दिल्ली लगातार देश की राजधानी के साथ-साथ प्रदूषण की राजधानी बनती जा रही है क्योंकि दिल्ली-NCR (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाज़ियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम) में प्रदूषण स्तर कई दिनों से 300–400 के बीच बना हुआ है। 15 से ज्यादा दिन दिल्ली ‘Very Poor’ श्रेणी में बिताए जा चुके हैं। इसी बीच दिल्ली सरकार ने पहले 5वीं तक की कक्षाओं को एक सप्ताह के लिए ऑनलाइन कर दिया था, लेकिन अब स्कूलों को फिर से ऑफलाइन मोड में चलाने का निर्देश दिया गया है।
कब से शुरू होंगी ऑफलाइन क्लासें
सरकार की ओर से नई गाइडलाइन न आने पर कई स्कूलों ने हाइब्रिड मोड को बंद कर दिया है लेकिन 1 दिसंबर 2025 से नर्सरी से कक्षा 5 तक के बच्चों की कक्षाएं फिर से नियमित रूप से स्कूलों में ऑफलाइन संचालित होंगी। हालांकि, प्रदूषण का स्तर कायम रहने के कारण अभिभावकों में चिंता बनी हुई है।
दिल्ली में प्रदूषण स्तर खतरनाक
ANI द्वारा साझा किए गए आनंद विहार और धौला कुंआ के विजुअल्स में शहर पर घना स्मॉग साफ देखा जा सकता है। CPCB के अनुसार गुरुवार शाम 4 बजे दिल्ली का औसत AQI 377 था, जो रात 8 बजे बढ़कर 381 पहुंच गया—दोनों ही ‘Very Poor’ कैटेगरी में आते हैं।
प्रदूषण के कारण बच्चों और बड़ों में आंखों में जलन, सिरदर्द, खांसी-जुकाम, गले में खराश, उल्टी-दस्त, सांस संबंधी दिक्कतें जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। डॉक्टरों ने मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रदूषण के नकारात्मक प्रभावों की चेतावनी दी है।
बच्चों के लिए जरूरी सावधानियां
लंबे समय तक स्कूल से दूर रहना संभव नहीं है, इसलिए स्वास्थ्य सुरक्षा बेहद जरूरी है ऐसे में बच्चों को क्या करना चाहिए?
स्कूल जाते समय N95 मास्क जरूर पहनें।
स्कूलों को आउटडोर गतिविधियां रोकनी चाहिए।
क्लासरूम में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें (यदि संभव हो)।
लगातार खांसी, बुखार या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
घर से निकलने से पहले बच्चे को हल्का नाक ऑयलिंग (घी/नारियल तेल) कर सकते हैं, जिससे प्रदूषक कण सीधे नाक में न जाएं।
पानी का सेवन बढ़ाएं, ताकि शरीर में टॉक्सिन बाहर निकल सकें।
दिल्ली में क्यों बढ़ रहा है प्रदूषण?
कुछ सप्ताहों से दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं, जिसमें दिवाली और छठ पर्व के बाद बढ़ा धुआं, पराली जलने की घटनाएं, ठंड बढ़ने से हवा की गति कम, वाहन और कंस्ट्रक्शन से उत्सर्जन और औद्योगिक क्षेत्रों का प्रदूषण जैसे कारण शामिल हैं।
ENVIRONMENT EXPERTS का कहना है कि यदि हवा की रफ्तार नहीं बढ़ी तो दिसंबर में भी स्थिति गंभीर रह सकती है, जिसे देखते हुए सरकार ने कुछ तैयारियां की हैं, जो इस प्रकार हैं।
हालांकि GRAP-3 हटाया जा चुका है, लेकिन वाटर स्प्रिंकलिंग, एंटी-स्मॉग गन, डस्ट कंट्रोल, कई निर्माण गतिविधियों पर नजर जैसे उपाय जारी हैं। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक समाधान तभी मिलेगा जब वाहन उत्सर्जन, पराली प्रबंधन और उद्योगों के प्रदूषण पर स्थायी कदम उठाए जाएं।
