मध्यप्रदेश में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने है। आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर करीब आधा दर्जन नेता, मंत्री, सांसद और विधायक अपने पुत्रों या रिश्तेदारों को टिकट दिलाने के लिए भरसक प्रयास कर रहे है। स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज के पुत्र भी इस बार के चुनावों में उनका प्रचार कर रहे है। पार्टी में, विधानसभा चुनावों में टिकटों को लेकर माथापच्ची चल रही है।

कौन प्रत्याशी कहां से जीतने लायक होगा, कहां कौन सा जातीय या क्षेत्रीय गणित फिट बैठेगा आदि जटिल चर्चाओं के बीच, अब इन नेता पुत्रों या रिश्तेदारों की, चुनावी घमासान में टिकटों की मांग ने पार्टी के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। बीजेपी के बड़े नेता और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भोपाल में कहा कि, कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में कितने दिनों से सक्रिय है, ‘कौन चुनाव लड़ेगा कौन नहीं इसका फैसला पार्टी करेगी।’

कैलाश विजयवर्गीय ने एक सवाल के जवाब में कहा कि, ‘नेता का पुत्र होने में कोई दोष नहीं है, अगर वो योग्य होगा तो पार्टी उसकी टिकट के दावेदारी पर जरूर विचार करेगी। गौरतलब है कि खुद कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय टिकट की दौड़ में शामिल है। भारतीय जनता पार्टी में कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र के अलावा टिकट पाने वालों की दौड़ में कई नेताओ के पुत्र या रिश्तेदार शामिल है।

बीजेपी से राज्यसभा सांसद प्रभात झा के बेटे तुष्मुल, सुमित्रा महाजन के बेटे मंदार, नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र, सतना से सांसद गणेश के भाई उमेश प्रताप सिंह, मंत्री गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक और मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बेटे सुकर्ण मिश्रा समेत दर्जन भर ऐसे नेता है जिनके बेटे चुनाव में टिकट की दावेदारी कर सकते है।

वहीं इस मसले पर कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे का कहना है कि बीजेपी के वंशवाद की तुलना हमारे वंशवाद से नहीं की जा सकती क्योंकि कांग्रेस के वंशवाद में गाँधी खानदान का खून है जिस पर उन्हें गर्व है। जाहिर है राज्य में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, सभी पार्टियां एक दूसरे पर आरोपों की बौछार करने से पीछे नहीं हट रही। कांग्रेस 15 सालों से सत्ता पर काबिज बीजेपी को हटाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। कांग्रेस अब वंशवाद के हथियार से बीजेपी को उसी की भाषा में जवाब दे रही है, जो कभी बीजेपी किया करती थी।