एक जमाने में, धर्मेंद्र को हिंदी सिनेमा का सबसे हैंडसम अभिनेता कहा जाता था और भले ही उनका आकर्षक रूप और व्यक्तित्व दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने के लिए काफी था, फिर भी उस दौर के कई फिल्म निर्माताओं ने उन्हें अपनी फिल्मों में लेने से इनकार कर दिया था। दरअसल, जब वह फिल्मों में अपने बड़े ब्रेक का इंतजार कर रहे थे, तब धर्मेंद्र को बताया गया था कि उनकी शक्ल हीरो जैसी नहीं है, बल्कि वो एक हॉकी प्लेयर जैसे दिखते हैं। धर्मेंद्र ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि करियर की शुरुआत में उन्हें कई रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था।

उन्होंने एक किस्सा आप की अदालत में सुनाया था। बारे में बात की थी, जब उनसे बॉलीवुड में शुरुआती दौर में मिले रिजेक्शन के बारे में पूछा गया था। धर्मेंद्र 1958 में एक फिल्म पत्रिका के कॉन्टेस्ट जीतने के बाद मुंबई चले गए, लेकिन प्रतियोगिता विजेताओं के लिए जो शुरुआत की योजना बनाई गई थी, वह असफल रही। इसके बाद अभिनेता ने फिल्मों में जगह बनाने की कोशिश शुरू की और कई फिल्म निर्माताओं से मिले। हालांकि, एक फिल्म निर्माता ने यह कहकर उनका उत्साह तोड़ने की कोशिश की कि वह हीरो जैसे नहीं दिखते।

धर्मेंद्र ने याद करते हुए बताया कि उस समय तक उन्होंने “बंदिनी” साइन कर ली थी, जो 1963 में रिलीज हुई, लेकिन फिल्म तब तक फ्लोर पर नहीं थी, इसलिए उनके पास पैसे कमाने का कोई रास्ता नहीं था।

यह भी पढ़ें: धर्मेंद्र: सादा दिल गँवई फिल्म स्टार, हिन्दी सिनेमा की कई श्रेष्ठ फिल्मों के लिए किए जाएँगे याद

उन्होंने बताया था, “मुझे बंदिनी के लिए साइन किया गया था, लेकिन बिमल रॉय और गुरुदत्त हमेशा फिल्म बनाने में समय लगाते थे। मुंबई जैसे शहर में, एक मिडल क्लास बैकग्राउंड से आने के कारण, आप कैसे काम चलाएंगे? बाद में, मुझे ‘लव इन शिमला’ के लिए स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाया गया। उन्होंने मुझे देखा और कहा, ‘हमें एक हीरो चाहिए, हॉकी खिलाड़ी नहीं।'” ‘लव इन शिमला’ 1960 में रिलीज हुई थी और इसमें जॉय मुखर्जी और साधना ने अभिनय किया था। इस फिल्म का निर्देशन आरके नैयर ने किया था और मुख्य अभिनेता के पिता, शशधर मुखर्जी ने इसका निर्माण किया था।

यह भी पढ़ें: ‘सनी और बॉबी मुझसे डरते हैं लेकिन मैं चाहता हूं…’ अपने बच्चों पर जान छिड़कते थे धर्मेंद्र, मगर बेटों के मन में था खौफ

धर्मेंद्र ने आगे बताया कि हालांकि इससे उनका दिल टूट गया था, फिर भी उन्होंने कड़ी मेहनत जारी रखी और फिल्मों में जगह बनाई। “मैंने अपना स्वाभिमान बनाए रखा। काम ही पूजा है। मैंने सिर्फ काम के बारे में सोचा।” बता दें कि धर्मेंद्र अंत तक काम करते रहे। पिछले कुछ सालों में, वह ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ और ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ जैसी फिल्मों में नजर आए। वह जल्द ही श्रीराम राघवन की फिल्म ‘इक्कीस’ में नजर आएंगे।