देश के दूसरे राज्यों में किस्मत अजमाने उतरी आम आदमी पार्टी (आप) को पांच राज्यों में हुए चुनावों में निराशा ही हाथ लगी है। चुनाव रुझानों की स्थिति के आधार पर आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ के राज्यों में अपनी धमक जमाने के लिए पहुंची थी, लेकिन हालत यह रही है कि उसे कहीं एक भी सीट नहीं मिली। हालांकि पार्टी अध्यक्ष गोपाल राय ने कहा कि इन राज्यों में आम आदमी पार्टी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। राय ने कहा कि आम आदमी पार्टी इन राज्यों में संगठन विस्तार के कार्य को लेकर चुनाव लड़ रही थी। इन राज्यों में संगठन विस्तार का कार्य किया गया है। इन राज्यों की सीटोें पर भी आम जनता ने आम आदमी पार्टी को पंसद किया है। यह परिणाम बताता है कि जनता का लक्ष्य भाजपा को हराना है। ज्ञात हो कि तीन राज्यों में चुनाव के लिए पार्टी ने पूरी ताकत लगाई थी और इन सीटों के लिए मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी घोषित किए थे। इन प्रत्याशियों को भी अधिक वोट नहीं मिले है। इससे पहले हुए चुनावों में भी आम आदमी पार्टी कुछ खास नहीं कर पाई पाई थी।

‘आप’ ने मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से 208 पर उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से ज्यादातर उम्मीदवार अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। राज्य में पार्टी को केवल 0.7 फीसद वोट ही मिले जबकि 1.5 फीसद मतदाताओं ने नोटा को अपनाया। पार्टी ने 90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा की 85 सीटों पर, 119 सदस्यीय तेलंगाना विधानसभा की 41 सीटों पर और 200 सदस्यीय राजस्थान की 142 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। छत्तीसगढ़ में आप को 0.9 फीसद और राजस्थान में मात्र 0.4 फीसद वोट से संतोष करना पड़ा। ‘आप’ का मत फीसद इन राज्यों में नोटा के मत फीसद से भी कम है। इसे ‘आप’ के मिशन विस्तार के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है। दिल्ली से बाहर पार्टी अब तक सिर्फ पंजाब को छोड़ कर किसी अन्य राज्य में प्रभावी मौजूदगी दर्ज नहीं करा पाई है। पंजाब में पहली बार चुनाव लड़ने के बाद ‘आप’ राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में उभरी थी।

‘आप’ के बागी विधायक कपिल मिश्र ने कहा कि इन राज्यों में मुख्यमंत्री के पद पर लड़ने वाले प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में ‘आप’ प्रत्याशियों की सीधी टक्कर नोटा से थी। पार्टी ने इन राज्यों में दिल्ली के कामों का हवाला देते हुए चुनाव लड़ा था। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ की सीटों पर ‘आप’ प्रत्याशियों से ज्यादा वोट नोटा को मिले हैं।