भारत रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वैश्विक स्तर पर युद्ध के जो नए आयाम उभर कर सामने आ रहे हैं, उस लिहाज से रक्षा साजो-सामान का अपने देश में निर्माण और उनका उन्नयन बेहद जरूरी हो गया है। स्वदेशी एवं बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान तेजस का निर्माण भारत की इसी सोच और इच्छाशक्ति का परिणाम है। इसे देश की रक्षा तकनीक की ताकत का प्रतीक भी माना जाता है।

मगर भारतीय वायुसेना में शामिल इस विमान का दुबई में आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान शुक्रवार को हादसे का शिकार हो जाने की घटना ने रक्षा क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता की राह में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इस हादसे को इसलिए भी चिंताजनक दृष्टि से देखा जा रहा है, क्योंकि दो वर्ष के इतिहास में यह दूसरी बार है जब तेजस दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। इससे पहले मार्च 2024 में राजस्थान के जैसलमेर में भारतीय सेनाओं के एक त्रि-सेवा अभ्यास के दौरान यह लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। तब शुरुआती जांच में विमान के इंजन में तकनीकी खराबी की ओर इशारा किया गया था।

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जहां तक रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बात है तो भारत पिछले कुछ वर्षों से स्वदेशी रक्षा उत्पादन के मामले में एक नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। देश में आत्मनिर्भरता एक मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है, जिसने स्थानीय डिजाइन, विकास और विनिर्माण को प्राथमिकता देने वाली नीतियों को प्रेरित किया है। सरकारी सुधारों, रणनीतिक निवेश और औद्योगिक साझेदारियों ने नवाचार को बढ़ावा देकर घरेलू रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया है।

भारत ने स्वदेशी रक्षा प्रणाली आकाशतीर, ब्रह्मोस मिसाइल और लड़ाकू विमान तेजस जैसे रक्षा उपकरणों को तैयार कर दुनिया को अपनी तकनीक एवं उसकी शक्ति का परिचय दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की इस आधुनिक रक्षा प्रणाली ने अपनी क्षमता को बखूबी दर्ज किया है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत का रक्षा निर्यात वर्ष 2013-14 में 686 करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपए हो गया है। यह तस्वीर आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी रक्षा उद्योग के लिए देश के निरंतर एवं गहन प्रयासों को रेखांकित करती है।

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करीब दो दशक के विकास और परीक्षण के बाद लड़ाकू विमान तेजस को बेहद सुरक्षित माना जाता रहा है। इसका निर्माण वर्ष 2007 में शुरू हुआ था और जुलाई 2016 में भारतीय वायुसेना ने तेजस का पहला बेड़ा बनाया। हल्के किस्म के इस विमान का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड ने किया है। इसका ढांचा कार्बन फाइबर से बना हुआ है, जो इसे धातु की तुलना में बहुत हल्का और मजबूत बनाता है।

इसके भीतर सेंसर तरंग रडार लगा है, जो दुश्मन के विमान से लेकर जमीन से हवा में दागी गई मिसाइल का भी पता लगा सकता है। यानी यह दुश्मन से खुद की सुरक्षा करने में भी सक्षम है।

तेजस एमके-1 का उन्नत संस्करण भी जल्द तैयार होने वाला है, जो हवा से हवा में और हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों तथा एंटी रेडिएशन मिसाइल रूद्रम-2 से लैस होगा। ऐसे में तेजस की उन तकनीकी कमियों का पूरी सटीकता से पता लगाना और उन्हें दुरुस्त करना बेहद जरूरी है, जो दो बार हादसों का कारण बनी हैं। तभी यह विमान पूरी तरह सुरक्षित एवं मजबूत रक्षा ढाल बन पाएगा।