सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद््द होते ही पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद््दीन को बिहार के सीवान में आत्मसमर्पण करना पड़ा, जहां से उसे फिर जेल भेज दिया गया। माफिया से ‘नेता’ बने इस व्यक्ति पर करीब पचास आपराधिक मामले दर्ज हैं। पटना हाइकोर्ट ने तीन हफ्ते पहले उसे हत्या के एक मामले में जमानत दे दी थी, जिसके बाद वह जेल से बाहर आ गया था। सुप्रीम कोर्ट ने शहाबुद््दीन की जमानत रद््द करके उन लोगों को सख्त संदेश दिया है, जो राजनीतिक संरक्षण देकर अपराधियों को बचे रहने में मदद करते हैं। गौरतलब है कि सीवान निवासी दो भाइयों की तेजाब से नहला कर हत्या करने के जुर्म में शहाबुद््दीन को उम्रकैद की सजा हो चुकी है। इस मुकदमे के मुख्य गवाह और तीसरे भाई राजीव रोशन की भी बाद में हत्या कर दी गई थी, जिसमें शहाबुद्दीन अव्वल मुल्जिम है। इसी मामले में पटना हाइकोर्ट ने सात सितंबर को जमानत दे दी थी, जिसके बाद वह जेल से बाहर आ गया था। जमानत के बाद शहाबुद््दीन ने सैकड़ों गाड़ियों का जिस तरह से काफिला निकाला, उससे लोग दंग रह गए। मीडिया में भी इस प्रकरण को लेकर काफी हो-हल्ला हुआ। सबसे असहज करने वाली जो जानकारी बाहर आई, वह थी जमानत के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कमजोर पैरवी की। यह समझते देर नहीं लगी कि बिहार सरकार में शामिल राष्ट्रीय जनता दल के दबाव के कारण अभियोजन पक्ष ने अपनी पैरवी में कोताही बरती होगी। जेल से निकलने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर की गई शहाबुद््दीन की टिप्पणियों ने भी आग में घी का काम किया। देखते-देखते यह मामला राष्ट्रीय मीडिया में छा गया।
आखिरकार मारे गए तीनों भाइयों के पिता की तरफ से मशहूर वकील और समाजसेवी प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में शहाबुद््दीन की जमानत रद््द कराने के लिए याचिका दाखिल की। इसके बाद बिहार सरकार ने भी पटना हाइकोर्ट से मिली शहाबुद््दीन की जमानत को निरस्त करने के लिए अपील की थी। भूषण ने स्पष्ट किया कि शहाबुद््दीन जेल से छूटने के बाद किसी भी नियम-कानून को नहीं मान रहा है। एक पत्रकार के हत्याकांड मामले में अभी गवाही तक नहीं हुई है। उसका बाहर रहना ठीक नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को इस बात के लिए फटकार भी लगाई कि जब हाइकोर्ट में जमानत पर सुनवाई हो रही थी, तब राज्य सरकार कहां सो रही थी! अदालत ने राजीव रोशन हत्याकांड की सुनवाई तेज करने के निर्देश भी निचली अदालत को दिए हैं। इस पूरे मामले में राष्ट्रीय जनता दल के दबाव के चलते नीतीश कुमार को अपनी छवि का नुकसान उठाना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया था कि आरोपी या तो खुद आत्मसमर्पण करे या बिहार पुलिस उसे हिरासत में ले। मुजरिम ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना, हालांकि साथ ही उसने धमकी भी दे डाली कि उसके समर्थक नीतीश सरकार को सबक सिखाएंगे। शहाबुद््दीन की जमानत रद््द होना समाज के लिए राहत की बात है। इंसाफ की जीत है। पर शहाबुद््दीन राजनीति की आड़ लेने वाला अकेला माफिया नहीं है न पार्टी के तौर पर राष्ट्रीय जनता दल अपवाद है। इसलिए यह असल सवाल अपनी जगह कायम है कि राजनीति का अपराधीकरण कैसे खत्म होगा।

