लोकसभा चुनाव को लेकर इस बार पश्चिम बंगाल में भी दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। एक तरफ ममता बनर्जी फिर से 30 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रही है, वही भारतीय जनता पार्टी ने भी 35 प्लस का टारगेट रखा है।

क्या है ये पूरा माजरा?

इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में ध्रुवीकरण का असर भी साफ देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में ममता बनर्जी ने इस समय एक हिंदू संत को अपने निशाने पर ले रखा है। असल में कुछ दिनों पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारत सेवाश्रम संघला के सेक्रेटरी कार्तिक महाराज को लेकर कुछ ऐसा बोल दिया है जिस वजह से राजनीति में उबाल आ गया है।

ममता ने कार्तिक को लेकर क्या बोला?

असल में कुछ दिन पहले हुगली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा था बहरामपुर में एक महाराज है, मैंने उनके बारे में काफी सुना है, कार्तिक महाराज हर जगह कह रहे हैं कि वे अपने बूथ पर किसी भी टीएमसी एजेंट को आने नहीं देंगे। मैं तो उन्हें संत नहीं मानती हूं, वे तो सीधे-सीधे और पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हो चुके हैं और इस देश को बर्बाद कर रहे हैं। मैं तो भारत सेवाश्रम संघला को बहुत सम्मान देती थी लेकिन अब मैं देखती हूं कि रामकृष्ण मिशन और भारत सेवाश्रम संघ के कई कार्यकर्ता भाजपा के प्रभाव में काम कर रहे हैं, जो मंदिरों की सेवा कर रहे हैं, वो बहुत ही अच्छा काम है, लेकिन हर कोई ऐसा नहीं है।

पीएम मोदी ने मुद्दे को भुनाया

अब हुआ ये है कि क्योंकि ममता बनर्जी ने एक हिंदू संत को लेकर इस प्रकार का बयान दिया, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए एक दूसरी रैली में उस मुद्दे को उठाया। पीएम मोदी ने कहा कि रामकृष्ण मिशन जो स्वामी विवेकानंद ने बनाया था, आज उनके लोगों को ममता बनर्जी की पार्टी धमका रही है। जो सरकार किसी धर्म की और धार्मिक संस्थाओं का सम्मान ना करें उन्हें सबक सिखाना जरूरी है।

ममता की सफाई

वैसे जब ये विवाद ज्यादा बढ़ गया, ममता बनर्जी ने फिर दोहराया था कि वे किसी संत का अपमान नहीं करी थीं बल्कि उनका निशाना सिर्फ कार्तिक महाराज पर था क्योंकि उन्हें ऐसी इनफार्मेशन मिली थी कि वे बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं, वे टीएमसी के एजेंट को बूथ पर आने नहीं देते। अगर उनको बीजेपी में जाने का इतना शौक है तो उन्हें खुले दिल से कमल को स्वीकार कर लेना चाहिए।

कार्तिक ने क्या बोला?

पूरे विवाद पर कार्तिक महाराज की तरफ से भी बयान आया है। उन्होंने तो दो टूक कहा कि राजनीति से उनका कोई लेना-देना नहीं है और बीजेपी और टीएमसी की तरफ से समय-समय पर चुनाव लड़ने का ऑफर मिला है, लेकिन उन्होंने कभी भी उसे स्वीकार नहीं किया।