाइजेशन बेहतर रहता है, पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है और शुगर लेवल स्थिर बना रहता है। साबुत अनाज, सब्जियां, फल और दालें फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।

प्रोटीन इंटेक

प्रोटीन न सिर्फ मसल्स को मजबूत बनाता है, बल्कि ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद करता है। नेहा सिन्हा बताती हैं कि प्रोटीन युक्त भोजन से खाने के बाद शुगर स्पाइक की समस्या कम होती है। अंडे, दालें, पनीर, दही, नट्स और बीजों को डाइट में शामिल किया जा सकता है।

पोर्शन साइज पर रखें नियंत्रण

ज्यादा मात्रा में खाना खाने से ब्लड में ग्लूकोज तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए पोर्शन कंट्रोल बहुत जरूरी है। सीमित मात्रा में और संतुलित भोजन करने से इंसुलिन पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।

लो ग्लाइसेमिक फूड्स को बनाएं डाइट का हिस्सा

अगर आप ब्लड शुगर को नेचुरली कंट्रोल करना चाहते हैं, तो लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स को अपनी डाइट में शामिल करें। ये फूड्स धीरे-धीरे शुगर रिलीज करते हैं, जिससे एनर्जी लेवल बना रहता है और अचानक शुगर स्पाइक नहीं होता। जैसे – ओट्स, ब्राउन राइस, हरी सब्जियां, फल आदि।

निष्कर्ष

संतुलित डाइट, समय पर भोजन, नियमित एक्सरसाइज और एक्सपर्ट की सलाह से अपनाए गए नेचुरल उपाय शुगर लेवल को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आप न सिर्फ डायबिटीज, बल्कि कई दूसरी बीमारियों से भी खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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