इराक के मोसुल शहर के पास चार साल पहले मारे गए भारतीय कामगारों के शव भारत आ गए हैं और परिजनों को सौंप दिए गए हैं। इन कामगारों की इस्लामिक स्टेट (आइएस) के आतंकियों ने हत्या कर दी थी। भारतीय कामगारों की हत्या का यह प्रकरण चिंताजनक तो है ही, कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है। जो भारतीय दूसरे देशों, खासतौर से अरब देशों में रोजगार के लिए जाते हैं, आखिर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? इस मामले ने सरकार को एक बार फिर इस बारे में सोचने को मजबूर किया है। संसद की एक स्थायी समिति ने भी इस बात पर जोर दिया है कि जो भारतीय दूसरे देशों में +काम करते हैं उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत तंत्र बनाने की जरूरत है। समिति ने प्रवासी कामगारों के मसले पर एक नए कानून की रूपरेखा तैयार करने का सुझाव दिया है।

मोसुल की घटना में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मारे गए लोगों के बारे में बगदाद स्थित भारतीय दूतावास के पास कोई जानकारी नहीं थी। जबकि कायदा तो यह है कि जो भी व्यक्ति रोजगार के लिए किसी देश में जाता है तो उसकी जानकारी दोनों देशों के पास होनी चाहिए। दरअसल, समस्या यह है कि अरब देशों में रोजगार के लिए अवैध रूप से जाने वालों की तादाद काफी ज्यादा है। इन देशों में काम करने वाली स्थानीय और विदेशी कंपनियां सस्ते और कुशल कामगारों की तलाश में रहती हैं। इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान जैसे देशों में बेलदारी, बढ़ई, पेंटर, प्लंबर, मिस्त्री जैसे कामगारों की भारी मांग रहती है। इन देशों में तेलशोधक संयंत्रों में भी रोजगार की संभावनाएं काफी रहती हैं। लेकिन मुश्किलें तब खड़ी होती हैं जब अवैध रूप से लोग एजेंटों के जरिए रोजगार के लिए इन देशों में पहुंचते हैं और सरकारी स्तर पर किसी भी देश को आधिकारिक रूप से इनकी बाबत जानकारी नहीं होती। ऐसे में इनकी सुरक्षा का जिम्मा किसी का नहीं होता। वे कंपनियां भी हाथ झाड़ लेती हैं जहां ये काम करते हैं। हालांकि सरकार अशांत क्षेत्रों में न जाने के लिए समय-समय पर परामर्श जारी करती रहती है, लेकिन अवैध रूप से इन क्षेत्रों में लोगों को भेजने वालों के नेटवर्क पर लगाम कसने में वह लाचार रही है।

सरकार इस तथ्य से अनजान नहीं है कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे एजेंट अपना धंधा चल रहे हैं जो अवैध रूप से लोगों को काम दिलाने के नाम पर विदेश भेजते हैं और उनसे मोटा पैसा कमाते हैं। इन एजेंटों का यह जाल दूर-दूर तक फैला है। पंजाब में ऐसे एजेंट बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं। पैसे के लालच में भोले-भाले और मजबूरी के मारे लोग इनके चंगुल में फंस जाते हैं। अवैध रूप से जाने वाले लोग दुबई या दूसरे देशों के जरिए इराक में प्रवेश करते हैं। सवाल है कि रोजगार के लिए अवैध रूप से बाहर भेजने वाले एजेंटों का जो नेटवर्क काम कर रहा है उस पर लगाम कैसे लगे?अगर सरकार ने गैरकानूनी रूप से काम कर रहे इन एजेंटों पर नकेल कसी होती तो शायद मोसुल जैसी घटना से बचा जा सकता था!