बीते दिनों भारत में गजलों की महफिल सजाने आए गुलाम अली कुछतल्ख अनुभवों के साथ अपने वतन लौटे हैं और हताशा जताते हुए बुधवार को उन्होंने कहा कि वे सुरीले माहौल में ही गाएंगे और किसी तरह की सियासत से उन्हें नहीं मतलब है। पाकिस्तानी गजल गायक ने भारत में अपने प्रस्तावित कार्यक्रमों को पूरी तरह रद्द करते हुए कहा कि फिलहाल संगीत के लिए हालात सही नहीं हैं और वे किसी तरह की राजनीति में नहीं पड़ना चाहते। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में उनके कद्रदानों की कमी नहीं है और इस बेसुरे माहौल से वे भी दुखी हैं।
उधर 74 वर्षीय गुलाम अली के बेटे आमिर ने बुधवार को कहा कि पिछले महीने मुंबई में उनके पिता के कंसर्ट को लेकर जो कुछ हुआ और शिवसेना ने उसे नहीं होने देने की धमकी दी थी, उसके बाद वे कार्यक्रम नहीं करना चाहते। हालांकि आमिर ने कहा कि माहौल सही होने पर गुलाम अली आएंगे। आमिर ने लाहौर से फोन पर बताया, आठ नवंबर का कंसर्ट (दिल्ली में) अब नहीं हो रहा। मुंबई में जो कुछ हुआ, उसके बाद हम कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते। संगीत के लिए सही माहौल होना चाहिए। हम किसी तरह की सियासत में नहीं पड़ना चाहते। वहां बहुत कुछ हो रहा है। इस समय हमारे लिए वहां आना सही नहीं होगा।
मुंबई में गुलाम अली का कंसर्ट नहीं हो पाने के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली में प्रस्तुति के लिए उन्हें आमंत्रित किया था। आठ नवंबर के बाद राष्ट्रीय राजधानी में तीन दिसंबर को एक और कार्यक्रम आयोजित किया जाना था। उन्होंने कहा, हम दिसंबर वाले कंसर्ट को लेकर भी आश्वस्त नहीं हैं। उनके भारत में कई प्रशंसक हैं, लेकिन माहौल सही होने पर वे आएंगे। कुछ राजनेताओं ने निमंत्रण दिया है, वहीं कुछ अन्य हैं जो समस्या पैदा करना चाहते हैं। आप सरकार के अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी गुलाम अली को कार्यक्रम करने के लिए न्योता दिया था।
गुलाम अली को लेकर कट्टरपंथियों के रुख की भारत में तीखी भर्त्सना की गई थी और संगीत बिरादरी के अलावा राजनीतिक दल भी उनके समर्थन में आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुलाम अली प्रकरण को दुखद बताया था। इस बीच केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने बुधवार को एक समारोह में कहा कि सरकार ने कभी गुलाम अली के कंसर्ट का विरोध नहीं किया और हर बात के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘कुछ लोगों ने मुंबई में कंसर्ट का विरोध किया, उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ऐसा किया।
सरकार ने उन्हें (गुलाम अली को) वीजा दिया था, वे यहां आए। इसके लिए सरकार पर जिम्मेदारी क्यों डाली जा रही है? इसके लिए जो जिम्मेदार हैं, उन पर सवाल खड़ा किया जाए। सरकार को हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
उधर एक समाचार चैनल से बातचीत में गुलाम अली ने कहा कि हाल की घटनाओं से उन्हें मायूसी जरूर हुई है, लेकिन भारतीय संगीत प्रेमियों और हुकूमत ने हमेशा खुले दिल से उनका स्वागत किया है। मैं उनके लिए फिर आऊंगा। गौरतलब है कि दिल्ली के अलावा गुलाम अली का एक संगीत जलसा लखनऊ में होने वाला था। लेकिन कट्टरपंथियों की धमकी के कारण यह कार्यक्रम भी रद्द करना पड़ा।
पांच दिसंबर 1940 को जन्मे गुलाम अली विख्यात पटियाला घराने की पारंपरिक गायकी की मशाल रोशन किए हुए हैं। गजल शहंशाह मेहदी हसन के बाद उन्हें सबसे मकबूल ग़ज़ल गायक माना गाया और आज पाकिस्तान और भारत के अलावा उन्हें चाहने वाले नेपाल, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा में काफी हैं। सारी दुनिया में फैले हिंदी और उर्दू के जानकार उनकी गायकी, खासकर ठुमरी, गजल और टप्पे के दीवाने हैं। गुलाम अली पंजाबी गायकी के भी सिद्ध कलाकार हैं और कई फिल्मों में उन्होंने सुर बिखेरा है।
भारतीय सिनेमा में उनका प्रवेश बीआर चोपड़ा की फिल्म निकाह में गाई ग़जल ‘चुपके-चुपके रात दिन’ से हुआ था। कई साल पहले आमिर खान अभिनीत फिल्म सरफरोश को लेकर भी गुलाम अली चर्चा में आए थे। इस फिल्म में एक ऐसे पाकिस्तानी गायकका किरदार था जो आइएसआइ के लिए काम करता है। हालांकि फिल्मकार ने इस बात से इनकार किया कि यह पात्र गुलाम अली से प्रेरित है।
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