आयुर्वेद में कई ऐसे औषधीय पौधों का उल्लेख मिलता है, जो बिना साइड इफेक्ट के शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इन्हीं में से एक है अरणी का पौधा, जिसे प्राचीन काल से औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। अरणी की जड़, छाल और पत्तियां, तीनों ही आयुर्वेद में बेहद उपयोगी मानी जाती हैं। जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉ. अमित वर्मा (एमडी मेडिसिन) के अनुसार, अरणी के हर हिस्से में औषधीय गुण छिपे हैं। इसमें फाइटोकेमिकल्स, फ्लेवोनोइड्स, ग्लाइकोसाइड्स, टैनिन और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में सहायक होते हैं।

अरणी का पौधा शरीर के अंदर जमे विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं और सूजन व दर्द को कम करने में सहायक होते हैं। यही वजह है कि आयुर्वेद में इसे मोटापा, गठिया, कब्ज, बवासीर और बुखार जैसी समस्याओं में उपयोगी माना गया है।

बुखार में अरणी का घरेलू उपाय

अगर बुखार जल्दी ठीक नहीं हो रहा है, तो अरणी एक असरदार उपाय साबित हो सकता है। अरणी की जड़ या तने की छाल को पीस लें और उसमें थोड़ा सा कपूर मिलाकर माथे पर लेप करें। इससे बुखार में आराम मिलता है। इसके अलावा अरणी के 10–12 पत्ते और 8–10 काली मिर्च पीसकर लेप बनाया जा सकता है। यह उपाय शरीर का तापमान संतुलित करने में मदद करता है। बच्चों के लिए इसकी मात्रा कम रखें और प्रयोग से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें।

मोटापा के लिए अरणी का काढ़ा

आज के समय में मोटापा एक बड़ी समस्या बन चुका है। अरणी का काढ़ा इस समस्या में काफी लाभकारी माना जाता है। इसके लिए 10 ग्राम अरणी और 5 ग्राम त्रिफला लेकर रात में एक लीटर पानी में मिट्टी के बर्तन में भिगो दें। सुबह इसका काढ़ा बनाकर पी लें। इस काढ़े का सेवन सुबह और शाम दोनों समय किया जा सकता है। साथ में हल्का और संतुलित भोजन करें। कुछ ही दिनों में वजन कम होने लगता है और पाचन भी बेहतर होता है।

गठिया और जोड़ों के दर्द में लाभकारी

गठिया और आर्थराइटिस के मरीजों के लिए अरणी किसी वरदान से कम नहीं है। अरणी के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल और फल) का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम 20–30 मिली मात्रा में पीने से जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत मिलती है। इसके अलावा पंचांग को पीसकर हल्का गुनगुना करके जोड़ों पर लगाने से आर्थराइटिस में होने वाला दर्द कम होता है और चलने-फिरने में आसानी होती है।

कब्ज की समस्या में अरणी

कब्ज से परेशान लोगों के लिए अरणी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। इसके लिए 3 ग्राम अरणी के पत्ते और 3 ग्राम बड़ी हरड़ का छिलका लेकर 250 मिली पानी में पकाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को सुबह-शाम 20–40 मिली मात्रा में पीने से कब्ज की समस्या दूर होती है। इसके अलावा 50 ग्राम अरणी की जड़ को आधा लीटर पानी में पकाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े का सेवन सुबह और शाम करने से पेट साफ रहता है। यह काढ़ा न सिर्फ कब्ज दूर करता है, बल्कि शरीर को पोषण भी देता है।

बवासीर में अरणी

बवासीर की समस्या काफी दर्दनाक होती है और लंबे समय तक चल सकती है। अरणी के पत्तों का काढ़ा बनाकर 10–30 मिली मात्रा में पीने से बवासीर के दर्द में राहत मिलती है। इसके अलावा अरणी के पत्तों की पोटली बनाकर प्रभावित स्थान पर बांधने से भी दर्द और सूजन कम होती है।

निष्कर्ष

हालांकि अरणी एक प्राकृतिक औषधि है, लेकिन इसका उपयोग सीमित मात्रा में और चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को बिना सलाह इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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