बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार उनके परिवार वालों ने बेहद ही निजी तरीके से किया था। एक्टर की न ही कोई अंतिम यात्रा निकाली गई और न ही उन्हें राजकीय सम्मान के साथ विदा किया गया था। इसके बाद बहुत से लोगों ने भी इस पर सवाल उठाया था। इसका जवाब तो नहीं मिला, लेकिन अब एक इंटरव्यू में पत्रकार और लेखिका शोभा डे ने देओल परिवार के उस साधारण अंतिम संस्कार के फैसले के बारे में बात की है। सिर्फ इतना ही नहीं, उनका कहना यह भी है कि हेमा मालिनी को और देओल परिवार की तरफ ज्यादा सम्मान मिलना चाहिए था।
राजकीय सम्मान न मिलने पर किया रिएक्ट
विक्की लालवानी के साथ बात करते हुए जब शोभा डे से पूछा गया कि क्या दिवंगत लेजेंड को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार मिलना चाहिए था। इस पर उन्होंने कहा, “मैं पूरी तरह सहमत हूं, मैंने इसके बारे में लिखा भी है। पहले भी फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों को यह सम्मान दिया गया है। वह इसके पूरी तरह हकदार थे, उन्हें बहुत प्यार किया जाता था।
ऐसा लगा कि या तो यह कोई चूक थी या इसके पीछे राजनीतिक कारण थे कि ऐसा नहीं हुआ। उनके बैकग्राउंड और हेमा के बैकग्राउंड को देखते हुए शायद बस एक हल्के से इशारे या एक कॉल की जरूरत थी। अगर श्रीदेवी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार मिल सकता है… वह भी बहुत पसंद की जाने वाली स्टार थीं। तो निश्चित रूप से धर्मेंद्र जैसे कद के व्यक्ति को भी यह मिलना चाहिए था।”
इसके आगे उन्होंने कहा, “धर्मेंद्र की हालत गंभीर थी वह बीमार थे और कुछ ही दिनों में उनका निधन होने वाला था, यह बात लगभग सबको पता थी। इसलिए अगर कुछ ऑर्गनाइज करना होता, तो वह इस बीच हो सकता था। मुझे पक्का नहीं पता कि ऐसा क्यों नहीं हुआ। हेमा खुद एक फोन कॉल कर सकती थीं, वह एक पार्लियामेंटेरियन हैं और BJP में काफी ऊंचे पद पर हैं।”
इसके बाद कॉलमनिस्ट ने दिल्ली में हेमा मालिनी द्वारा होस्ट की गई धर्मेंद्र की प्रेयर मीट को याद किया कि कैसे वह उन्हें अपने पति के बजाय ‘धरम जी’ कहती रहीं। शोभा डे ने कहा, “हो सकता है, परिवार स्टेट फ्यूनरल नहीं चाहता था। मैं कौन होती हूं यह कहने वाली कि ऐसा क्यों नहीं हुआ? लेकिन, यह थोड़ा अजीब और बहुत निराशाजनक लगता है। वह 40 सालों से ज्यादा तक उनकी पत्नी थीं, उन्होंने इस बात पर बार-बार जोर दिया है। पार्टी के बड़े नेताओं ने उन्हें आधिकारिक तौर पर उनकी पत्नी के रूप में मान्यता दी थी या नहीं, मुझे कोई अंदाजा नहीं है।”
सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी माना कि धर्मेंद्र के पहले परिवार को हेमा के प्रति ज्यादा नरमी दिखानी चाहिए थी। पत्रकार ने कहा, “चार दशकों से दो समानांतर परिवार थे। धरम जी ने हमेशा उन्हें अपना माना है, खासकर अपनी बेटियों को और निश्चित रूप से हेमा को। अगर उन्हें मिलने से रोका गया, तो मुझे लगता है कि शायद थोड़ी और नरमी दिखानी चाहिए थी।” वहीं, हेमा मालिनी ने यूएई के फिल्ममेकर हमाद अल रेयामी से बातचीत करते हुए बताया था कि आखिर जल्दबाजी में धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार क्यों किया गया था। इस खबर को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
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