निर्भय कुमार पांडेय

केंद्र सरकार जब तक नए तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं करती और एमएसपी पर कानून नहीं बना देती। किसान दिल्ली के विभन्न सीमाओं पर ऐसे ही आंदोलन जारी रखेंगे। वहीं, दूसरी ओर किसानों यह भी कहा कि भले ही बारिश की वजह से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं और आंदोलन कर रहे उम्रदराज किसानों के लिए यह समय काफी दिक्कतों भरा वक्त है। पर आंदोलन कर रहे किसान एक कदम भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

किसानों ने कहा कि यह बारिश हमारी फसल के लिए अच्छी है। चिल्ला बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे राजबीर मुखिया ने कहा कि किसानों की समस्या को देखते हुए संगठनों अतिरिक्त वाटर प्रूफ तंबू की व्यवस्था की गई है।

इस बॉर्डर पर अन्य सीमाओं की तुलना में किसानों की संख्या कम है। पहले 40-50 तंबू लगाए गए थे, लेकिन लगातार हो रही बारिश की वजह से रविवार को 25-30 अतिरिक्त तंबुओं की व्यवस्था की गई है। राजबीर मुखिया ने बताया कि भले ही बारिश ने आंदोलन कर रहे किसानों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है और डंठ की वंजह से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पर दूसरी ओर देखें तो यह बारिश फसल के लिए फायदेमंद है।

किसान तो बारिश को झेल लेगा। आंदोलन की वजह से कई किसान सीमाओं पर बैठे हैं। ऐसे में बारिश ने उनकी वह परेशानी कम कर दी है, जिसकी वजह से वह डर रहा था कि इस साल सिंचाई नहीं होने से फसल को नुकासन पहुंचेगा। रविवार को जिस हिसाब से लगातार बारिश हुई है। सिंचाई के दृष्टिकोण से किसानों के लिए हर तरह से फायदेमंद है।

वहीं, गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे सतपाल सिंह ने कहा कि बारिश की वजह से भेल ही दिक्कतों का समाना करना पड़ा। पर तीनों काले कानून किसानों को मजदूर बनाने वाले हैं। यही कारण है कि किसान अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ-साथ बच्चों को लेकर दिल्ली के विभिन्न सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। किसनों ने पहले से भी ट्रैक्टर-टा्रॅली में अपना आश्यिाना बना लिया था।

बारिश होने की वजह से पूर दिन ट्रॉली में ही रहे। खाना-पानी देने के लिए सेवादार लगे हैं। सरकार को लग रहा होगा कि किसान परेशान होकर चले जाएंगे तो यह सरकार की भूल है। आंदोलन कर रहा किसान सीमाओं से तब तक नहीं हटेगा, जब तक सरकार उसकी सभी मांगे मान नहीं लेती।