कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा, ‘आज संविधान पर हमला किया जा रहा है। कर्नाटक में एक तरफ विधायक खड़े हैं और दूसरी तरफ राज्यपाल। जेडीएस ने बताया कि उनके विधायकों को 100 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया।’ राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद अब विधानसभा में बहुमत साबित करने को लेकर रस्साकसी शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में सरकार न बना पाने की स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन भी लगाया जा सकता है। ‘द टेलीग्राफ’ के अनुसार, भाजपा नहीं चाहती है कि कांग्रेस-जेडीएस का गठजोड़ आकार ले, क्योंकि आगामी लोकसभा चुनावों में बीजेपी को नए राजनीतिक समीकरण से बड़ा नुकसान हो सकता है। विधानसभा में बहुमत साबित करने के सवाल पर येदियुरप्पा ने एक-दो दिन तक इंतजार करने की बात कही है। वहीं, सीएम येदियुरप्पा ने पहले ही दिन किसानों का कर्जा माफ करने की घोषणा कर दी है।
इससे पहले, कर्नाटक विधानसभा चुनाव में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं आने के बाद सरकार बनाने की लड़ाई देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गई थी। कांग्रेस-जेडीएस ने राज्यपाल वजूभाई वाला के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। तीन जजों की पीठ ने आधी रात के बाद इस मामले पर सुनवाई की और भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस. येदियुरप्पा को बतौर मुख्यमंत्री शपथ लेने से रोकने से इनकार कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत की पीठ ने भाजपा से विधायकों की सूची सौंपने को कहा है। कोर्ट अब इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने शपथ ग्रहण को गुरुवार (17 मई) शाम चार बजे तक के लिए टालने का अनुरोध किया था।
इस बीच, वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी भी कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दायर याचिका में उन्होंने अविलंब सुनवाई की मांग की। कोर्ट ने उन्हें 18 मई को उचित पीठ के समक्ष याचिका दायर करने का निर्देश दिया।
येदियुरप्पा गुरुवार सुबह 9:00 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। राज्यपाल वजूभाई वाला ने भाजपा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिनों का वक्त दिया है। कर्नाटक में 222 विधानसभा सीटों के लिए मत डाले गए थे। भाजपा 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई थी। वहीं, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटें प्राप्त हुई थीं। त्रिशंकु विधानसभा के बाद सरकार बनाने की रस्साकसी शुरू हो गई थी। कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार एचडी. कुमारास्वामी ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। दूसरी तरफ, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर भाजपा की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने बीजेपी पर संविधान का मखौल बनाने का आरोप लगाया है।

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कर्नाटक में भाजपा के सरकार बनाने के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट में भी एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में कोर्ट से गुहार लगाया गया है कि वह विधायकों के दल-बदल को रोके, ताकि भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग न हो और न ही विधायक इस्तीफा दें।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा जब से सत्ता में आई है, बाबा साहेब अंबेडकर के बनाए संविधान को तबाह और बर्बाद करने की साजिश रच रही है। इसके लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लोकतंत्र की हत्या है।
शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ तो ले ली है, लेकिन बहुमत साबित कर पाना मुश्किल है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि राज्यपाल को उनलोगों को बुलाना चाहिए था, जिनके पास अधिकतम संख्याबल है। बकौल राउत, जब भी ऐसा होता है तो लोग कहते हैं कि लोकतंत्र की हत्या हो गई, लेकिन जब देश में लोकतंत्र बचा ही नहीं है तो हत्या किसकी होगी?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विधानसभा में गांधीजी की प्रतिमा के समीप धरना-प्रदर्शन पर बैठे हुए हैं। कांग्रेस नेताओं को जेडीएस प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी. देवेगौड़ा का भी साथ मिला है। धरना में हिस्सा लेने के लिए वह भी विधानसभा परिसर पहुंचे हैं।
भाजपा के वकील और पूर्व अटॉर्नी जनरल ने आनन-फानन में मामले की सुनवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि रात में ही मामले को सुनवाई के लिए लिस्टेड करने की कोई जरूरत नहीं थी।
कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार एचडी. कुमारास्वामी ने कहा कि उनकी योजना विधयकों को सुरक्षित रखना है। उन्होंने भाजपा पर विधायकों को खरीदने का आरोप भी लगाया है।
कर्नाटक में राजनीति उफान पर है। गुलाम नबी आजाद और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अगुआई में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गांधीजी की प्रतिमा के समीप धरने पर बैठ गए हैं। वहीं, भाजपा नेता और कार्यकर्ता जश्न में डूबे हुए हैं।
दक्षिणी राज्य कर्नाटक में पांच साल के अंतराल के बाद एक बार फिर से भाजपा राज की शुरुआत हो गई है। हालांकि, पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा में बहुमत साबित करना है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है।
राज्यपाल वजूभाई वाला ने भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस. येदियुरप्पा को राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। भाजपा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिनों का वक्त दिया गया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस. येदियुरप्पा राजभवन में 9 बजे शपथ लेंगे। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद उनके आवास के बाहर समर्थकों का जमावड़ लग गया। उनकी सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।