भारत की पाक-संस्कृति की जड़ें आयुर्वेद में गहराई से जुड़ी हुई हैं। हमारी रसोई सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बल्कि सेहत बढ़ाने के लिए भी जिम्मेदार है। हमारे किचन में ऐसे मसाले और जड़ी बूटियां मौजूद हैं जो न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाती हैं बल्कि कई बीमारियों का इलाज भी करती हैं।  ये मसाले न सिर्फ खुशबूदार होते हैं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं, जो शरीर को मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। ऐसी ही एक भारतीय औषधीय जड़ी-बूटी है अश्वगंधा जो औषधीय गुणों से भरपूर होती है। ये एक ऐसी जड़ी बूटी है जो हमारी बॉडी पर टॉनिक की तरह काम करती है। ये शरीर और मन दोनों को बैलेंस करती है। इसका सेवन करने से एनर्जी बूस्ट होती है और उम्र में इजाफा होता है।

अश्वगंधा की अहमियत को पहचानते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अश्वगंधा की कई बार चर्चा कर चुके हैं। WHO के दूसरे ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन को संबोधित करते हुए मोदी ने बताया अश्वगंधा का इस्तेमाल भारत में सदियों से होता आ रहा है, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान इसकी वैश्विक मांग में तेज़ी से वृद्धि हुई। मोदी ने समिट में अश्वगंधा पर खासतौर पर वैश्विक चर्चा की, जिसमें दुनिया भर के विशेषज्ञों ने इसकी सुरक्षा, गुणवत्ता और चिकित्सीय उपयोग पर मंथन किया। ये जड़ी बूटी भारत की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसका इस्तेमाल वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ दुनियाभर में बीमारियों का इलाज करने में शामिल किया जा रहा है।

आयुर्वेद क्या कहता है?

अश्वगंधा को कई नामों जैसे इंडियन जिनसेंग, इंडियन विंटर चेरी या Withania somnifera के नाम से भी जाना जाता है। अश्वगंधा दो शब्दों से मिलकर बना है एक अश्व यानी घोड़ा और दूसरा गंधा यानी सुगंध। आयुर्वेद में माना जाता है कि अश्वगंधा का सेवन करने से बॉडी में घोड़े जैसी ताकत आती है। आयुर्वेद के मुताबिक ये एक ऐसी जड़ी बूटी है जो बॉडी को रिसेट करने में मददगार साबित होती है। प्राचीन काल से इसका उपयोग नर्वस सिस्टम को मजबूत करने के लिए किया जाता रहा है।

आयुर्वेद में अश्वगंधा के फायदे

अश्वगंधा का सेवन करने से थायरॉयड का इलाज होता है। ये जड़ी बूटी थायराइड फंक्शन को सपोर्ट करती है। पुरुषों और महिलाओं दोनों में इनफर्टिलिटी का इलाज करती है। इसका सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रहता है और दिल की सेहत में सुधार होता है। ये हर्ब दिल के रोगों से जुड़े ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करती है। PMC में प्रकाशित रिपोर्ट Ashwagandha (Withania somnifera) Current Research on the Health Promoting Activities के अनुसार अश्वगंधा में न्यूरोप्रोटेक्टिव, सेडेटिव, एडैप्टोजेनिक गुण पाए जाते हैं, जो नींद की गुणवत्ता में सुधार करते हैं और तनाव को कंट्रोल करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये जड़ी-बूटी बॉडी की सूजन को कंट्रोल करती है। ये हर्ब एंटी-डायबिटिक गुणों से भरपूर है जो डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करती है।

भारत में इसका उपयोग करीब 3000 साल पुराना माना जाता है। पारंपरिक चिकित्सा में इसकी जड़ का इस्तेमाल सेक्सुअल डिजायर बढ़ाने में, मादक पदार्थों के साथ, मूत्रवर्धक, कृमिनाशक के रूप में किया जाता रहा है। रिसर्च बताती है कि अश्वगंधा एक शक्तिशाली अडाप्टोजेन है। यह शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टिसोल (Cortisol) को 30% तक कम कर सकता है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, यह ब्रेन सेल्स को डैमेज होने से बचाता है और याददाश्त (Memory) व ध्यान केंद्रित करने की क्षमता (Focus) में सुधार करता है। रिसर्च ने साबित किया है कि अश्वगंधा के सेवन से मांसपेशियों की ताकत और रिकवरी में सुधार होता है। ये शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं (WBC) की संख्या बढ़ाती है, जिससे बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है।

आयुर्वेद में ऐसे प्रमाण भी मौजूद हैं जो बताते हैं कि अश्वगंधा का सेवन बांझपन, कैंसर और डायबिटीज के उपचार में भी मददगार साबित होता है। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि अश्वगंधा में दिल की हिफाजत करने वाले गुण भी मौजूद हैं। ये हर्ब चिंता को कम कर सकता है, हाइपोथायरायडिज्म में मददगार हो सकता है और मांसपेशियों की ताकत और रिकवरी बढ़ाता है।

अश्वगंधा का सेवन कैसे करें

दूध के साथ करें अश्वगंधा का सेवन

अश्वगंधा को नाइट टॉनिक माना जाता है।आप इसका सेवन रात में सोने से पहले कर सकते हैं। एक गिलास दूध में  ¼ छोटा चम्मच अश्वगंधा पाउडर मिलाएं और उसे सोने से पहले पी लें। आप चाहें तो इस दूध में एक चुटकी दालचीनी या जायफल भी मिला सकते हैं। इसे सोने से एक घंटे पहले पिएं। ये दूध तनाव कम करता है और बेहतर नींद में मदद करता है।

स्मूदी के साथ करें अश्वगंधा का सेवन

अश्वगंधा पाउडर की एक छोटी चुटकी आप फ्रूट स्मूदी, केला या खजूर शेक के साथ कर सकते हैं। कटे हुए सेब, केला, कीवी और बेरीज में थोड़ा शहद डालें और ऊपर से अश्वगंधा पाउडर मिलाएं और उसका सेवन करें। इसे दही, भीगे चिया सीड्स और ड्राई फ्रूट्स के साथ भी खाया जा सकता है।

हर्बल चाय या काढ़ा बनाकर पिएं

2 कप पानी में अश्वगंधा पाउडर मिलाएं। इसमें कद्दूकस किया हुआ अदरक, तुलसी की पत्तियां, काली मिर्च डालें और उसे कुछ देर उबालें। कुछ देर बाद इस पानी को छानें और सुबह गुनगुना पिएं।

निष्कर्ष

अश्वगंधा केवल एक पारंपरिक जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि आयुर्वेद की उस समृद्ध विरासत का प्रतीक है, जो आज आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर भी खरी उतरती दिख रही है। सदियों से भारतीय चिकित्सा पद्धति में इस्तेमाल की जा रही यह जड़ी-बूटी आज तनाव, नींद की समस्या, थकान, हार्मोनल असंतुलन और इम्युनिटी से जुड़ी चुनौतियों में सहायक मानी जा रही है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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