वर्ष 2006 के औरंगाबाद हथियार ढुलाई मामले में अदालती फैसला आने के साथ ही देश का ध्यान एक बार फिर आतंकवाद के तार पाकिस्तान से जुड़े होने की तरफ गया है। मुंबई की विशेष मकोका अदालत ने इस मामले में अबू जुंदाल सहित बारह आरोपियों को दोषी ठहराया है। बाईस आरोपियों में से आठ को अदालत ने बरी कर दिया; एक आरोपी सुनवाई के दौरान फरार हो गया था और एक वायदामाफ गवाह बन गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि आरोपियों का इरादा नरेंद्र मोदी, जो तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, और विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया की हत्या करना था। अदालत ने यह भी माना कि इस साजिश के तहत हथियार पाकिस्तान से लाए गए थे। यह मामला दस साल पुराना है।
मई 2006 में आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के तत्कालीन प्रमुख को औरंगाबाद में हथियारों की बड़ी खेप आने की सूचना मिली थी, जिसके आधार पर एटीएस ने एक कार और एक जीप का पीछा कर कई आरोपियों को पकड़ा था और हथियार बरामद किए थे। लेकिन आरोपियों का सरगना जैबुद््दीन अंसारी उर्फ अबू जुंदाल उस वक्त भागने में सफल हो गया था। उसे करीब तीन साल पहले सऊदी अरब ने भारत को सौंपा। स्वाभाविक ही इसे सऊदी अरब और भारत के रिश्तों में एक सकारात्मक उदाहरण के तौर पर देखा गया। वर्ष 2005 में बंगलूर के इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ साइंस पर हुए हमले में भी अबू का नाम आया था। फिर, वह 26/11 यानी नवंबर 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले का भी एक आरोपी है, जिसने कराची में बने ‘कंट्रोल रूम’ में टीवी पर दृश्य देख कर कसाब व अन्य आतंकियों को सैटेलाइट फोन से हिंदी में निर्देश दिए थे। 2006 के हथियार बरामदगी के मामले में मकोका अदालत का फैसला आने के समय ही दो और बातों ने यह हकीकत रेखांकित की है कि आतंक के तार पाकिस्तान से कितने गहरे जुड़े हुए हैं।
कश्मीर में हाल ही में पकड़े गए आतंकी बहादुर अली ने कबूल किया है कि वह पाकिस्तान का रहने वाला है और उसे लश्कर-ए-तैयबा ने ट्रेनिंग दी थी। बहादुर अली पांच दिन पहले मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया, जिसमें उसके चार साथी मारे गए। दो महीने में वह दूसरा पाकिस्तानी आतंकवादी है जिसे सुरक्षा बलों ने जिंदा पकड़ा है। मुंबई हमले केसूत्रधार और जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद ने दावा किया है कि लश्कर-ए-तैयबा के ही एक आदमी ने हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के जनाजे का नेतृत्व किया था।
इससे कश्मीर घाटी में भारत-विरोधी प्रदर्शनों के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी गुटों का हाथ होने के भारत के आरोप को बल मिलता है। लेकिन समस्या यह है कि चाहे अबू जुंदाल हो या बहादुर अली या इस तरह का कोई और शख्स, जब भी पाकिस्तान की जवाबदेही की बात उठती है तो वह यह कह कर पल्ला झाड़ने की कोशिश करता है कि ये गैर-राजकीय तत्त्व हैं, ये उसकी नुमाइंदगी नहीं करते। लेकिन सवाल है कि ऐसे संगठन पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां कैसे जारी रख पाते हैं? पाकिस्तान सरकार उनकी गतिविधियों से अनभिज्ञ होने या उनकी कारगुजारियों के बारे में पर्याप्त सबूत न होने का स्वांग करती रही है, पर दुनिया जानती है कि हकीकत क्या है।
