Eye Health Tips: आंखें हमारे शरीर का बेहद अहम हिस्सा हैं। इनके बिना न तो हम दुनिया को देख सकते हैं और न ही रोजमर्रा के काम ठीक से कर पाते हैं। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मोबाइल, टीवी, लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल, गलत खानपान और नींद की कमी आंखों की सेहत पर सीधा असर डाल रही है। यही वजह है कि आजकल कम उम्र में ही आंखों में जलन, थकान, धुंधलापन और रोशनी कमजोर होने जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। आयुर्वेद मानता है कि आंखें सिर्फ देखने का जरिया नहीं, बल्कि हमारे तेज, बुद्धि और संपूर्ण स्वास्थ्य का भी संकेत होती हैं। इसलिए आंखों की देखभाल बेहद जरूरी है। आयुर्वेद में आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, जो बिना साइड इफेक्ट के लाभ पहुंचाते हैं। तो चलिए हरियाणा के सिरसा में स्थित रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से जानते हैं आंखों को स्वस्थ रखने के आयुर्वेदिक उपाय के बारे में।

आंखों की समस्या क्यों बढ़ रही है?

आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार आज के समय में आंखों की दिक्कतों के पीछे सबसे बड़ा कारण बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल है। देर रात तक जागना, घंटों स्क्रीन देखना, पानी कम पीना और जंक फूड का ज्यादा सेवन आंखों को कमजोर बना देता है। आयुर्वेद के मुताबिक शरीर में पित्त दोष बढ़ने से आंखों में जलन, लालिमा, सूखापन, दर्द और थकान जैसी परेशानियां होती हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक उपाय पित्त को संतुलित करके आंखों को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

आंखों को स्वस्थ रखने के उपाय

नस्य

नस्य पंचकर्म की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें औषधीय तेल या घी को नाक के जरिए डाला जाता है। आयुर्वेद के अनुसार नाक को सिर का द्वार माना गया है। नियमित नस्य करने से आंखों की थकान कम होती है, रोशनी तेज होती है और ड्राई आई जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। इसके अलावा यह सिरदर्द और मानसिक तनाव को भी कम करने में सहायक है। हालांकि नस्य हमेशा किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह से ही कराना चाहिए।

नेत्र सेक

नेत्र सेक आंखों को आराम देने का एक आसान और असरदार उपाय है। इसमें जड़ी-बूटियों से तैयार काढ़े को हल्की धार में आंखों पर डाला जाता है। यह प्रक्रिया आंखों को ठंडक देती है और पित्त दोष को शांत करती है। जिन लोगों को आंखों में जलन, लालिमा या ज्यादा थकान महसूस होती है, उनके लिए नेत्र सेक काफी लाभकारी माना जाता है। इससे आंखें तरोताजा महसूस करती हैं और नजर साफ होती है।

अंजन

आयुर्वेद में अंजन यानी औषधीय काजल का खास महत्व है। अंजन लगाने से आंखों की सफाई होती है और कफ दोष दूर होता है। इससे आंखों की रोशनी में सुधार आता है और आंखें चमकदार बनती हैं। लेकिन ध्यान रखें कि बाजार में मिलने वाला केमिकल युक्त काजल नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए आयुर्वेदिक अंजन का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करें।

बिदालक

बिदालक एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, जिसमें औषधीय लेप को आंखों के चारों ओर लगाया जाता है, जबकि आंखें बंद रहती हैं। यह उपाय आंखों की सूजन, जलन और दर्द को कम करने में काफी असरदार होता है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से थकी आंखों को बिदालक से काफी आराम मिलता है और आंखों को ठंडक महसूस होती है।

नेत्र स्नान

आयुर्वेद में आंखों की नियमित सफाई पर खास जोर दिया गया है। सुबह उठकर ठंडे पानी या त्रिफला मिले पानी से आंखों को धोना बहुत फायदेमंद माना जाता है। इससे आंखों में जमा धूल-मिट्टी साफ होती है, ताजगी बनी रहती है और इंफेक्शन का खतरा कम होता है।

पर्याप्त पानी पीना

शरीर में पानी की कमी का असर सबसे पहले आंखों पर दिखता है। आंखों में सूखापन और जलन होने लगती है। आयुर्वेद के अनुसार रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से पित्त संतुलित रहता है और आंखों के टिश्यू को सही पोषण मिलता है। दिनभर में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना आंखों की सेहत के लिए बहुत जरूरी है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद में बताए गए इन उपायों को अगर सही तरीके से और नियमित रूप से अपनाया जाए, तो आंखों की रोशनी लंबे समय तक तेज और आंखें स्वस्थ बनी रह सकती हैं। बदलती लाइफस्टाइल में आंखों की अनदेखी करना भारी पड़ सकता है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

गुहेरी के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। शुरुआत में आंख की पलक पर हल्की लालिमा और सूजन दिखाई देती है। इसके बाद दर्द, जलन, आंखों में भारीपन और कभी-कभी पानी आने की शिकायत हो सकती है। पूरी जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें।