Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका दिया है। पार्टी ने रविवार को कहा कि हरियाणा और पंजाब में आप या किसी अन्य पार्टी के साथ गठबंधन के लिए उसकी कोई बातचीत नहीं चल रही और वह इन दोनों राज्यों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा जल्द करेगी।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पार्टी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आप के साथ गठबंधन को लेकर अभी किसी निर्णय पर नहीं पहुंची है। शनिवार को आप के एक नेता ने कहा कि पार्टी दिल्ली में कांग्रेस के साथ गठबंधन तभी करेगी यदि राहुल गांधी की पार्टी हरियाणा और चंडीगढ़ में भी साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने को तैयार हो।
सुरजेवाला एक संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे जिसमें कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अपना अभियान ‘‘अब होगा न्याय’’ सामने रखा। उन्होंने कहा, ‘‘आप सहित किसी भी पार्टी के साथ हरियाणा या पंजाब में गठबंधन पर कोई बातचीत नहीं हो रही है। हम (दोनों राज्यों के लिए) अपने उम्मीदवारों की घोषणा जल्द करेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी दिल्ली में आप के साथ गठबंधन के बारे में अभी किसी निर्णय नहीं पहुंची है।’’ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को मुद्दे पर दिल्ली से अपनी पार्टी के नेताओं के साथ चर्चा की। गांधी के आवास पर हुई इस बैठक में दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं पार्टी की राष्ट्रीय राजधानी इकाई के प्रभारी पी सी चाको और कुछ अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
गठबंधन के लिए एक और पूर्व शर्त के तौर पर आप ने कांग्रेस से कहा है कि वह दिल्ली के वास्ते पूर्ण राज्य के लिए अपने समर्थन की घोषणा करे। आप ने कांग्रेस को कथित रूप से कहा है कि वह चंडीगढ़ में उसे समर्थन करेगी यदि उसे हरियाणा में तीन सीटों पर चुनाव लड़ने दे जिसमें फरीदाबाद, गुड़गांव और करनाल शामिल हैं।
इससे पहले दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी तालमेल को लेकर कभी हां-कभी ना देखने को मिल रही है। कांग्रेस में आप से लेकर गठबंधन को लेकर दो गुट बन गए हैं। एक धड़ा जहां आप के साथ तालमेल के पक्ष में हैं, वहीं दूसरा धड़ा अकेले चुनाव मैदान में उतरे की वकालत कर रहा है। इस धड़े का कहना है कि पार्टी पिछले कुछ सालों में मजबूत हुई है।
ऐसे में अकेले चुनाव में जाना पार्टी के भविष्य के लिए ठीक होगा। जबकि दूसरे धड़े की दलील है कि दोनों दलों के अलग-अलग उतरने से विपक्षी वोट बंट जाएंगे। इसका सीधा-सीधा फायदा भाजपा को होगा।

