Coronavirus deadly effects: दुनिया भर में कई देशों को अपने चपेट में ले चुकी कोरोना वायरस से अब तक 2 हजार से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में भी 3 मरीजों में इस वायरस की पुष्टि हुई थी जिन्हें केरल के ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, तीनों ही मरीज अब स्वस्थ हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। इस बीच ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ की एक खबर के मुताबिक केरल के ही कोचिन शहर में एक व्यक्ति की मौत हो गई। मलेशिया से लौटे 36 वर्षीय व्यक्ति में फ्लू के लक्षण और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत पर गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बता दें कि एक दिन पहले हुई कोरोना वायरस की जांच में वो नेगेटिव पाया गया था।
निमोनिया से था पीड़ित: डॉक्टर्स के अनुसार मरीज की मौत निमोनिया और छाती में कंजेशन की वजह से हुई। वहां के सीनियर डॉक्टर ने इस खबर में बताया कि मरीज एक्यूट निमोनिया और रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम से पीड़ित था। इससे पहले वो कोरोना वायरस और स्वाइन फ्लू की जांच में मरीज नेगेटिव पाया गया था। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती इस व्यक्ति के टेस्ट सैम्पल्स भी पुणे के विरोलॉजी इंस्टिट्यूट भेजे गए थे। इसके अलावा, वो व्यक्ति डायबिटीज की समस्या से भी जूझ रहा था और एक्यूट इंफेक्शन की स्थिति में शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा काफी हद तक बढ़ जाती है।
चीन के अलावा दूसरे देशों में भी हुई मौतें: कोरोना वायरस ने चीन को बुरी तरह से प्रभावित किया है। वुहान प्रांत से शुरू हुए इस वायरस ने पूरे चीन को तहस-नहस करके रख दिया। चीन के अलावा भी कई देशों में इस वायरस से लोग संक्रमित हैं, वहीं मृत लोगों की संख्या भी काफी ज्यादा है। चीन के बाद ईरान इस वायरस की चपेट में आने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है, वहां अब तक 43 लोगों की कोरोना वायरस से मौत हो चुकी है। वहीं, साउथ कोरिया में भी इस वायरस के संक्रमण से 17 लोगों की जान जा चुकी है। यहां तक कि अमेरिका में भी 1 व्यक्ति इस वायरस की चपेट में आने से मारा जा चुका है। इसके अलावा ब्रिटेन, हांगकांग और जर्मनी में भी कोरोना वायरस की चपेट में कई लोग हैं।
भारत ने कच्चे माल के लिए मांगी स्विट्जरलैंड से मदद: भारत में दवाइयों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का 80 प्रतिशत हिस्सा चीन से ही आता था। कोरोना वायरस के घातक प्रभाव के बाद चीन से रॉ मेटीरियल्स की आपूर्ति बंद होने से फार्मा कंपनियों के लिए बुरी स्थिति बन चुकी है। खबरों की मानें तो अगर मार्च के पहले हफ्ते तक कच्चे माल नहीं आए तो भारत में दवाइयों की किल्लत हो सकती है। ऐसे में ‘नवभारत टाइम्स’ की एक खबर के अनुसार भारत सरकार ने दूसरे देशों से मदद मांगी है। सरकार ने एंटीबायोटिक्स की शीर्ष एक्सपोर्टर्स में शामिल स्विट्जरलैंड और इटली से मदद मांगी है।
